रामचरितमानस मोतीः गुरुजी द्वारा शिवजी सँ अपराध क्षमापन, शापानुग्रह आर काकभुशुण्डिक आगूक कथा
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती गुरुजी द्वारा शिवजी सँ अपराध क्षमापन, शापानुग्रह आर काकभुशुण्डिक आगूक कथा रुद्राष्टक केर स्तुतिगान उपरान्त – १. सर्वज्ञ शिवजी विनती सुनलनि आ ब्राह्मणक प्रेम देखलनि। फेर मन्दिर मे आकाशवाणी भेलैक जे हे द्विजश्रेष्ठ! वर माँगू। ब्राह्मण कहलखिन – “हे प्रभो! यदि अपने हमरा पर प्रसन्न छी आ हे … रामचरितमानस मोतीः गुरुजी द्वारा शिवजी सँ अपराध क्षमापन, शापानुग्रह आर काकभुशुण्डिक आगूक कथा



