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प्रवीण नारायण चौधरी

मोनक बात ‍- एक विचित्र अनुभूति

एक विचित्र अनुभूति – प्रवीण नारायण चौधरी (बुकानन हैमिल्टनक लेख सँ प्रेरणा प्राप्ति उपरान्तक ई मनोनुभूति) बाल्यकाल आ पढाई करबाक उमेर मे एतबा रुचि पक्के नहि छलय इतिहास पढ़य मे… खाली गणित… खाली हिसाब जोड़य मे नीक लागल करय। आब जखन इतिहासक पन्ना मे सँ अपन मूल (मौलिकता) बारे कि सब (कतय-कतय) उल्लेखित अछि, से मोनक बात ‍- एक विचित्र अनुभूति

मोरंग केर धरतीक मैथिलीपुत्र – उदय चन्द्र गोपाल

कवि-कृतित्व-व्यक्तित्व उदय चन्द्र गोपाल मोरङ्ग के बुधनगरा निवासी उदय चन्द्र गोपाल सँ २०६९ साल मे आदर्श माध्यमिक विद्यालय (विराटनगर) प्रांगण मे महाकवि विद्यापतिक स्मृति समारोह मे भेंट भेल छल । मोरङ्ग – बुधनगरा निवासी आशुकवि दयानन्द दिक्पाल यदुवंशीक संग उदय चन्द्र गोपाल सँ परिचय-पाती भेल । पुनः ३ वर्ष पूर्व बुधनगरा वयोवृद्ध कवि दिक्पालजी सँ मोरंग केर धरतीक मैथिलीपुत्र – उदय चन्द्र गोपाल

लक्ष्मीनाथ गोसाईं – एक महान् प्रेरणापुरुष

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी लक्ष्मीनाथ गोसाईं – हमरा लेल एक महान प्रेरणापुरुष हमर गाम मे गोसाईं बाबाक पदार्पण भेल छल। पुरखाजन केँ प्रेरणा प्रदान करैत श्री सीताराम भगवानक मन्दिरक स्थापना कयल जेबाक इतिहास अछि। मन्दिर आइ धरि जिबन्त आ आकर्षक ढंग सँ लोक लेल दर्शनीय अछि। बीच मे मूर्ति चोरी घटना उपरान्त नव मूर्तिक लक्ष्मीनाथ गोसाईं – एक महान् प्रेरणापुरुष

बनभोज २०२४

लेख – प्रवीण नारायण चौधरी बनभोज २०२४ नेपाल मे जनवरी (पुस आ माघ मास) मे बहुत लोक (समूह) बनभोज मनबैत अछि। एक दिन लेल सब कियो अपन घर सँ बाहर पूरा गाम-समाजक लोक सभक संग नजदीक कोनो वन सँ आच्छादित भूभाग मे गेल करैत अछि। बनभोज स्थल पर पहुँचिकय तरह-तरह के पकवान बना भोजन करबाक बनभोज २०२४

मिथिलाभाषा रामायण – बालकाण्ड – छठम् अध्यायः राम-लक्ष्मण केर धनुष-यज्ञ देखय जनकपुर पहुँचब

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण बालकाण्डः छठम् अध्याय राम-लक्ष्मण केर धनुष-यज्ञ देखय जनकपुर पहुँचब ।चौपाइ। गौतम-घरणि सरणि भल गेलि । गौतम सङ्ग पूर्व सनि भेलि ॥१॥ कौशिक कहल कुशल-मति राम । गुण कि कहब अपनै गुणधाम ॥२॥ ज्ञान-समुद्र नृपति मिथिलेश । तिरहुति सन नहि दोसर देश ॥३॥ जीवन्मुक्त जतय बस लोक मिथिलाभाषा रामायण – बालकाण्ड – छठम् अध्यायः राम-लक्ष्मण केर धनुष-यज्ञ देखय जनकपुर पहुँचब

