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प्रवीण नारायण चौधरी

रामचरितमानस मोतीः अयोध्यावासी सहित श्री भरत-शत्रुघ्न केर वनगमन

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती अयोध्यावासी सहित श्री भरत-शत्रुघ्न आदिक वनगमन १. ओ सम्पत्ति, घर, सुख, मित्र, माता, पिता, भाइ जरि जाय जे श्री रामजीक चरणक सम्मुख होइ मे हँसिते सहयोग नहि करय। घरे-घर लोक अनेको प्रकारक सवारी सब सजा रहल अछि। हृदय मे बड़ा भारी हर्ष छैक जे भोरे चलबाक अछि। २. भरतजी रामचरितमानस मोतीः अयोध्यावासी सहित श्री भरत-शत्रुघ्न केर वनगमन

रामचरितमानस मोतीः वशिष्ठ-भरत संवाद, श्री रामजी केँ अनबाक लेल चित्रकूट जेबाक तैयारी

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती वशिष्ठ-भरत संवाद, श्री रामजी केँ अनबाक लेल चित्रकूट जेबाक तैयारी १. वशिष्ठजी कहलखिन – हे तात! हृदय मे धीरज धरू आर जाहि कार्यक अवसर अछि, से करू। गुरुजीक वचन सुनि भरतजी उठलाह आ ओ अन्त्येष्टिक तैयारी करय लेल कहलनि। २. वेद मे बतायल गेल विधि मुताबिक राजाक देह रामचरितमानस मोतीः वशिष्ठ-भरत संवाद, श्री रामजी केँ अनबाक लेल चित्रकूट जेबाक तैयारी

रामचरितमानस मोतीः भरत-कौसल्या संवाद और दशरथजीक अन्त्येष्टि क्रिया

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती भरत-कौसल्या संवाद और दशरथजीक अन्त्येष्टि क्रिया १. कौसल्याजी मैल वस्त्र पहिरने छथि, चेहराक रंग बदलल छन्हि, व्याकुल भ’ रहल छथि, दुःखक बोझ सँ शरीर सुखा गेल छन्हि। एना देखाइत छथि जेना सोनाक सुन्दर कल्पलताक वन मे पाला मारि देने होइक। भरत केँ देखिते माता कौसल्याजी उठि दौड़लीह। लेकिन रामचरितमानस मोतीः भरत-कौसल्या संवाद और दशरथजीक अन्त्येष्टि क्रिया

रामचरितमानस मोतीः भरत केर आगमन आ शोक

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री भरत-शत्रुघ्न का आगमन और शोक १. बाजार आ रास्ता देखल नहि जाइछ, मानू नगर मे दसों दिशा मे दावाग्नि लागल रहय! पुत्रक अबाय सुनिकय सूर्यकुलरूपी कमल लेल चाँदनीरूपी कैकेइ बहुत हर्षित भेलीह। ओ आरती सजा आनन्द सँ भरल उठिकय दौड़लीह आ दरबज्जे पर भेटिकय भरत-शत्रुघ्न केँ महल रामचरितमानस मोतीः भरत केर आगमन आ शोक

रामचरितमानस मोतीः गुरु वशिष्ठजी द्वारा भरत केँ बजेबाक लेल दूत पठायब

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती मुनि वशिष्ठ द्वारा भरतजी केँ बजेबाक लेल दूत पठेनाय १. राजा दशरथक प्राणान्त आ शोक-विरह सँ व्याप्त अयोध्याक राजमहल मे गुरु वशिष्ठ मुनि समय अनुकूल अनेक इतिहास कहिकय अपन विज्ञानक प्रकाश सँ सभक शोक दूर कयलनि। वशिष्ठजी नाव मे तेल भरबाकय राजाक शरीर केँ ओहि मे रखबा देलनि। रामचरितमानस मोतीः गुरु वशिष्ठजी द्वारा भरत केँ बजेबाक लेल दूत पठायब

