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सीकेडी – क्रोनिक किडनी डिजीज – खतरनाक रोग थिकः प्रवीण संस्मरण

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कठिन समय सँ उबरबाक क्रम मे….

जीवन मे एहेन दुरुह पहर लगभग ३० साल बाद आयल । १९९५ मे पिताक देहावसान, २०२५ मे छोट भाइक देहावसान – जखन-जखन अपन कियो बिछुड़ैत छथि त बुझू अजीब हालत मे हम सब पड़ि जाइत छी । एक-एक क्षण मे पूरा जीवनक फ्लैश बैक (पूर्वघटित अनेकों प्रकरण) सब आँखिक सोझाँ लग तेना नाचय लगैछ आ मृत्युदेव बेर-बेर मानू बाजय लगैत छथि, हँसय लगैत छथि, आश्रितजन सभक मन, बुद्धि व अहंकार केँ झकझोरय लगैत छथि । क्षणहि आँखि मे नोर, क्षणहि कोंढ़ फाटब, सारा शरीर मे कम्पन, मन-मस्तिष्क औनायब – पटपटायब, अनेकों बात घटित होमय लगैछ । लेकिन किछु करब, कतबो हथोड़िया मारब या चिकरि-भोकरि कानब – दहारब, दिवंगत आत्मा अपन यात्रा सँ फेर नहि घुरैत छथि ।

एकमात्र सहारा दिवंगत आत्माक दैहिक जीवनक स्मृति आ तदोपरान्त हुनक आगामी यात्राक सुखद होयबाक परिकल्पना सहितक ‘क्रिया-कर्म’ यानि अन्त्येष्टि, पिण्डदान, क्षौरकर्म, गंगा मे अस्थि प्रवाह, विभिन्न तरहक दान आ धर्म मात्र आश्रितजनक लेल वांछित कर्म होइछ जे एकटा सुनिश्चित प्रक्रिया मुताबिक किछु समय मे हमरा-अहाँ केँ सम्हारि लैत अछि । बस । एहि प्रक्रियाक नाम थिकैक श्राद्ध जे श्रद्धा सँ दिवंगत आत्माक निमित्त सारा आश्रितजन परिजन, सर-कुटुम्ब, समाज आ स्वजन लोकनि मिलिजुलिकय विधानतः कयल करैत छथि । दिवंगत आत्मा प्रति श्रद्धाञ्जलिक क्रम निरन्तरता मे रहल करैत अछि ।

एहि सब बीच प्रत्येक सहभागी स्वजनक हृदय मे एकटा जोरदार लहरि उठल करैछ । ‘कि भ’ गेल छलन्हि हुनका ?’ यानि मृत्युक कारण प्रति सभक हृदय मे एकटा जिज्ञासा स्वतः उठल करैछ । फेर अनेकों तरहक आत्मचिन्तन सेहो भेल करैछ ओहि कारण सन्दर्भित । एहि मे यदि किनको निधन असमय (कम उमेर मे) होइत छन्हि त ई चिन्तन आर बेसी भेल करैछ । एखन हम एहि दुरुहकाल मे तीव्र चिन्तनक अजीबोगरीब स्थिति मे फँसल छी । कतबो उबरय चाहि रहल छी, बेर-बेर भाइ सन्तोषक स्मृति ओकरे दिश तानि रहल अछि । हालांकि आब प्रारम्भिक प्रक्रिया पूर्ण कय आगू बढ़ि चुकल छी । मृत्युक कारण पर चिन्तन आ तरह-तरह केर तर्क-वितर्क सब मात्र परेशान कएने अछि एखन ।

कालरूपी ‘क्रोनिक किडनी डिजीज’ (गुर्दा सम्बन्धी रोग) हमरा सँ हमर भाइ छिनि लेलक । वर्तमान युग मे आजीविका एवं भौतिक सुख लेल मचल होड़बाजी मे फँसल मनुष्य – ओकर बिगड़ल जीवनशैली, खानपान, रहन-सहन आदि; मानवीय पोषण लेल उपलब्ध खाद्य सामग्री, तेल-मसल्ला आ एतेक तक कि औषधि एवं उपचार धरिक घोर अशुद्धता – बहुत डरावना लागि रहल अछि । केकरो जीवन सुरक्षित नहि अछि । भाइ त एकटा सुपारियो तक नहि खाइत छल, आन नशापान आदिक बाते छोड़ू ! तहिना जेठ भाइ (लालभाइ) जे ब्लड कैन्सर सँ लड़ैत दिवंगत भ’ गेल छलाह, ओहो सम्पूर्ण जीवन सादगी (वगैर कोनो नशा सेवन) सँ बितौलनि, तथापि ई ‘खतरनाक जानलेवा रोग’ हमरा सँ ई दुइ ‘अपन सहोदर स्वजन’ छीनि लेलक ।

हम कामना करैत छी जे भाइ जेकाँ आर कियो एहि खतरनाक रोगक शिकार नहि बनय – एहि रोग सन्दर्भित जे जानकारी भेटल अछि से निम्न अछिः

“Chronic Kidney Disease” (CKD)

CKD is a condition where the kidneys gradually lose their ability to filter waste and excess fluid from the blood, leading to a buildup of these substances in the body.

