Search

प्रवीण नारायण चौधरी

गायक तेजू मैथिलक भजन अभियान – जरूरत मे सहयोगक अपील

असहायक सहाय स्वयं विश्वम्भर – दीनक नाथ दीनानाथ मैथिली गायक तेजू यादव ‘मैथिल’ केर बाल्यकालहि सँ आँखिक दृष्टि हेरा गेलनि । परञ्च अन्तर्दृष्टि सँ एकदम फरिच्छ लोक, गला आ गायन मे अत्यन्त लोकप्रिय बनि अपन रोजी-रोटी कमाइत रहथि । हालहि एकटा खद्धा मे पैर पड़ि गेलनि आ जाँघक हड्डी टूटि गेलनि । जेना-तेना औपरेशन आ गायक तेजू मैथिलक भजन अभियान – जरूरत मे सहयोगक अपील

मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड – पन्द्रहम अध्यायः राम-राज्याभिषेक, देवगन्धर्व आदि द्वारा स्तुति

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण लङ्काकाण्ड – पन्द्रहम अध्याय राम-राज्याभिषेक, देवगन्धर्व आदि द्वारा स्तुति ।चौपाइ। केकयि-तनय विनय-सम्पन्न । किछु नहि मानस छल प्रच्छन्न ॥१॥ भरत कहल शुनु बड़का भाय । अपनैँ नृपति दुखी वन जाय ॥२॥ चौदह बरष छलहुँ वनवास । अयलहुँ अवधि पुराओल आस ॥३॥ जे कृति कयलनि केकयि माय मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड – पन्द्रहम अध्यायः राम-राज्याभिषेक, देवगन्धर्व आदि द्वारा स्तुति

राजा कुशध्वज जनक

राजा कुशध्वज जनक – प्रवीण नारायण चौधरी के छलाह राजा कुशध्वज ? राजा जनक जिनक अन्य नाम विदेहराज सीरध्वज छलन्हि, हुनकर छोट भाइ छलाह कुशध्वज । विदेहवंशी राजा ह्रस्वरोमाक दुइ पुत्र मध्य जेठ मिथिलाक राजा जनक कहेलनि, अनुज कुशध्वज रहथि । नेपालक एक प्रसिद्ध जिला सप्तरीक मुख्यालय ‘राजविराज’ क्षेत्रक राज्य कुशध्वज केँ भेटल छलन्हि । राजा कुशध्वज जनक

कर्ण कायस्थ महासभाक द्विदिवसीय कार्यक्रम के भेल समापन

कर्ण कायस्थ महासभा केर द्विदिवसीय ‘कर्णकुम्भ-तृतीय’क समापन नई दिल्ली। कर्ण कायस्थ समाज परंपरा आ आधुनिकतामे समन्वय करैत स्वयंकेँ समर्थ बनाबैत राष्ट्रकेँ सशक्त बनाबए, एहि आह्वानक संग कर्णकुंभ-तृतीय केर रविदिन समापन भs गेल। एहि द्विदिवसीय कार्यक्रमक आयोजन नई दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लबमे कयल गेल छल। दोसर दिनक प्रथम सत्रक विषय छल— कला क्षेत्र एवं कर्ण कायस्थ। कर्ण कायस्थ महासभाक द्विदिवसीय कार्यक्रम के भेल समापन

कर्णकुम्भ 3 केर कन्स्टिट्यूसन क्लब नई दिल्ली मे भेल शुभारंभ

  कर्ण कायस्थ महासभा केर द्विदिवसीय ‘कर्णकुंभ-3’ क कांस्टीट्यूशन क्लब, नई दिल्लीमे भेल शुभारंभ हम सभ अपन भाषा-संस्कृति छोड़ब तs समाप्त भs जाएत हमर पहचान : वैद्यनाथ लाभ नई दिल्ली। सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालयक कुलपति प्रो. वैद्यनाथ लाभ कहलनि जे कर्ण कायस्थ समाज अपन बौद्धिक क्षमतासँ देशकेँ सशक्त कएलनि अछि। हमरा सभकेँ अपन एहि कर्णकुम्भ 3 केर कन्स्टिट्यूसन क्लब नई दिल्ली मे भेल शुभारंभ

