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प्रवीण नारायण चौधरी

मिथिला राज्यक मांग एकटा आर्थिक ओ सामाजिक आन्दोलन थिक

विचार – दिलीप कुमार झा मिथिला राज्यक मांग एकटा आर्थिक ओ सामाजिक आन्दोलन थिक कोनो राज्यक निर्माण दू तीन कारण सं होइत अछि। पहिल कारण होइत अछि ओहि क्षेत्रक एकटा भौगोलिक पहचान जे चिन्हित राज्यक निवासीक भरन पोषण लेल आर्थिक आधार तैयार करैत अछि। दोसर कारण होइत अछि ओहि क्षेत्रक फराक सांस्कृतिक पहिचान से अनेक मिथिला राज्यक मांग एकटा आर्थिक ओ सामाजिक आन्दोलन थिक

आम आदमी – मैथिली कविता

आम आदमी – मैथिली कविता – मीना मिश्रा “मुक्ता”पटना, पटेल नगर। ” आम आदमी” अभावक चौकी पर नृत्य करैतभावनाक उछाह केँ के देखत? गरीबीक धरातल पर चित्कार मारैतमोनक आर्तनाद केँ के सुनत? बीत जाइत अछि जीनगीदालि -रोटीक जोगार करैत। दम तोड़ि दैत अछि जवानीजीनगीक पसीनाक धारक प्रवाह करैत। कहाँ रहि पबैत अछि मनुखमनुखक पहचान में। आम आदमी – मैथिली कविता

रामचरितमानस मोतीः जनकजीक राम-लक्ष्मण केँ देखि मुग्धताक कथा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री राम-लक्ष्मण केँ देखिकय जनकजीक प्रेम मुग्धता १. मन प्रेम मे मग्न जानि राजा जनक विवेकक आश्रय लय धीरज धारण कयलनि आर मुनिक चरण मे सिर नमाकय गद्‍गद्‍ (प्रेमभरल) गंभीर वाणी बजलाह – हे नाथ! कहू, ई दुनू सुन्दर बालक मुनिकुल केर आभूषण छथि या कोनो राजवंश केर रामचरितमानस मोतीः जनकजीक राम-लक्ष्मण केँ देखि मुग्धताक कथा

अर्जुन दृष्टि मे मिथिला राज्य एकमात्र लक्ष्य

ई त सब जानैत आ मानैत होयब जे –   हम मैथिलीभाषीक जन्म किछु विशेष कारण सँ मिथिला पुण्यक्षेत्र मे भेल अछि। पूर्वजन्म के किछु विशेष कर्म आ प्रारब्ध के चलते एहि धर्मक्षेत्र मे मनुष्य रूप मे पदार्पण कय सकल छी। जन्म भेटब प्रकृति आ ईश्वर केर ब्रह्माण्डीय संरचनाक एकटा विलक्षण आ विचित्र घटना होइत अर्जुन दृष्टि मे मिथिला राज्य एकमात्र लक्ष्य

रामचरितमानस मोतीः श्री राम-लक्ष्मण सहित विश्वामित्र जीक जनकपुर मे प्रवेश

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री राम-लक्ष्मण सहित विश्वामित्र जीक जनकपुर मे प्रवेश रामचरितमानस मोती अन्तर्गत हमरा लोकनि मर्यादा पुरुषोत्तम रामचन्द्र जीक जीवन लीला पढ़ि रहल छी। ताहि मे सँ अपना वास्ते ज्ञानामृत सन्देश (सनेश) ग्रहण करबाक ध्येय अछि। मोती तेँ सम्बोधित कयल अछि। विगत के अध्याय मे पढ़लहुँ केना भगवान् श्री रामचन्द्र रामचरितमानस मोतीः श्री राम-लक्ष्मण सहित विश्वामित्र जीक जनकपुर मे प्रवेश

दृष्टि आ समझ सभक अलग होइत छैक – दार्शनिक दृष्टान्त

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी यात्री हम सब जीवन यात्रा मे छी। ई यात्रा पृथ्वी पर भिन्न-भिन्न जीवरूप मे प्राप्त अछि। ठीक तहिना एहि ब्रह्माण्डक अनन्त संरचना मे अनन्त पृथ्वीक परिकल्पना आ अनन्त जीवनयात्राक कल्पना यथार्थ सत्य थिक। बुझनिहार बुझैत छथि। अबुझ भटैक रहल छथि। बुझ-अबुझ केर स्थिति सेहो महान सत्य थिक। जरूरी नहि जे दृष्टि आ समझ सभक अलग होइत छैक – दार्शनिक दृष्टान्त

रामचरितमानस मोतीः अहल्या उद्धार

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती अहल्या उद्धार मुनि विश्वामित्र यज्ञ सम्पन्न कयलनि। श्री राम-लक्ष्मण यज्ञक रक्षार्थ राक्षस सँ युद्ध कय ओकरा सभक संहार कयलनि। तदोपरान्त विश्वामित्रजी दुनू भाइ संग मिथिला मे राजा जनक द्वारा घोषित धनुष यज्ञ मे सहभागिता देबाक लेल चलि देलथि। १. मार्ग मे एकटा आश्रम देखेलनि जतय पशु-पक्षी कोनो जीव-जन्तु रामचरितमानस मोतीः अहल्या उद्धार

मैथिली मिथिलाः हमर दृष्टि विगत १० वर्ष पर

मैथिली मिथिलाः १० वर्ष पर दृष्टि एहि बीच हमर निजी संचारधर्म निर्वहन मे काफी शिथिलता आबि गेल अछि। लेकिन चारू दिश संचारकर्म बढैत देखि अत्यधिक प्रसन्नता अछि। नित्य नव संचार माध्यम आ ताहि मे लाखों मैथिलक सक्रियतापूर्वक सहभागिता देखा रहल अछि। विगत १० वर्ष मे जे-जे सपना देखलियैक मिथिला लेल से सबटा ओहिना सच भ’ मैथिली मिथिलाः हमर दृष्टि विगत १० वर्ष पर

रामचरितमानस मोती – विश्वामित्र यज्ञ केर रक्षा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती विश्वामित्र-यज्ञ केर रक्षा पूर्वक अध्याय मे राजा दशरथ सँ हुनक प्राणो सँ बढिकय प्रिय पुत्र लोकनि राम व लक्ष्मण केँ विश्वामित्रजी अपना संग धर्म-यज्ञ आदिक रक्षा हेतु मांगिकय आनि लेलनि। ताड़का केर वध सेहो भ’ गेल। आब आगू…. १. सब अस्त्र-शस्त्र समर्पण कय केँ मुनि प्रभु श्री रामजी रामचरितमानस मोती – विश्वामित्र यज्ञ केर रक्षा

सुखक दिन कहिया आओत (कथा)

साहित्य – आर जे रौनक आइ हमरो एकटा खिस्सा लिखबाक मोन भेल तैँ कने छोट एकटा खिस्सा लिखलौँ। मनुष्य केँ भगवान चाहे जतेक दय देथुन मुदा सभ गोटे तृप्त नै होइत अछि । वास्तवमे ई संसार बहुत पैघ स्वार्थी जेहन लगैया, एहने एकटा खिस्सा मोन पड़ल तैँ लिखिकय अपने सभक समक्ष परसलहुँ। कोनो गाममे एकटा सुखक दिन कहिया आओत (कथा)