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प्रवीण नारायण चौधरी

नेपाल में बालेन साह और स्वतंत्र पार्टी को अपूर्व जनादेश – विकास अब भी नहीं तो कभी नहीं

नेपाल में सम्पन्न चुनाव पर भारतीय प्रधानमंत्री का ट्विट इस वर्ष २०८२ (विक्रम संवत साल) में नेपाल में कई आशंकाओं-दुविधाओं के बीच सुशीला कार्की नेतृत्व में गठित नागरिक सरकार द्वारा वृहत् लोकतांत्रिक अभ्यास को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है । इस मौके पर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ट्विट करके बधाई देते हुए नेपाल में बालेन साह और स्वतंत्र पार्टी को अपूर्व जनादेश – विकास अब भी नहीं तो कभी नहीं

एकटा छलाह उर्दू शायर जे मैथिली मंचक शोभा बनल करथि

अलादीन ‘बेचैन’ केर स्मृति मे मैथिली भाषाक मंच सजेबाक जोश आखिरकार दिसम्बर २०१० ई. मे साकार भेल छल । विराटनगरक इतिहास मे प्रभात फेरी (शोभा यात्रा) केर अपन विशेष स्थान आ भूमिका देखैत आबि रहल छी बाल्यकाल सँ । शोभायात्रा कार्यक्रम स्थल विरेन्द्र सभागृह सँ त्रिमूर्ति चौक धरि जा कय पुनः कार्यक्रम स्थल पर वापसी एकटा छलाह उर्दू शायर जे मैथिली मंचक शोभा बनल करथि

रहिका गामक विद्यापति पर्व समारोहक इतिहास – भीमबाबूक कलम सँ

लेख-विचार रहिकाक विद्यापतिपर्व समारोह — भीमनाथ झा विद्यापति जयन्ती शुरू भेल जनजागरणक उद्देश्यसँ । बाबू भोला लाल दास आ नरेन्द्रनाथ दास, किरणजी, मधुपजी, अमरजी, मणिपद्मजी प्रभृति अनेक यशस्वी, तनिका संगहि किछु नवोदित कवि लोकनि साइकिलसँ वा पयरे, संगमे दू-चारिटा चद्दरि ल’क’, समूहमे अपन-अपन क्षेत्रक कोनो गाम पहुँचि जाथि आ ओत’ दश लोककेँ निवेदनपूर्वक जुटाक’ कविता-गीत रहिका गामक विद्यापति पर्व समारोहक इतिहास – भीमबाबूक कलम सँ

मैथिली भाषा-साहित्यक क्रान्तिकारी आयोजन – एमएलएफ अप्रैल ३-५ – तीन दिनक आयोजन मुम्बई मे

मैथिली भाषा-साहित्यक क्रान्तिकारी आयोजन – अप्रैल ३-५ तीन दिन मुम्बई मे २०१४ सँ आरम्भ “मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल” केर छठम् भाग एहि वर्ष ३, ४ आ ५ अप्रैल २०२६ केँ मड आईलैन्ड (मलाड), मुम्बई मे होमय जा रहल अछि । देल गेल जानकारी मुताबिक एहि वर्षक तीन दिवसीय आयोजन मे मैथिली भाषा-साहित्य संग रंग विधा, फिल्म, मैथिली भाषा-साहित्यक क्रान्तिकारी आयोजन – एमएलएफ अप्रैल ३-५ – तीन दिनक आयोजन मुम्बई मे

जनकपुरधाम साहित्य-कला-नाट्य महोत्सव २०८२ः प्रवीण भाव

जनकपुर सँ घुरिकय….. जनकपुरधाम साहित्य, कला तथा अन्तर्राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव २०८२ सँ घुरिकय प्रवीण मन अपने सब लेल बहुत किछु लिखबाक लेल प्रेरित अछि । मुदा समय लैत धीरे-धीरे आ टुकड़ा-टुकड़ा टा मे लिखि सकब से बाध्य छी, जीवनक विभिन्न आयाम अलग-अलग समय मांगैत रहैत अछि तेँ । काल्हि अत्यन्त दुःखी मन सँ बिना इच्छा जनकपुरधाम साहित्य-कला-नाट्य महोत्सव २०८२ः प्रवीण भाव

