जनकपुर सँ घुरिकय…..
जनकपुरधाम साहित्य, कला तथा अन्तर्राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव २०८२ सँ घुरिकय प्रवीण मन अपने सब लेल बहुत किछु लिखबाक लेल प्रेरित अछि । मुदा समय लैत धीरे-धीरे आ टुकड़ा-टुकड़ा टा मे लिखि सकब से बाध्य छी, जीवनक विभिन्न आयाम अलग-अलग समय मांगैत रहैत अछि तेँ ।
काल्हि अत्यन्त दुःखी मन सँ बिना इच्छा के वापस होबय पड़ल । कतय भेटत ओ पल जे ओतय भेटि रहल छल ? प्रवीण लेल साहित्यिक-सांस्कृतिक आयोजन धरती पर स्वर्ग भेल करैछ । हम आकंठ डूबल रहैत छी आयोजन सब मे । एहि बेर असगरे नहि रही, आ नहिये रहथि हमर जीवनसंगिनी – अर्धांगिनी हमर सहयात्री जे जीवनक हरेक स्थिति मे सहचरिणीक भूमिका मे रहैत साहित्य-संस्कृति व विभिन्न आयोजन मे पर्यन्त हमर संग निभबैत रहली अछि ।
संग रहथि प्रिय मित्र व सहयात्री नेताजीद्वय श्री उमेश यादव एवं श्री पंकज वर्मा, आ ई पहिनहिं सँ तय छल जे ४-दिवसीय आयोजन मे शीघ्रातिशीघ्र वापसी करब । नेताजी सब एखन बड व्यस्त छथि । बहुते उठा आ पटक सब रहैत छन्हि – कारण नेपाल मे आगामी ५ मार्च संघीय सरकार गठन करबाक लेल प्रतिनिधिसभा सदस्य सभक चुनाव छन्हि । नेताद्वय जनकपुर मे सेहो राजनीतिक विमर्श मे व्यस्त रहथि, हम अपन साहित्यिक संसार मे उगडुम-उगडुम करैत रही ।
भोरे उठी । सूर्य प्रणाम करबाक लेल ‘सीता पैलेस’ होटल सँ रूम नम्बर ४१४ सँ बाहर अबिते साक्षात् पूर्ण सूर्यक ललाटहि पर दर्शन होइत छल । प्राणायाम व सन्ध्याक संछिप्त रूप पूर्ण कय सीधे ‘ज्ञानकूप’ स्थित ‘मैथिली भवन’ व ‘मिथिला प्रांगण’ मे पहुँचि जाइत छलहुँ । फर्स्ट क्लास नाश्ता सेहो भारत व नेपाल केर विभिन्न स्थान सँ पहुँचल साहित्य साधक सभक संग करैत रही । ब्लड प्रेशर के गोटी खाइत रही, कारण सहचरिणी रिमाइन्ड करैत रहथि त हुनको बात माथा मे राखब जरूरी छल ।
आर तेकर बाद ‘मिथिला प्रांगण’ मे सजल गज्जब सुन्दर पंडाल – मानू इन्द्रक दरबारक कोनो आयोजन हो, ताहि मे प्रवेश करी । सूर्यदेव उपर सँ ततेक लहकथि जे होइन्ह उतरि आबी ओहि अंगना मे आ देखी-सुनी ‘मैथिली विकास कोष’ द्वारा प्रत्येक दुइ वर्ष पर आयोजित कार्यक्रम “जनकपुरधाम साहित्य, कला तथा अन्तर्राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव – २०८२’ केँ ।
‘श्याम शशि’ नाम छन्हि ओहि सूर्यरूपी मैथिल केर जे आयोजनक सारा व्यवस्थापन अपन माथक गोल-ब्रह्माण्ड मे समेटिकय छोट कागज पर उतारने तड़ातड़ माइक पर पहुँचि सूचना सम्प्रेषित करैत शान्तिपूर्ण ढंग सँ सारा परिकल्पना केँ साकार रूप प्रदान करय मे भूमिका निभा रहल छलथि । सोची – दोसरो कियो पुत्र हेतैक जे हिनका जेकाँ ‘सूत्रधार’ केर भूमिका, उद्घोषकक भूमिका एतेक चरफरी सँ निर्वाह कय सकैछ । नजरि जाइत छल रमेश रंजन भाइजी पर, नजरि जाइत छल धीरेन्द्र प्रेमर्षि भाइजी पर, नजरि आर कतेको गम्भीर आ ऊर्जावान् सर्जक सब पर जाइत छल ।