मैथिली भाषाः गुरुजीक छौंकी

मैथिली कुमहर के बतिया नहि जे कियो आंगूर देखबिते सड़ि जायत! अनेकों कुचक्र आ अराजकता सँ गुजरि रहल मैथिली भाषा पर गये दिन किछु न किछु आपत्तिजनक विवाद होइत रहैत अछि। जखन कि मैथिली भाषा विज्ञानक अनेकों कसौटी पर कसाइत आइ एतबा ऊपर धरिक यात्रा कय चुकल अछि जे विश्वक महान् लोकतांत्रिक गणराज्य भारत के मैथिली भाषाः गुरुजीक छौंकी

भाषा तोड़यवलाक कुतर्क आ कुतर्की लोकक एकटा जिबन्त उदाहरण

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी मैथिली भाषा विश्वक प्राचीनतम् भाषा मे सँ एक अछि। एहि पर कतेको रास शोध कार्य कयल जा चुकल अछि। विश्व भरिक पैघ-पैघ विश्वविद्यालय मे मैथिली भाषा सम्बन्धी अनेकों शोधकार्यक हजारों कार्य विगत २०० वर्ष मे कयल गेल अछि। भारत, नेपाल सँ इतर पश्चिमी देशक विद्वान् लोकनि सेहो एहि पर उल्लेख्य भाषा तोड़यवलाक कुतर्क आ कुतर्की लोकक एकटा जिबन्त उदाहरण

जेकरे नाम गुलाबछड़ी सैह चलि आबय – से आबि गेल जनकपुर साहित्य कला तथा नाट्य महोत्सव

जनकपुरधाम, ४ जनवरी २०२४ । मैथिली जिन्दाबाद!! जनकपुर लिटरेचर आर्ट एन्ड ड्रामा फेस्टिवल – मचत धमगिज्जर पाँच दिन धरि मैथिली विकास कोष जनकपुर द्वारा प्रत्येक दुइ वर्ष मे कयल जायवला मैथिली भाषा, साहित्य, संस्कृति, रंगकर्म व समग्र मिथिला सभ्यताक संरक्षण-संवर्धन-प्रवर्धन निमित्त मेगा इवेन्ट “जनकपुर साहित्य कला तथा नाट्य महोत्सव’ १ फरवरी २०२४ सँ ५ फरवरी जेकरे नाम गुलाबछड़ी सैह चलि आबय – से आबि गेल जनकपुर साहित्य कला तथा नाट्य महोत्सव

एना अहुँ सब दिश भ’ रहल अछि की

लेख – प्रवीण नारायण चौधरी विराटनगर टा मे एना आ कि आरो ठाम शिक्षक आ शिक्षालय कमजोर विद्यार्थी प्रति गैरजिम्मेवार अछि त? आइ सँ ३० वर्ष पहिने अंग्रेजी माध्यमक बोर्डिंग स्कूल सब मे शिक्षण पेशा मे काज कएने छी आ ताहि समय सँ छात्र मनोविज्ञान नीक सँ बुझबाक अनुभव अछि। एहि निजी अनुभव सँ हमरा एना अहुँ सब दिश भ’ रहल अछि की

मिथिला (एक विशेष रचना – नववर्ष २०२४ पर नवतुरिया केँ समर्पित) – तीन भाषा मे

विशेष सन्देशमूलक रचना ‍- प्रवीण नारायण चौधरी मिथिला भारतवर्षक अति पुराना सुन्दर भौगोलिक देश तीरभुक्ति तिरहुत कहाबय कहाबय मिथिलादेश! हिमशिखर सँ निर्मित मस्तक निःसृत पंचदश धार स्वयं पखारय जेकर चरण केँ देवनदी गंगाक धार! जेकर माटि सिद्धभूमि छल प्रकट भेली स्वयं लक्ष्मी ‘सीता’ नारायण केर रूप राम छथि सीता सदा हुनक मीता! गढ़लनि रामचरित जे मिथिला (एक विशेष रचना – नववर्ष २०२४ पर नवतुरिया केँ समर्पित) – तीन भाषा मे