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प्रवीण नारायण चौधरी

सीकेडी – क्रोनिक किडनी डिजीज – खतरनाक रोग थिकः प्रवीण संस्मरण

कठिन समय सँ उबरबाक क्रम मे…. जीवन मे एहेन दुरुह पहर लगभग ३० साल बाद आयल । १९९५ मे पिताक देहावसान, २०२५ मे छोट भाइक देहावसान – जखन-जखन अपन कियो बिछुड़ैत छथि त बुझू अजीब हालत मे हम सब पड़ि जाइत छी । एक-एक क्षण मे पूरा जीवनक फ्लैश बैक (पूर्वघटित अनेकों प्रकरण) सब आँखिक सीकेडी – क्रोनिक किडनी डिजीज – खतरनाक रोग थिकः प्रवीण संस्मरण

मैथिली मिथिला हित मिथ्याचार सँ या मिथ्याचारी सँ कहियो सम्भव नहि होयत

असली तबला बजाउ तखन हेतय खरखांही (वाहवाही) लूटय लेल नहि, वास्तविक परिवर्तन लेल प्रयास करबय तखन मैथिली आ मिथिलाक हित हेतैक । ई उक्तिक प्रासंगिकता अछि ‘सामाजिक संजाल मे मैथिली-मिथिला पर गरमागरम चर्चा-वर्चा केर’ । कतेको रास चिन्तक, वैज्ञानिक, मर्मज्ञ, अभियन्ता आ विद्वान् लोकनि भाँति-भाँति केर चिन्तनयुक्त बात सब ‘सामाजिक संजाल’ मे ‘मैथिली विमर्श’ लेल मैथिली मिथिला हित मिथ्याचार सँ या मिथ्याचारी सँ कहियो सम्भव नहि होयत

वेदसारशिवस्तोत्र – स्वाध्याय – सावन मास विशेष शिवचर्चा

स्वाध्याय – सावन मास विशेष शिवचर्चा – शिवस्तवन् सावन मास २०८२ विक्रम संवत् साल – श्री श्री १०८ श्री आदिगुरु शंकराचार्य केँ बेर-बेर प्रणाम अर्पित करैत हुनकहि द्वारा कयल गेल ई सुन्दर रचना – ॥ वेदसारशिवस्तवः ॥ पशूनां पतिं पापनाशं परेशं गजेन्द्रस्य कृत्तिं वसानं वरेण्यम । जटाजूटमध्ये स्फुरद्गाङ्गवारिं महादेवमेकं स्मरामि स्मरारिम ॥१॥ हे समस्त जीव वेदसारशिवस्तोत्र – स्वाध्याय – सावन मास विशेष शिवचर्चा

मिथिला लोकसंस्कृति आ मधुश्रावणी पाबनिक गाथा-महत्ता

मिथिला लोकसंस्कृति मधुश्रावणी मिथिला के इतिहास संस्कृति, परम्परा, रीति रिवाज आ जीवन शैली के लेल जानल जाइत अछि । एहि क्षेत्रक नवविवाहिता विवाह के बाद आबएबाला पहिल साउन के कृष्णपक्षक पञ्चमी तिथि ( मौना पञ्चमी ) सँ शुरू कऽ शुक्ल पक्षक तृतीया धरि करीब तेरह सँ पन्द्रह दिन तक मधुश्रावणी पूजा करैत छथि । मधुश्रावणी मिथिला लोकसंस्कृति आ मधुश्रावणी पाबनिक गाथा-महत्ता

वेदक उपांग धर्मशास्त्रः स्मृति सभक आधार केवल वेद टा अछि

चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वती लिखित ‘द वेदाज’ नामक पुस्तक सँ लेल गेल आलेख – वेदक उपांग धर्मशास्त्र शीर्षक अन्तर्गतक उपशीर्षक कथा-वस्तु स्मृतिक आधार केवल वेद टा अछि एकर सब सँ पैघ प्रमाण महाकवि लोकनिक निर्णय मे अछि । हमरा लोकनिक धार्मिक आस्थाक संस्थापक लोकनि – शंकर, रामानुज और माधव – सेहो एहि बातक पुष्टि कयलनि अछि जे वेदक उपांग धर्मशास्त्रः स्मृति सभक आधार केवल वेद टा अछि

