Search

प्रवीण नारायण चौधरी

सुखक दिन कहिया आओत (कथा)

साहित्य – आर जे रौनक आइ हमरो एकटा खिस्सा लिखबाक मोन भेल तैँ कने छोट एकटा खिस्सा लिखलौँ। मनुष्य केँ भगवान चाहे जतेक दय देथुन मुदा सभ गोटे तृप्त नै होइत अछि । वास्तवमे ई संसार बहुत पैघ स्वार्थी जेहन लगैया, एहने एकटा खिस्सा मोन पड़ल तैँ लिखिकय अपने सभक समक्ष परसलहुँ। कोनो गाममे एकटा सुखक दिन कहिया आओत (कथा)

मिथिला दुइ देशक भूगोल मे कोना समाहित भेल?

लेख – प्रवीण नारायण चौधरी ऐतिहासिक-पौराणिक मिथिला वर्तमान समय दुइ सम्प्रभुतासम्पन्न राष्ट्र के हिस्सा बनि गेल अछि। केना? ठीक जेना बंगाल, पंजाब आ तमिल (सिलोन) केँ क्रमशः पूर्व, पश्चिम व दक्षिण मे अंग्रेज अलग-अलग देश निर्माण करैत विभाजित कय देलक, तहिना उत्तर मे मिथिला सहित भोजपुरा, अबध, गढ़वाल, बंगाल, सिक्किम आदि सँ जुड़ि रहल नेपाली मिथिला दुइ देशक भूगोल मे कोना समाहित भेल?

नेपाल मे नागरिकता विधेयक पर वाद-विवाद आ मिथिलाक सरोकार

नेपाल मे नागरिकता विधेयकः शंका, आशंका आ राजनीति सर्वप्रथम नेपाल हाल धरि वितरित नागरिकता प्रमाणपत्र के तथ्य पर गौर करूः साभारः Badrinath Jha (Posted on Twitter: https://twitter.com/jhabadrinath/status/1559099124703989767 ) गृहमंत्रालय द्वारा २०७५ चैत्र ३ धरि देल गेल नागरिकता प्रमाणपत्र २,२१,५८,१३९ जाहि मे: १) वंशज – २,१५,४१,४१९ २) जन्मसिद्ध – १,९०,७२६ ३) वैवाहिक अंगीकृत – ४,१२,९०७ ४) नेपाल मे नागरिकता विधेयक पर वाद-विवाद आ मिथिलाक सरोकार

महत्वपूर्ण मंत्र व जानकारी

Skip to content PILGRIMAGE FACEBOOK LINKEDIN TWITTER INSTAGRAM VISHNU SAHASTR NAM STROTR विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र SHRI KRASHN WORSHIP PRAYERS श्री कृष्ण आराधना TEN MAHA VIDYA दस महा विधा MORNING & EVENING PRAYERS सन्ध्योपासना PROTECTION FROM GHOSTS, EVIL SPIRITS भूत-प्रेत-पिशाच से रक्षा PROTECTION BY BHAERVI SHIELD भैरवी कवच MAHISASUR MARDINISTOTRAM महिषासुरमर्दिनिस्तोत्रम् *RUDRASHTAK रुद्राष्टक PANCH KOSHI SADHNA महत्वपूर्ण मंत्र व जानकारी

देशहित-जनहित के गारन्टी लेल विधानक मजबूती आवश्यक

राजनीति मे नैतिकताक मापदंड कहय लेल लोकतंत्र, लोकक चयनित सरकार द्वारा विधि अनुसार शासन; लेकिन यथार्थतः छक्कल-बक्कल सँ शासन तंत्रक संचालन वर्तमान राजनीति के ‘सामान्य बात’ बनि गेल अछि। कलिकाल के बड नीक चर्चा तुलसीकृत् रामचरितमानस मे कहल गेल अछि – सो कलिकाल कठिन उरगारी। पाप परायन सब नर नारी॥ कलिमल ग्रसे धर्म सब लुप्त देशहित-जनहित के गारन्टी लेल विधानक मजबूती आवश्यक