‘वेद’ आब मैथिली मे – पोथी परिचय

‘वेद’ विमोचन बारे जनकपुरधाम साहित्य, कला तथा अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली नाट्य महोत्सव २०८२ – मैथिली विकास कोष द्वारा आयोजित महान आयोजनक मंच सँ ‘वेद’ केर विमोचन कयल गेल । विमोचनकर्ता रहथि ‘मधेश प्रदेश’ (मिथिला) केर मुख्यमंत्री कृष्ण प्रसाद यादव, शिक्षा एवं संस्कृति मंत्री रानी शर्मा तिवारी, वरिष्ठ प्रदेश सांसद राम सरोज यादव, कृषि मंत्री श्याम पटेल, ‘वेद’ आब मैथिली मे – पोथी परिचय

महाशिवरात्रिक अवसर पर ‘धर्मसभा’ केर आयोजन

विराटनगर, १६ फरवरी २०२६ । मैथिली जिन्दाबाद !! काल्हि महाशिवरात्रि पूजनोत्सवक सुअवसर पर विराटनगर वडा नम्बर १४ केर कठकुप्पा गाम मे मैथिली एसोसिएशन नेपालक तरफ सँ एकटा ‘धर्मसभा’ केर आयोजन कयल गेल । श्री श्री १०८ बिन्देश्वर शिव मन्दिर प्रांगण मे मन्दिरक महन्थ भुपिन्दर दासक अध्यक्षता मे आयोजित एहि धर्मसभा मे मैथिली सेवा समितिक वरिष्ठ महाशिवरात्रिक अवसर पर ‘धर्मसभा’ केर आयोजन

पूज्य गुरुदेव केँ सदिखन मन आ स्मृति मे राखू – कल्याण सुनिश्चित अछि

हुनका कहियो नहि बिसरू विद्या बिना मानव पशु समान होइछ । विद्यालयक महत्व जीवन मे सर्वोपरि कहू । जन्म उपरान्त पारिवारिक पालन-पोषण मे सेहो विद्यारम्भ होइछ, मुदा औपचारिक विद्यार्जनक लेल ‘पाठशाला’ (विद्यालय) केर परिकल्पना अनुरूप मानव संसार चलि रहल अछि । विद्यालय मे अनेकों शिक्षक सँ विद्यार्थी विद्यार्जन करैछ । समस्त विद्याक महत्व ओतबे उच्च पूज्य गुरुदेव केँ सदिखन मन आ स्मृति मे राखू – कल्याण सुनिश्चित अछि

मैथिली मे ‘वेद’ पुस्तक – शंकराचार्य चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वतीक मूल लेख केर मैथिली अनुवाद

एहि वैज्ञानिक तथ्य पर सब गोटे गौर करू – श्वास नहि केवल शरीर केँ जीवित रखबाक लेल आवश्यक छैक बल्कि मन आ मानसिक स्वास्थ्य सेहो काफी हद तक एहि (श्वास) पर निर्भर करैत छैक । एना एहि लेल छैक, कियैक तँ मन जे सब विचार प्रक्रियाक कारण होइछ आ श्वास जे प्राणशक्तिक कारण होइछ, से मैथिली मे ‘वेद’ पुस्तक – शंकराचार्य चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वतीक मूल लेख केर मैथिली अनुवाद

‘वेद’ – मानव लेल श्रेष्ठ आ हितकारी पोथी मैथिली मे

वेद मैथिली मे ‘वेद’ नामक अत्यन्त महत्वपूर्ण पोथी अपने समस्त मैथिलीभाषी लेल विशेष प्रयोजनार्थ अनुवाद कयल अछि । स्वयं जाहि कोनो पठनीय सामग्री सँ हितकारी हेबाक प्रयोजन सिद्ध होइत देखल, ताहि सामग्री केँ आर नीक सँ बुझबाक आ मनन करबाक लेल निज मातृभाषा मे लिखल । एहि पुस्तक मे अहाँ केँ एतेक रास नव जानकारी ‘वेद’ – मानव लेल श्रेष्ठ आ हितकारी पोथी मैथिली मे