जनैत छी ? जनकपुर ‘यथार्थ मिथिला’ केर प्रदर्शन करैछ एहि पृथ्वीलोक मे ! आर जिनका-जिनका ओहिठामक पानि पिबय लेल भेटि गेल, बुझू ओ सब ओतबे प्रखर आ स्वस्थ सर्जक सब छथि जे श्याम शशि जेकाँ छटा पसारि सकैत छथि । जनकपुरक आयोजनक विशालता प्रवीण अपन छोट मनस्कूप मे समेटि सकितय से सम्भव नहि छल एहि बेर – बस, अंगना आ कखनहुँ-कखनहुँ ‘मैथिली भवन” केर चारिम मंजिल पर बनल शानदार थिएटर मे ।
संग्रहालय, आर्ट-क्राफ्ट रूम, अन्यान्य चिन्तन-मनन कोठा, पुस्तकालय आ अत्यन्त शानदार परिकल्पना केँ साकार करयवला भवन परिसरक कोनो कोठा मे प्रवेश तक नहि कय सकलहुँ एहि बेर । कारण अंगना सँ फुर्सत होइते नहि छल जे रूम मे जइतहुँ ।
अंगना मे पुस्तक प्रदर्शनीक स्टाल आ गोटेक चित्रकला-हस्तकलाक स्टाल धरि मात्र प्रवीणक पहुँच भेल । अढ़ाइ दिन आयोजन देखि पेलहुँ । डेढ़ दिनक आयोजन छुटि गेल । अढ़ाइयो दिन मे बुझू सवा दिन मात्र देखि पेलहुँ, कारण सूर्य अस्त होइते देरी प्रवीणक मस्त होयबाक कतेको विदुषक इन्द्रलोक मे उतरि अयबाक अद्भुत संयोग छल एहि बेर ।
हम आयोजक समितिक अध्यक्ष आदरणीय जिबनाथ चौधरी भाइजी केँ मोन पाड़ैत छी । संयोजन दलक सक्रिय व्यवस्थापक भास्कर भाइ केँ मोन पाड़ैत छी । प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष प्रत्येक कार्यदल सदस्य केँ मोन पाड़ैत छी । जीवन मे एहि बेरुक आयोजन जेकाँ विशाल आयोजन पहिने कतहु नहि देखि सकल रही, से भाव राखैत छी ।
नाटक ‘छुतहा घैल’ आ ‘कथा नहि भेटल’ मात्र देखि सकलहुँ । बाइस्कोप छुटि गेल । ‘देसिल वयना’ भंगिमा पटनाक प्रस्तुति छुटि गेल । आ आइ जखन ई लेख लिखि रहल छी त ओहि अंगना मे हंगामा चलिये रहल अछि से सबटा छुटि गेल । अंगना आ घर मे सर्वश्रेष्ठ आयोजन, ‘न भूतो न भविष्यति’ वला ‘फील’ दय रहल अछि । हमर कैलाशपति देवाधिदेव आ गौरी भवानी एखनहुँ धरि इष्टदेव सीताराम भगवानक संग ओतहि छथि से लागि रहल अछि । हम छोट जीव, मुदा हमरो मोन ओतहि अछि सेहो सच छैक । प्रणाम जनकपुर – सैल्यूट यू अगेन एन्ड अगेन !!
आशु चौधरी एकटा भगवती नहि छलिह सहभागी विमर्शी, समस्त देवलोक जनकपुर उतरि गेल छल आ अछि कहि सकैत छी । विमर्शक विषय सब विलक्षण छल । मात्र खिचड़ी अभ्यास (मिश्रित भाषा प्रस्तुति) केर एक नव प्रयोग हमर कान मे तेहेन प्रभाव नहि दय सकल जे ‘मैथिली’ दैत अछि । लेकिन आयोजक केँ नमन जे अपन वृहत् आ खुजल सोच अनुरूप अखण्ड नेपाल राष्ट्रक हिसाब सँ ‘नेपाली’ भाषा, भोजपुरी भाषा, आदिक संग वृहत्तर सहभागिता लेलनि ।
मधेश प्रदेश सरकार, स्थानीय निकायक सहयोगी सरकार आ पंडाल निर्माता सँ लैत खाना पकेनिहार आ खुएनिहार – मंच पर अनेकों सुन्दर सामग्री सब परोसनिहार-परोसनिहाइर – सब केँ एकमुष्ट प्रणाम करैत छी । एतेक पैघ आयोजन अहीं सब सँ सम्भव अछि, नहि जाइन प्रवीणक लिलसा सेहो कहियो मोरंगक धरती पर पूरा होयत या नहि, मुदा लिलसा अछि जे एहने आयोजन अपनो कय सकी । बस । बेसी कतेक लिखू – शब्द घटि रहल अछि, समय चापि रहल अछि । फेर दोसर खंड मे आर बात….. !!
धन्यवाद सब गोटे केँ ! सादर आभार । जगज्जननी जानकी जीक दर्शन सेहो एहि लेख केर उत्कर्ष मे कय लेब, हम मन्दिर नहि जा सकलहुँ से अपने दोष – जखने मस्ती आ बचकाना मे डूबब त बड़का चीज सब छुटिये जायत । तखन त बच्चे मन अछि प्रवीणक – आनन्द लय जाउ । बम बम महादेव !!
हरिः हरः!!
