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मठाधीशी मुट्ठी मे फकसियारी कटैत साहित्य अकादमी मे मैथिली

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मठाधीशी मुट्ठी मे फकसियारी कटैत साहित्य अकादमी मे मैथिल

किसलय कृष्ण

छोट-छोट बात पर सोशल मिडियाइ संसार मे विरोधक बिगूल फूँकयवला मैथिल समाज आइ भारत सरकारक साहित्य अकादमी मे बैसल मठाधीश सभक द्वारा अनुवाद पुरस्कार संग भेल घृणित निर्णय पर चुप्पी किएक सधने छथि ? ई चुप्पी मैथिली साहित्यक विराट अस्तित्व आ स्तरीयताक लेल खतरनाक सिद्ध भ’ रहल अछि । अकादमी मे मैथिली केँ एहि भाषा साहित्यक समग्र संरक्षण ओ संवर्द्धनक लेल शामिल कयल गेल छल, किछु मठाधीशक परिवारक पोषण लेल नहि ! मुदा मैथिली तँ अकादमी मे मठाधीश सभक बुनल मकड़जाल मे ओझरायल औना रहल अछि । विगत दस वर्ष सँ स्थिति बद सँ बदतर भेल जा रहल अछि आ लेखक समाज उपकृत हेबा लेल मुँह सीबि सभ कुकृत्य केँ बढ़ाबा द’ रहल छथि ।

