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प्रवीण नारायण चौधरी

समानान्तर – मैथिली फिल्म पर प्रवीण दृष्टिः एहिना नहि भेटैछ नेशनल फिल्म अवार्ड

विचार-विश्लेषण – प्रवीण नारायण चौधरी मैथिली फिल्म ‘समानान्तर’ – भारत मे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सँ सम्मानित – अन्तर्राष्ट्रीय स्तरक अनेकों फिल्म अवार्ड धरिक यात्रा कयल फिल्म – मात्र ११ दिन केर सूटिंग मे पूरा कयल हालीवुड स्तरक मैथिली फिल्म – कथा, परिवेश, दृश्य, संवाद, शैली – सम्पूर्ण मैथिली – हिन्दियायल मैथिलीक संवाद सँ हिन्दी फिल्म समानान्तर – मैथिली फिल्म पर प्रवीण दृष्टिः एहिना नहि भेटैछ नेशनल फिल्म अवार्ड

नेपाल मे १७ मई सँ ‘मिलन’ मैथिली फिल्म केर प्रदर्शन होयत

११ मई २०२४, मैथिली जिन्दाबाद!! १७ मई ‘सीतानवमी’ दिन सँ नेपाल मे मैथिली सिनेमा ‘मिलन’ केर प्रदर्शन २०२४ मैथिली सिनेमा लेल शुरुए सँ सफलताक स्वाद दियए लागल अछि। ५० वर्षक इतिहास मे बहुत कम सिनेमा लोकचर्चित होइ मे सफल भेल। तेहेन लोकचर्चित सिनेमा “मिलन” केर प्रदर्शन भारतक विभिन्न सिनेमा घर मे विगत मास मे आरम्भ नेपाल मे १७ मई सँ ‘मिलन’ मैथिली फिल्म केर प्रदर्शन होयत

लेख्य कृति जनकल्याणक निमित्त हो

लेख्य कृति जनकल्याण लेल हो एकटा बात पर सब ध्यान दियौक – नव लोक जँ अशुद्ध लिखय-बाजय त चलतैक, लेकिन अभ्यस्त आ सुपरिचित सर्जक जँ निरन्तर अशुद्ध लिखब त मानसिक शान्ति नहि भेटत, किछु न किछु उपद्रव होइत रहत। वाणी आ लेखनीक शुद्धता बहुत पैघ शक्ति-ऊर्जा उत्पन्न कयल करैत छैक। पहिने हमरा ई बात नहि लेख्य कृति जनकल्याणक निमित्त हो

मिथिला सौन्दर्य प्रतियोगिता २०८१ जनकपुरः आयोजक पीआरजेड केर डायरेक्टर मे अनुज मिश्र

हेलो अनुज (Anuʑ Mishɾa)! ई सूचना हमरा सभक वास्ते बहुत आह्लादकारी अछि जे पीआरजेड ग्रुप अहाँ सन होनहार युवा केँ डायरेक्टर जेहेन जिम्मेदार पद सौंपलक अछि। “मिथिला सौन्दर्य प्रतियोगिता २०८१” जनकपुर केर आयोजन मे पाश्चात्य सभ्यता जेहेन छोट-छोट कपड़ा पहिरि सुन्दरता देखेबाक बदला अपन मिथिलाक विशिष्ट सुन्दरता केँ झलकेबाक एकटा पैघ संकल्प संग अहाँ सब मिथिला सौन्दर्य प्रतियोगिता २०८१ जनकपुरः आयोजक पीआरजेड केर डायरेक्टर मे अनुज मिश्र

मैथिली सहित कुल ३ भाषा मे बनि रहल अछि फिल्म ‘लेबर’ – निर्देशक पूर्णेन्दु संग बातचीत

९ मई २०२४ । मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिली सहित कुल ३ भाषा मे बनि रहल अछि फिल्म ‘लेबर’ मनोरंजन जगत मे मैथिली फिल्म सेहो नीक प्रदर्शन करब आरम्भ कय चुकल अछि। विगत १ दशक मे भारतीय राष्ट्रिय फिल्म पुरस्कार सँ अन्तर्राष्ट्रीय जगत् केर चर्चित फिल्म अवार्ड धरिक यात्रा कय चुकल मैथिली फिल्म केँ फेरो एकटा नया मैथिली सहित कुल ३ भाषा मे बनि रहल अछि फिल्म ‘लेबर’ – निर्देशक पूर्णेन्दु संग बातचीत

