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प्रवीण नारायण चौधरी

मोहनाक भाग्योदय – किशोरावस्था आ युवावस्थाक मैथिल लेल सन्देश

कथा – प्रवीण नारायण चौधरी मोहनाक भाग्योदय मोहना किशोरावस्था सँ अति-कुशाग्र आ तीक्ष्ण बुद्धिक प्रदर्शन लेल चारूकात जानल जाय लागल छल । पूर्व-वर्णित कथा जाहि मे शहरी बच्चा सँ प्रतिस्पर्धा करैत ओ रैपिडेक्स इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स पढ़ि अंग्रेजियो बजबाक आ सामान्य ज्ञान सँ सतरंज खेल धरि मे पारंगत भ’ गेल छल, ठीक तहिना मैट्रिक परीक्षा मोहनाक भाग्योदय – किशोरावस्था आ युवावस्थाक मैथिल लेल सन्देश

मिथिलाभाषा रामायण – सुन्दरकाण्ड चारिम अध्याय: रावण-हनुमान संवाद

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कवि चन्द्र विरचित मिथिला भाषा रामायण सुन्दरकाण्ड – चारिम अध्याय रावणक दरबार मे हनुमानजी संग संवाद ।चौपाइ। बाँधल काँ पुरजन मिलि मार । कौतुक पहुँचल दशमुख-द्वार ॥१॥ त्रास-हीन हर्षित हनुमान । केवल कौशलेश-पद ध्यान ॥२॥ मारि गारि सबहिक सहि लेथि । पामर काँ नहि उत्तर देथि ॥३॥ मेघनाद कहलनि शुनु मिथिलाभाषा रामायण – सुन्दरकाण्ड चारिम अध्याय: रावण-हनुमान संवाद

चिन्ता आ चिन्तनक एक पुष्प ‘हिन्दी’ मेः हाल-ए-मिथिला अब ऐसा है

लेख-विचार – प्रवीण नारायण चौधरी हाल-ए-मिथिला अब ऐसा है यूँ कहें कि मिथिलाकी हाल अब ऐसा ही है । तो है कैसा ? है ऐसा कि हमारे मिथिला का ५ हिस्सों में से ४ हिस्सा हिन्दुस्तान में और १ हिस्सा नेपाल में पड़ने से बड़े हिस्से के लोग हिन्दी बोलने/समझने/लिखने में सहुलियत मानते हैं, छोटे चिन्ता आ चिन्तनक एक पुष्प ‘हिन्दी’ मेः हाल-ए-मिथिला अब ऐसा है

बड़का भैयाक पत्र पर छोट भाइक जवाब – प्रसंग टेढ़ी मे बर्बाद होइत मिथिलाक भाइ-भाइ केर कथा

बड़का टेढ़ भाइ केँ छोटका टेढ़ भाइक खुल्ला चिट्ठी नवाबगंज, नई दिल्ली – १ । दिनांकः ०९/०९/२०२४ । आदरणीय बड़का भाइजी, कुशल संग कुशलाभिलाषी! अहाँक पत्र भेटल । सब किछु पढ़ल, खूब हंसी लागल । कतेक टेढ़ी अहाँ मे एखनहुँ बचल अछि, जखन कि उमेर भेल वानप्रस्थ आश्रम प्रवेश केर । तुलनात्मक रूप सँ अपन बड़का भैयाक पत्र पर छोट भाइक जवाब – प्रसंग टेढ़ी मे बर्बाद होइत मिथिलाक भाइ-भाइ केर कथा

पार्थिव शिवलिंग पूजनोत्सव – एक समूह सँ तीन समूह मे विभाजनक पाछूक कारण की ?

विराटनगरमे आयोजित तेसर पार्थिव शिवलिंग पूजनोत्सवक सन्दर्भ मोरंगकेर ऐतिहासिक नगरी विराटनगरमे पार्थिव शिवलिंग पूजनोत्सव अत्यन्त धुमधामसाथ मनायल जाइछ । एहि वर्षक तेसर पूजनोत्सव एहि भादव २२ गते शनिदिन रानी सिकियाही स्थित मनकामनेश्वर महादेव मन्दिरक प्रांगणमे ‘अप्पन समाज’ विराटनगरक दर्जनौं भक्तलोकनि २१ हजार पार्थिव शिवलिंगक पूजा-अर्चना करैत मनौलनि अछि । एहिमे सहभागी प्रत्येक यजमान विभिन्न जाति-समुदायक पार्थिव शिवलिंग पूजनोत्सव – एक समूह सँ तीन समूह मे विभाजनक पाछूक कारण की ?

