मिथिलाभाषा रामायणः किष्किन्धाकाण्ड प्रथम अध्याय – रामजीक पम्पासर जायब
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण – किष्किन्धाकाण्ड अथ प्रथमोऽध्यायः ।पृथ्वीछन्दः। भ्रमन्निविड़काननम्बहुलभोगिपञ्चानन ॥१॥ सतीजनशिरोमणिञ्जनकजां हि पृथ्वीजनिम् ॥२॥ स्मरन्नतुलविक्रमः श्रितकनिष्ठबन्धूत्तमो ॥३॥ ददातु कुशलं सदा जगति दत्तमायाभ्रमः ॥४॥ सुग्रीवबान्धवभयोत्तितघोरदुःख-॥५॥ पाथाधिशोषणमहाबलकुम्भयानिः ॥६॥ श्रीमद्रघूत्तमविलोकनदुःखशेषः ॥७॥ पायात्स मारुतसुतो धृतविप्रवेषः ॥८॥ भावार्थः साँप आ सिंह सब सँ भरल घनघोर जंगल मे घुमैत-घुमैत, सतीशिरोमणि भूमिसुता जानकीक स्मरण मे लीन, … मिथिलाभाषा रामायणः किष्किन्धाकाण्ड प्रथम अध्याय – रामजीक पम्पासर जायब