मिथिला सौन्दर्य प्रतियोगिता जनकपुर मादे नव सूचना सहितक सन्देश

मैथिल युवा सेहो अधुनातन संसार संग डेग बढ़बैत आजुक भौतिकतावादी युग मे भौतिक आकर्षण सहज सत्य बनि गेल छैक। बाप-पुरखा लेल दृश्य वस्तु लौकिक कहि कोनो मोजर नहि पओलक भले, परञ्च वर्तमान सांसारिक होड़ मे अपना केँ बहुत बेसी समय धरि पाछू नहि राखि सकैत छल/अछि मैथिल। तेहेन अवस्था मे युवा समुदाय सब एकटा नया मिथिला सौन्दर्य प्रतियोगिता जनकपुर मादे नव सूचना सहितक सन्देश

नेपालक नया जनगणना (२०७८) आ मैथिली

नेपालक नया जनगणना (२०७८) आ मैथिली आइ मधेशी आयोग प्रमुख विजय दत्तजी एकटा महत्वपूर्ण पोस्ट अपन फेसबुक वाल पर साझा कयलनि अछि। नेपालक नव जनगणना (२०७८ वि. सं. साल) मे विभिन्न भाषाक स्थिति आ संग-संग पूर्व जनगणनाक स्थिति समग्रता मे लिखने छथि। अध्ययन-विश्लेषण मे रुचि रखनिहार लेल ई निम्नानुसार अछि – २०७८ सालक जनगणना अनुसार नेपालक नया जनगणना (२०७८) आ मैथिली

मिथिलाभाषा रामायणः अयोध्याकाण्ड – रामजीक भरतजी संग भेंट

कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण अयोध्याकाण्ड – नवम अध्याय रामजीक भरतजी संग भेंट ।चौपाइ। श्रीरघुनन्दन सुन्दर चरण । महि मे अङ्कित विधिगण-शरण ॥१॥ कुलिश कमल ध्वज धूलि मे रेख । अकलुष अदुख भरत से देख ॥२॥ आज धन्य भेल हमरो भाग । प्रभु-दर्शन-उतकण्ठा लाग ॥३॥ शञ्च शञ्च प्रभु आश्रम जाय । हरष नोर सौँ भरत नहाय मिथिलाभाषा रामायणः अयोध्याकाण्ड – रामजीक भरतजी संग भेंट

आजुक प्रोफेशनलिज्म ‍- मानव हित या अहित मे

चिन्तनीय प्रश्न – प्रवीण नारायण चौधरी आजुक प्रोफेशनलिज्म ‍- मानव हित या अहित मे   आइ-काल्हि प्रोफेशन (पेशा), प्रोफेशनल (व्यवसायिक) आ प्रोफेशनलिज्म (व्यवसायिकता) शब्द सब सजग समाज मे काफी लोकप्रिय शब्द रूप मे प्रयोग भ’ रहल छैक। कियैक? कियैक तँ आजुक अर्थ युग मे अर्थक प्रधानता सँ सब कियो परिचित अछि, अर्थहि केर प्राप्ति सँ आजुक प्रोफेशनलिज्म ‍- मानव हित या अहित मे

पुनर्विवाहक अधिकार सिर्फ पुरुषहि केँ कियैक?

लेख-विचार – नमिता झा स्रोतः लेखनीक धार – दहेज मुक्त मिथिला फेसबुक समूह लेखनीक धार में आजुक विषय थीक पुरुषक पुनर्विवाह आ स्त्रीक पुनर्विवाह पर विचार 🙏 अपन समाज पुरुष प्रधान समाज अछि आ सब दिन ई रहत कियैकि एकरा पर रोक लगेनाइ कठिनाहे टा नहि बल्कि असम्भव सेहो अछि। बेटी कतबो पढ़ि-लिखि कय केहनो पुनर्विवाहक अधिकार सिर्फ पुरुषहि केँ कियैक?