मैथिलीपुत्र प्रदीप रचित ‘श्री सीतावतरण महाकाव्य’ केर चारिम सर्ग
श्रीसीतावतरण महाकाव्य – श्री मैथिलीपुत्र प्रदीप रचित पहिल महापर्व चारिम सर्ग मिथिला के ऋषि यागवलक्य विदुषीगण परम विशिष्ट । कहथि श्रीसीताराम भक्ति सँ, होइछ पूर्ण अभीष्ट॥७६॥ श्री शंकर भगवान तथा, मा पारवतीजी केर। तन, मन, धन सँ छला, समर्पित सेवक भक्त कुबेर॥७७॥ चरणाश्रित भऽ रहथि सदच्छन, आन न किछु अभिलाषा। शिव-गौरी केर ध्यान-भजनमे, लीन जनिक … मैथिलीपुत्र प्रदीप रचित ‘श्री सीतावतरण महाकाव्य’ केर चारिम सर्ग