रामचरितमानस मोतीः दशरथ-सुमंत्र संवाद – दशरथ मरण

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती दशरथ-सुमन्त्र संवाद, दशरथ मरण १. महारानी कौसल्याक दरबार मे मंत्री सुमंत्र राजा दशरथ केँ देखि ‘जयजीव’ कहिकय दण्डवत्‌ प्रणाम कयलनि। सुनिते राजा व्याकुल भ’ कय उठलथि आ कहला – “सुमंत्र! कहू, राम कतय छथि?” राजा सुमंत्र केँ हृदय सँ लगा लेलनि। मानू डूबैत आदमी केँ किछु सहारा भेटि रामचरितमानस मोतीः दशरथ-सुमंत्र संवाद – दशरथ मरण

मैथिली साहित्यकार सभा जनकपुरक एगारहम् वार्षिकोत्सव सम्पन्न

जनकपुरधाम, २३ जनवरी २०२३ । मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिली भाषा-साहित्य लेल समर्पित संस्था मैथिली साहित्यकार सभा, जनकपुर केर एगारहम् वार्षिकोत्सव समारोह काल्हि २२ जनवरी २०२३ (२०७९ माघ ७ गते शनिदिन) जनकपुरधामक अधिकृत संगमक सभाकक्षमे सम्पन्न भेल अछि। एहि आयोजनक प्रमुख अतिथि राजर्षि विश्वविद्यालयक पूर्व उपकुलपति प्रा. भरत झा एवम् विशिष्ट अतिथिद्वय पूर्व राष्ट्रीय सभा सदस्य/साहित्यकार श्री मैथिली साहित्यकार सभा जनकपुरक एगारहम् वार्षिकोत्सव सम्पन्न

रामचरितमानस मोतीः सुमंत्रक अयोध्या वापसी आ जहिं-तहिं शोक के नजारा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती सुमंत्रक अयोध्या वापसी आ सर्वत्र शोक देखब १. मंत्री आर घोड़ाक ओहेन दशा देखि निषादराज विषादक वश भ’ गेलाह। तखन ओ अपन चारि उत्तम सेवक केँ बजाकय सारथीक संग कय देलनि। निषादराज गुह सारथी (सुमंत्रजी) केँ विदा कयकेँ घुरि गेलाह। हुनक विरह आर दुःख केर वर्णन नहि कयल रामचरितमानस मोतीः सुमंत्रक अयोध्या वापसी आ जहिं-तहिं शोक के नजारा

रामचरितमानस मोतीः चित्रकूट मे निवास, कोल-भील द्वारा सेवा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती चित्रकूट मे निवास, कोल-भील द्वारा सेवा १. महामुनि वाल्मीकिजी चित्रकूट केर अपरिमित महिमा बखान करैत कहलनि। तखन सीताजी सहित दुनू भाइ ओतय आबि श्रेष्ठ नदी मंदाकिनी मे स्नान कयलनि। श्री रामचन्द्रजी कहला – लक्ष्मण! बड नीक घाट छैक। आब एतहि कतहु रुकबाक इन्तजाम करू। २. तखन लक्ष्मणजी पयस्विनी रामचरितमानस मोतीः चित्रकूट मे निवास, कोल-भील द्वारा सेवा

रामचरितमानस मोतीः श्री राम-वाल्मीकि संवाद

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री राम-वाल्मीकि संवाद १. सुन्दर वन, पोखरि आ पर्वत सब देखिते प्रभु श्री रामचन्द्रजी वाल्मीकिजीक आश्रम मे एलाह। श्री रामचन्द्रजी देखलनि जे मुनिक निवास स्थान बहुत सुन्दर अछि, जतय सुन्दर पर्वत, वन आ पवित्र जल सेहो उपलब्ध अछि। सरोवर सब मे कमल आर वन सब मे गाछ सब रामचरितमानस मोतीः श्री राम-वाल्मीकि संवाद