भारत सरकारक साहित्य अकादमी मे मैथिली केँ सम्मिलित हैब पाँच दशक सँ बेसिए भ’ गेल अछि, मुदा आइयो अकादमीक परिदृश्य मे मैथिली साहित्य किछु गिनल चुनल मठाधीशक मुट्ठी मे फकसियारी कटैत आबि रहल अछि । सेमिनार सँ ल’ क’ पुरस्कार धरि आ अनुवाद सँ ल’ क’ प्रकाशन प्रक्रिया धरि गोधियाँगिरी आ चमचागिरी हावी अछि । दू दशक पहिने धरि गलत प्रक्रिया केर विरोध सेहो होइत रहलैक, मुदा जहिया सँ युवा आ बाल पुरस्कार आरम्भ भेल अछि, तहिया सँ अगिला बेरक आस संजोगने युवा वर्ग आ आनो रचनाकार चुप्पी सधने रहैत छथि एहेन प्रक्रिया सभ पर आ मैथिली परामर्शदातृ समिति मे बैसल लोक अपन आका केर फरमान पर गलती केँ दोहराबैत रहैत छथि आ फेसबुक पर बधाइ भेटिते रहैत छन्हि ।
… आ एक बेर फेर सँ मैथिली लेल साहित्य अकादमीक अनुवाद पुरस्कार काल्हि घोषणा होइतहिं मैथिलीक साहित्य समाज अचरज मे पड़ि गेल अछि । एहि बेरक अनुवाद पुरस्कार लेल मैथिली साहित्यक परिधि सँ सर्वथा अनचिन्हार रहल नाम स्मृतिशेष शिखा गोयल’क नामक घोषणा भेल अछि । ई पुरस्कार हुनका मरणोपरान्त देल जयतन्हि, जनतब दी जे वर्ष २०१६ मे दिवंगता शिखा गोयलक द्वारा मराठीक गो. नी. दाण्डेकर’क स्मृतिगाथा नामक अनुदित पोथी केर चयन निर्णायक मण्डल’क चिन्हार-अनचिन्हार विद्वान क्रमश: डा. वासुकीनाथ झा, डा. अमरनाथ चौधरी आ डा. माधुरी झा द्वारा कयल गेल अछि । काल्हि अकादमीक अधिकारिक फेसबुक पेज सँ ई घोषणा होइतहिं मैथिली साहित्यक सक्रिय लेखक अनुवाद सभ अजरज मे पड़ैत एक दोसर केँ फोन करैत लेखिकाक परिचय पूछय लगलाह, मुदा केओ पोथी तँ दूर अनुवादिकाक नाम धरि सँ परिचित नहि ! अन्तत: एहि आलेखक लेखक द्वारा अकादमी मे मैथिली परामर्शदातृ समितिक संयोजक डा. अशोक अविचल सँ सम्पर्क कयला पर ओ कहलन्हि जे ‘हमहूँ नहि चिन्ह रहल छियन्हि, प्राय: पंजाबक रहनिहारि छथि, हुनक पतिक नम्बर उपर क’ रहल छी । ई निर्णायक मंडलक निर्णय छैक, तेँ पोथियो नीके हेतै’ । संयोजक ई जवाब अचरज भरल छल ।
पुन: ह्वाट्सएप पर कयल प्रश्नक आंशिक उत्तर दैत संयोजक द्वारा दिवंगत लेखिकाक चण्डीगढ़ मे रहयवला पति राजीव गोयल’क सम्पर्क नम्बर पठाओल गेल । लेखक द्वारा जखन राजीव गोयल सँ फोन पर सम्पर्क करैत लेखिकाक संदर्भ मे जानकारी मंगैत बधाइ सेहो देल गेल, तँ हुनक जवाब छल जे ‘ हमरा पता नहि अछि जे शिखा लेखिका छलीह, तेँ हम फोटो नहि पठा सकैत छी हुनकर । ‘ आगू पुन: आग्रह पर ओ कहलन्हि जे ‘अरे भाई । मैंने कहा न, कि उसकी कोई किताब-विताब नहीं छपी है । हाँ मेरी वाइफ के पैरेण्ट्स लोग साहित्य अकादमी से जुड़े हैं । आप उनसे बात करो ।” पुन: माता-पिताक परिचय पूछला पर जवाब देलन्हि जे ‘ वो लोग दरभंगा में रहते हैं, नाम है डा. दिलीप कुमार झा और डा. वीणा ठाकुर’ एतबा कहैत फोन काटि देलनि राजीव गोयल, मुदा अनुवाद पुरस्कार’क यथार्थ सोझाँ आबि गेल ।
वर्तमान संयोजक सँ पहिने संयोजक’क पद पर डा. वीणा ठाकुर छलीह आ अपन मनमानी लेल प्रख्यात रहलीह, प्राय: ओहि समय साहित्य अकादमी पुरस्कृत आन भाषाक पोथीक मैथिली अनुवाद लेल अपन परिवार केँ उपकृत करैत रहलीह आ पति डा. दिलीप कुमार झा’क नेतृत्व मे आनन्द नामक संस्था केर गठन करैत आनन-फानन मे साहित्य अकादमी मे सूचीबद्ध करबा लेलीह । संयोजक पदक अवधि समाप्त भेला पर रसायनशास्त्री डा. प्रेममोहन मिश्र केँ संयोजक बनबैत हुनक कार्यकाल मे पहिले बेर साहित्य अकादमी पुरस्कार पर अधिकार जमौलीह । विभिन्न विवादक कारणेँ डा. प्रेममोहन मिश्र अपन कार्यकालक बीच्चहि मे त्यागपत्र देलनि आ डा. अशोक अविचल बनलाह नबका संयोजक । कहल जाइत अछि जे डा. अशोक अविचल सेहो पूर्व संयोजक वीणा ठाकुरक इशारे पर अकादमिक नाच करैत छथि आ से डा. अविचलक कार्यकाल मे साहित्य अकादमीक सेमिनार दरभंगा, सहरसा, मधेपुरा हो कि अकादमीक अन्तरराष्ट्रीय उत्सव… सभ ठाम विशिष्ट अतिथि, मुख्य वक्ता आदिक भूमिका मे अनिवार्य रूप सँ वीणा ठाकुर रहबे टा करतीह । वर्तमान अनुवाद पुरस्कार सेहो एहि चारण वन्दन, मठाधीशीक घृणास्पद परिणाम रूप मे सोझाँ आयल अछि ।
सवाल ईहो उठैत अछि जे जाहि पूर्व संयोजक डा. वीणा ठाकुर सँ एतेक प्रभावित छथि डा. अविचल, ओ अविचल आइ डा. ठाकुर’क बेटी शिखा गोयलक परिचय कहबा मे संकोची बनैत विचलित किएक भ’ गेलाह ? की हुनक एना अनजान बनबाक गप्प पुरस्कारक घृणित नेपथ्यकथा मे हिनक नेतृत्व आ संलिप्तता सिद्ध नहि करैत अछि ?
जनतब दैत चली जे साहित्य अकादमीक उक्त पोथीक अतिरिक्त शिखा गोयलक आन पोथी तँ दूर, कोनो पत्र पत्रिका, कार्यक्रम मे उपस्थिति शून्य रहल अछि । हुनक पति द्वारा शिखा गोयलक लेखिका अनुवादिका वला गप्प केँ खारिज कयल गेल अछि । अचक्के आयल ई निर्णय साहित्य अकादमीक मैथिली परामर्शदातृ समितिक वर्तमान सँ ल’ क’ पूर्व धरिक स्थिति केँ नांगट करैत, निर्णायक मण्डलक सोच आ योग्यता पर प्रश्नचिन्ह ठाढ़ करैत अछि ।
अनुवाद पुरस्कार’क एहि निर्णय पर सोशल मिडियाक माध्यमे किछु लेखक विरोध अवस्से दर्ज क’ रहल छथि, मुदा अधिसंख्य चुप्पी सधने छथि । प्रश्न ई उठैत अछि साहित्य अकादमी’क मैथिली प्रभाग मे निरन्तर भ’ रहल एहेन कुकृत्य सभ पर विराम लगेबाक लेल आवाज कहिया उठत ?
साहित्य अकादमीक मैथिली संभागक सूचीकृत सलाहकार संस्था चेतना समिति, पटना, विद्यापति सेवा संस्थान, दरभंगा, अखिल भारतीय मिथिला संघ, नई दिल्ली, मिथिला सांस्कृतिक परिषद, कोलकाता, मिथिला सांस्कृतिक परिषद, जमशेदपुर सहित सभ संस्था केँ एहि घृणित निर्णयक संज्ञान लैत अविलम्ब आवाज उठयबाक चाही ।

( लेखक मैथिलीक लेखक, संस्कृतिकर्मी आ दैनिक मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश मे समन्वय सम्पादक छथि । )

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