अलादीन ‘बेचैन’ केर स्मृति मे
मैथिली भाषाक मंच सजेबाक जोश आखिरकार दिसम्बर २०१० ई. मे साकार भेल छल । विराटनगरक इतिहास मे प्रभात फेरी (शोभा यात्रा) केर अपन विशेष स्थान आ भूमिका देखैत आबि रहल छी बाल्यकाल सँ । शोभायात्रा कार्यक्रम स्थल विरेन्द्र सभागृह सँ त्रिमूर्ति चौक धरि जा कय पुनः कार्यक्रम स्थल पर वापसी करैत नगर परिक्रमा सँ होइत छल । यैह परिक्रमाक आ त्रिमूर्ति चौक पर आयोजित नुक्कड़ मे भेटल छलाह विराटनगरक एक घुमन्ते-फकीर शायर ‘अलादीन बेचैन’ ।
‘मेरे मरने से पहले कफन का पैसा मुझे दे दो’ - हिनकर ई प्रस्तुति हमर हृदय केँ छूबैत छल । हिनक काव्य मे मानवीय संवेदनाक अनेकों मार्मिक गाथा भरल रहैत छल । एहि महान उर्दू शायर जे सख सँ मैथिली आ भोजपुरी मे सेहो कविता सुनबथि – आइ हृदय सँ स्मरण करैत श्रद्धाञ्जलि अर्पित करैत छियनि ।
“मुइलाक बाद हमरा जे कफन चढेमे, अनेक तामझाम आ श्रद्धाञ्जलि देमें, ताहि सँ नीक जे हम अभावग्रस्त मनुष्य जेकरा जिबय लेल सब आधारक घोर अभाव अछि, से बरु एखन जिबिते हमरा सम्हार । हमर दीन लदि गेल अछि । मानव छँ त मानवीयता देखो ।”
– हिनक एहि महान रचना ‘मेरे मरने से पहले कफन का पैसा मुझे दे दो’ केर यैह भाव रहैत छलन्हि । एकर अतिरिक्त अनेकों रचना सहितक डायरी राखल करथि संग मे । कतेको रचना जुबानी याद छलन्हि । एकटा ईमानदार मुसलमान शायर रूप मे तदोपरान्त अनेकों मंच पर हिनका संग जबर्दस्त संगत चलैत रहल । आब एहि संसार मे नहि छथि । हिनकर काव्य आ प्रस्तुति अमर अछि । आइ हिनका स्मरण करैत मन आह्लादित अछि ।
विराटनगरक त्रिमूर्तिचौक आ बनि गेल त्रिमूर्तिधाम
शायर अलादीन बेचैन संग पहिलुक भेंटवला स्थान ‘त्रिमूर्तिचौक’ केर इतिहास सेहो कनेक साझा कय ली अपने सब सँ ।
महाकवि विद्यापतिक संग अन्य नेपाली भाषाक दुइ स्रष्टा लोकनि – कवि भानुभक्त आचार्य एवं भाषाशास्त्री महानन्द प्रसाद सापकोटा सहितक ‘त्रिमूर्ति’ स्थापित छथि बरगाछी चाँदनी चौक सँ कनेक दक्षिण कोचाखाल (विराटनगर-५) मे।
अत्यन्त दूरदृष्टि सँ निर्मित एहि स्थानक पहिल नाम त्रिमूर्ति चौक सँ आब त्रिमूर्तिधाम मे परिवर्तित भेल नजरि अबैछ । आइ एतय छोटछिन व्यायाम पार्क, मन्दिर, वाचनालय आदिक संग स्थानीय समाजक सक्रियता सँ एकटा सुन्दर पर्यटकीय स्थल बनि गेल देखाइछ । ग्रामीण हाट सेहो जबरदस्त लगैत अछि एतय । चौक-चौराहा पर जेहेन सुविधा सब हेबाक चाही, सब किछु उपलब्ध अछि ।
विराटनगर महानगरपालिका व कोशी प्रदेश पर्यटन मंत्रालयक सेहो दहिन दृष्टि देखैत छी । मैथिली सेवा समिति आ हिडिप्पा साहित्यिक सांस्कृतिक संस्थाक संग भानू कला केन्द्रक संयुक्त प्रयास सँ एहि स्थलक उद्गम व विकास सम्भव भेल । हम सब अत्यन्त आरम्भ सँ एहि स्थल सँ आबद्ध छी । गर्वबोध होइत अछि ।
शायर अलादीन बेचैन केर पुण्यात्मा लेल बेर-बेर प्रार्थना करैत छी । हुनक पुनीत आत्मा हमरो सब लेल सम्बल बनय, यैह कामना सेहो करैत छी ।
हरिः हरः!!
