सुखक दिन कहिया आओत (कथा)
साहित्य – आर जे रौनक आइ हमरो एकटा खिस्सा लिखबाक मोन भेल तैँ कने छोट एकटा खिस्सा लिखलौँ। मनुष्य केँ भगवान चाहे जतेक दय देथुन मुदा सभ गोटे तृप्त नै होइत अछि । वास्तवमे ई संसार बहुत पैघ स्वार्थी जेहन लगैया, एहने एकटा खिस्सा मोन पड़ल तैँ लिखिकय अपने सभक समक्ष परसलहुँ। कोनो गाममे एकटा … सुखक दिन कहिया आओत (कथा)