अपन महान विभूति केँ चिन्हू – राधाकृष्ण चौधरी

संछिप्त परिचय – महान विभूति राधाकृष्ण चौधरी – प्रवीण नारायण चौधरी अपन महान विभूति केँ चिन्हू – राधाकृष्ण चौधरी कतेको ठाम चर्चा अबैत अछि जे मिथिला मे एक्के टा विद्वान् विद्यापतिये टा भेलाह जे लोक खाली हुनकहि टा गुणगान करैत अछि । जी नहि ! मिथिलाक माटि-पानि मे विद्याक अद्भुत मिश्रण भेटैत अछि । एहि अपन महान विभूति केँ चिन्हू – राधाकृष्ण चौधरी

मिथिलाभाषा रामायणः लङ्काकाण्ड – चौदहम अध्यायः पुष्पक रथ सँ राम केर सदल-बल अयोध्या पहुँचब

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण लङ्काकाण्ड – चौदहम अध्याय पुष्पक रथ सँ राम केर सदल-बल अयोध्या पहुँचब ।जयकरी छन्द। क्रम क्रम सकल देखाबथि धाम । रथपर सौँ सीता काँ राम ॥१॥ गिरि त्रिकूट लङ्का रण-भूमि । काक गृद्ध मड़ड़ाइछ घूमि ॥२॥ राक्षस वानर काँ एत मारि । मुइला एतहि दशानन हारि मिथिलाभाषा रामायणः लङ्काकाण्ड – चौदहम अध्यायः पुष्पक रथ सँ राम केर सदल-बल अयोध्या पहुँचब

कवि सम्मेलन मे कविजीक वाहवाही

कविजी वाहवाह (आलोचना – प्रवीण नारायण चौधरी) पूरा पंडाल लोक सँ भरल छल । तखनहि मंच पर घोषणा भेल जे गीतनादक बाद ‘कवि-गोष्ठी’क सत्र चलत । मैथिली भाषा मे कवि सभक दशा एहने छन्हि जे आधा पंडाल ‘कवि-गोष्ठी’क नाम सुनिते चलि देलक । मैदानक बाहर कियो झाल-मुरही खा कय समय बिता रहल छल, कियो चाह कवि सम्मेलन मे कविजीक वाहवाही

मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड – तेरहम अध्यायः देवता लोकनिक राम-स्तुति – अयोध्या प्रस्थान

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण लङ्काकाण्ड – तेरहम अध्याय सब देवता लोकनिक राम केर स्तुति करब, अग्निदेव द्वारा वास्तविक सीताक लौटायब, राम केर सदल-बल अयोध्या लेल प्रस्थान ।चौपाइ। ऐरावत पर चढ़ि सुरराज । समीचीन श्री-शची समाज ॥१॥ सहस्राक्ष अयला तहिठाम । सुरगण सहित गबैत गुणग्राम ॥२॥ यम ओ वरुण कुबेर समेत मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड – तेरहम अध्यायः देवता लोकनिक राम-स्तुति – अयोध्या प्रस्थान

मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड – बारहम अध्याय: विजयोपरान्त राम द्वारा विभीषण आदिक प्रति कृतज्ञता-ज्ञापन

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण लङ्काकाण्ड – बारहम अध्याय विजयोपरान्त राम द्वारा विभीषण आदिक प्रति कृतज्ञता-ज्ञापन देखि विभीषण ओ हनुमान । अङ्गद लक्ष्मण कीश प्रधान ॥१॥ जाम्बवान आदिक रणधीर । सभ काँ तुष्ट कहल रघुवीर ॥२॥ अहँ सभहिक बाहुक बल पाबि । मारल रावण लङ्का आबि ॥३॥ यावत रवि शशि नभ मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड – बारहम अध्याय: विजयोपरान्त राम द्वारा विभीषण आदिक प्रति कृतज्ञता-ज्ञापन