संस्कृति मन्त्रीके सझिया ज्ञापनपत्र प्रेषित

जनकपुर, 4 अगस्त 2022। मैथिली जिन्दाबाद। संस्कृति मन्त्रीके सझिया ज्ञापनपत्र प्रेषित जनकपुरधाममे स्थापित सरकारी निकाय ‘ विद्यापति पुरस्कार कोष ‘ के कार्यविधिविपरीत भेल कामकाजक विरोध करैत मैथिली साहित्यकार सभाक अगुआइमे काल्हि केन्द्रीय संस्कृति मन्त्रीके सझिया ज्ञापनपत्र पठाओल गेल अछि। ज्ञापनपत्रमे कोषमे दस वर्षक भीतर भेल सम्पूर्ण गडबडीक छानबीनक लेल उच्च स्तरीय छानबीन समितिक गठन, कार्यविधिविपरीत संस्कृति मन्त्रीके सझिया ज्ञापनपत्र प्रेषित

मठाधीशी मुट्ठी मे फकसियारी कटैत साहित्य अकादमी मे मैथिली

मठाधीशी मुट्ठी मे फकसियारी कटैत साहित्य अकादमी मे मैथिल किसलय कृष्ण छोट-छोट बात पर सोशल मिडियाइ संसार मे विरोधक बिगूल फूँकयवला मैथिल समाज आइ भारत सरकारक साहित्य अकादमी मे बैसल मठाधीश सभक द्वारा अनुवाद पुरस्कार संग भेल घृणित निर्णय पर चुप्पी किएक सधने छथि ? ई चुप्पी मैथिली साहित्यक विराट अस्तित्व आ स्तरीयताक लेल खतरनाक मठाधीशी मुट्ठी मे फकसियारी कटैत साहित्य अकादमी मे मैथिली

रामचरितमानस मोतीः विश्वामित्रक राजा दशरथ सँ राम-लक्ष्मण केँ माँगब आ ताड़का वध

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती विश्वामित्रक राजा दशरथ सँ राम-लक्ष्मण केँ माँगब आ ताड़का वध जे व्यापक, अकल (निरवयव), इच्छारहित, अजन्मा और निर्गुण छथि आ जिनकर न नाम छन्हि न रूप, वैह भगवान भक्त वास्ते नाना प्रकारक अनुपम (अलौकिक) चरित्र करैत छथि। ई सब चरित्र हम गाबिकय (बखान करैत) कहलहुँ अछि। आब आगूक रामचरितमानस मोतीः विश्वामित्रक राजा दशरथ सँ राम-लक्ष्मण केँ माँगब आ ताड़का वध

मनन करबा योग्य कथाः आचरणभ्रष्टता सँ पतन

स्वाध्याय – एक महत्वपूर्ण नैतिक कथा – मूल लेख कल्याण सँ संकलित, संकलन एवं मैथिली अनुवाद – प्रवीण नारायण चौधरी मनन करबा योग्यः आचरणभ्रष्टता सँ पतन ब्रह्मवैवर्तपुराण मे कथा अबैत छैक, एक बेर देवराज इन्द्र निर्जन वन मे, पक पुष्पोद्यान मे गेल रहथि। ओतय हुनका रम्भा नाम के एक अप्सरा भेट भेलखिन। तदनन्तर ओ दुनू मनन करबा योग्य कथाः आचरणभ्रष्टता सँ पतन

रामचरितमानस मोतीः श्री भगवान केर प्राकट्य व बाललीलाक आनन्द

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री भगवान्‌ केर प्राकट्य और बाललीलाक आनन्द १. योग, लग्न, ग्रह, दिन आ तिथि सब अनुकूल भ’ गेल। जड़ आ चेतन सब हर्ष सँ भरि गेल। कियैक त श्रीराम केर जन्म सुखक मूल थिक। पवित्र चैत के महीना छल, नवमी तिथि छल। शुक्ल पक्ष और भगवान के प्रिय रामचरितमानस मोतीः श्री भगवान केर प्राकट्य व बाललीलाक आनन्द