वेदक उपांग धर्मशास्त्र – स्मृति सब किनको स्वतंत्र इच्छा-प्रसन्नताक उपज नहि अपितु वेदक निर्देशन

स्मृति सब स्वतंत्र इच्छाक उपज नहि थिक एतय तक कि जे लोक स्मृति, अर्थात् धर्मशास्त्र, केर सम्मान करैत छथि, एहि बारे मे हुनको सब मे एकटा भ्रान्ति छन्हि । अर्थात्, ओ सब सोचैत छथि जे स्मृति सभक रचयिता लोकनि स्वतंत्र रूप सँ आर अपन इच्छा सँ एहि सिद्धान्त सभक प्रतिपादन कयलनि अछि । स्मृति सभक वेदक उपांग धर्मशास्त्र – स्मृति सब किनको स्वतंत्र इच्छा-प्रसन्नताक उपज नहि अपितु वेदक निर्देशन

धर्मशास्त्र अनुसार – विशेष चिह्न – निशानक महत्व

चिह्न – विशिष्ट निशान (चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वतीक लिखल ‘दे वेदाज’ पुस्तकक ‘वेदक उपांगः धर्मशास्त्र’ शीर्षक अन्तर्गतक विषय केर मैथिली भावानुवाद) जँ हम सब कोनो विशिष्ट धर्म सँ जुड़ल छी, त से देखेबाक लेल किछु बाहरी चिह्न या ‘निशान’ भेल करैत अछि । स्काउट्स केर एकटा विशिष्ट वर्दी होइत छैक । सेना, नौसेना आदि सँ जुड़ल लोक धर्मशास्त्र अनुसार – विशेष चिह्न – निशानक महत्व

ब्राह्मण समुदाय प्रति विरोधक भावनाक प्रसारः आजुक राजनीतिक हथियार

ब्राह्मण बनि गेल सभक खेलौना राजनीति हो कि समाज, संस्कृति हो या सभ्यता, विद्या हो या कला – हर क्षेत्र मे ‘ब्राह्मण’ समुदाय पर शाब्दिक प्रहार आइ मानू रिबाज बनल जा रहल अछि । पटना मे ७२मा स्थापना दिवस मना चुकल ‘चेतना समिति’ अपन विधान मुताबिक दशकों-दशकों सँ सारगर्भित ढंग सँ संचालन करैत आबि रहल ब्राह्मण समुदाय प्रति विरोधक भावनाक प्रसारः आजुक राजनीतिक हथियार

धर्मशास्त्र – धार्मिक नियम-उपनियम एवं निषेधाज्ञा – स्वतंत्रता बनाम अनुशासन

लेख-विचार स्वतंत्रता बनाम अनुशासन – चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वती अपन पुस्तक ‘द वेदाज’ अन्तर्गत ‘वेदक उपांगः धर्मशास्त्र’ नामक अध्याय मे लिखने छथि । एतय हम किछु सामान्य बात सब कहब । कोनो विषयक विश्लेषण कियो कतबो गहींर करय या कियो कतबो विस्तार सँ करबाक प्रयास करय, मुदा जीवन-काल मे जे असंख्य परिस्थिति सभक सामना करय पड़ैत छैक धर्मशास्त्र – धार्मिक नियम-उपनियम एवं निषेधाज्ञा – स्वतंत्रता बनाम अनुशासन

मैथिली आ लिम्बू भाषा केँ कोशी प्रदेशक सरकारी कामकाज भाषा रूप मे मान्यता लेल आन्दोलन

सरकारी कामकाजक भाषा मे मैथिली आ लिम्बू लागू करबाक मांग संग विराटनगरमे जुलूस-प्रदर्शनी विराटनगर, १९ जुलाई २०२५ । नेपाल मे संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र स्थापना आ नव संविधान घोषणा कयल जेबाक लगभग १० वर्ष बीति रहल अछि । संविधान द्वारा निर्देशित भाषा नीति लेल भाषा आयोगक गठन आ ५ वर्षक समयसीमा भीतर सरकारी कामकाज सम्बन्धी सुझाव मैथिली आ लिम्बू भाषा केँ कोशी प्रदेशक सरकारी कामकाज भाषा रूप मे मान्यता लेल आन्दोलन