सप्तरी विचार उत्सव केर दोसर संस्करण माघ मे आयोजित कयल जायतः बरुण झा

८ सितम्बर २०२४ । मैथिली जिन्दाबाद !! मैथिली जिन्दाबाद सँ विशेष बातचीत करैत सप्तरी विचार उत्सवक दोसर संस्करणक आयोजन माघ २०८१ साल मे कुल ४ दिन धरिक समयान्तराल मे कयल जेबाक शुरुआती जनतब संयोजक बरुण झा करौलनि । बीणा फाउन्डेशन द्वारा सप्तरी विचार उत्सवक पहिल खेप जेठ ३२ गते आ आषाढ़ १ गते – दुइ सप्तरी विचार उत्सव केर दोसर संस्करण माघ मे आयोजित कयल जायतः बरुण झा

मैथिली कथाः मोहनाक जीत

मैथिली कथा – प्रवीण नारायण चौधरी मोहनाक जीत पोखरी महाड़ पर बच्चा सभक भीड़ लागि गेल रहय । शहरक स्कूल मे पढ़य वला एकटा गामहिक काका बेटा गाम आयल रहय । सब ओकरा देखय लेल जुटल छल । ओकर देह-हाथ, मुंह-कान, पहिरल कपड़ा, सब चीज आकर्षक रहय । गामक बच्चा सब देखिकय मुग्ध रहय । मैथिली कथाः मोहनाक जीत

भक्तियोग केर निरूपण – ज्ञान-विज्ञान योग (गीताक सातम् अध्याय)

स्वाध्याय गीता – सातम् अध्याय अध्याय ७ – ज्ञान विज्ञानं योग (विज्ञान सहित तत्व-ज्ञान) श्रीभगवानुवाच मय्यासक्तमनाः पार्थ योगं युञ्जन्मदाश्रयः। असंशयं समग्रं मां यथा ज्ञास्यसि तच्छृणु॥ (१) श्री भगवान कहलखिन – हे पृथापुत्र! आब ओ बात सुनू जाहि सँ अहाँ योग केर अभ्यास करिते हमरा मे अनन्य भाव सँ मन केँ स्थिर कय हमर शरण आबि भक्तियोग केर निरूपण – ज्ञान-विज्ञान योग (गीताक सातम् अध्याय)

मिथिलाभाषा रामायण – सुन्दरकाण्ड तेसर अध्याय – हनुमानजी एवं सीताजीक संवाद

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कवि चन्द्र विरचित मिथिला भाषा रामायण सुन्दरकाण्ड – तेसर अध्याय हनुमानजी एवं सीताजीक संवाद ।चौपाइ। सीता शुनथि शुनय नहि आन । शञ्च शञ्च कह तहँ हनुमान ॥१॥ राजा दशरथ काँ सुत चारि । जेठ राम काँ सीता नारि ॥२॥ शिव-धनु तोड़ल मिथिला जाय । जनक देल कन्या से न्याय ॥३॥ मिथिलाभाषा रामायण – सुन्दरकाण्ड तेसर अध्याय – हनुमानजी एवं सीताजीक संवाद

महादेव केर न्याय – रामायणक प्रसंग

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी महादेवक न्याय रामचरितमानस केर उत्तरकाण्ड मे एकटा बहुत महत्वपूर्ण प्रसंग आयल अछि । गरुड़जी श्रीराम केँ नागपाश मे बान्हल देखि श्रीरामक ऐश्वर्य प्रति भ्रमित भ’ जाइत छथि, महादेव सँ जिज्ञासा करैत छथि जे अपने हिनकहि नाम सदिखन जपैत रहैत छी या कोनो दोसर श्रीराम छथि । महादेव विहुँसिकय हुनका बुझबैत महादेव केर न्याय – रामायणक प्रसंग