Causes: CKD is often caused by other conditions that damage the kidneys, such as:

Diabetes: High blood sugar levels can damage blood vessels in the kidneys.

High blood pressure: Elevated blood pressure puts strain on the kidneys.

Glomerulonephritis: Inflammation of the kidney’s filtering units.

Polycystic kidney disease: An inherited condition where cysts develop in the kidneys.

Other conditions: Infections, blockages in the urinary tract, and long-term use of certain medications can also contribute.

Symptoms: Symptoms of CKD often develop slowly and may not be noticeable in the early stages. As the disease progresses, symptoms can include:

Fatigue and weakness.

Swelling in the hands, feet, or ankles.

Shortness of breath.

Changes in urination (more or less frequent, foamy urine).

Loss of appetite, nausea, or vomiting.

High blood pressure.

Diagnosis: Diagnosis typically involves blood and urine tests to assess kidney function and identify underlying causes.

Treatment: While there’s no cure for CKD, treatment focuses on managing symptoms, slowing the progression of the disease, and preventing complications. Treatment may include:

Lifestyle changes (diet, exercise, smoking cessation).

Medications to control blood pressure, blood sugar, and other related problems.

Dialysis or kidney transplant in advanced cases.

Prevention: Managing underlying conditions like diabetes and high blood pressure is crucial for preventing CKD. Regular exercise, a healthy diet, and avoiding smoking can also help.

“क्रोनिक किडनी डिजीज” (CKD)

CKD एक एहेन स्थिति होइछ जाहि मे गुर्दा धीरे-धीरे रक्त सँ अपशिष्ट आर अतिरिक्त तरल पदार्थ केँ छनबाक अपन क्षमता हरा लैत अछि, जाहि सँ शरीर मे एहेन अवांछित पदार्थ सभक संचय होमय लगैत अछि ।

कारण:

CKD अक्सर एहेन स्थिति सभक कारण होइछ जे गुर्दा केँ नुकसान पहुँचाबैत अछि, जेना:

मधुमेह: उच्च रक्त चीनीक स्तर गुर्दा मे रक्त वाहिका सब केँ नुकसान पहुँचा सकैत अछि ।

उच्च रक्तचाप: बढ़ल रक्तचाप गुर्दा पर दबाव डालैत अछि ।

ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस: गुर्दाक फ़िल्टरिंग इकाइ मे सूजन ।

पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज: एकटा वंशानुगत स्थिति जाहि मे गुर्दा मे सिस्ट विकसित भ’ जाइछ ।

अन्य स्थिति: संक्रमण, मूत्र मार्ग में रुकावट तथा किछु दबाई सभक लम्बा समय धरि उपयोग सेहो एहि मे योगदान दय सकैत अछि ।

लक्षण:

CKD केर लक्षण अक्सर धीरे-धीरे विकसित होइत अछि आर शुरुआती चरण मे ध्यान दय योग्य नहि भ’ सकैछ । जेना-जेना बीमारी बढ़ैत छैक, लक्षण सब मे ई शामिल भ’ सकैछ । जेना – थकान आर कमज़ोरी । हाथ, पैर या टखना मे सूजन ।
साँस लय मे तकलीफ । पेशाब मे बदलाव (कम या ज़्यादा बेर, झागदार पेशाब) ।
भूख नहि लागब, घुरमी या उल्टी । उच्च रक्तचाप ।

निदान:

निदान मे आमतौर पर गुर्दाक कार्यप्रणाली केर आकलन करब आर अंतर्निहित कारण सभक पहिचान करबाक लेल रक्त ओ मूत्र परीक्षण शामिल रहैछ ।

उपचार:

हालाँकि क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) केर कोनो इलाज नहि छैक, लेकिन उपचार लक्षण केँ नियंत्रित करब, रोग केर प्रगति केँ धीमा करब तथा जटिलता सब केँ रोकय पर केन्द्रित रहैत छैक । उपचार मे ई सब शामिल भ’ सकैत अछि:

जीवनशैली मे बदलाव (आहार, व्यायाम, धूम्रपान बन्द कयनाय) ।

रक्तचाप, रक्त चीनी आर अन्य सम्बन्धित समस्या सब केँ नियंत्रित करबाक लेल दबाई खेनाय ।

गम्भीर मामिला मे डायलिसिस या गुर्दा प्रत्यारोपण ।

रोकथाम: क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) केर रोकथाम वास्ते मधुमेह आ उच्च रक्तचाप जेहेन अन्तर्निहित स्थिति सभक प्रबन्धन कयनाय महत्वपूर्ण अछि । नियमित व्यायाम, स्वस्थ आहार आर धूम्रपान सँ परहेज सेहो मददगार भ’ सकैछ ।

अन्त मे, अपने लोकनि जाहि तरहें दुःख ओ वेदनाक दुरुहकाल मे अपन मानवीय सम्वेदना सँ हमरा सभक भावना संग जुड़ल रहलहुँ, तिनका सभक प्रति कृतज्ञता प्रकट करैत एहि लेख केँ एतहि विराम दैत छी ।

हरिः हरः!!

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