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प्रवीण नारायण चौधरी

मैथिलीपुत्र प्रदीप रचित ‘श्री सीतावतरण महाकाव्य’ केर चारिम सर्ग

श्रीसीतावतरण महाकाव्य – श्री मैथिलीपुत्र प्रदीप रचित पहिल महापर्व चारिम सर्ग मिथिला के ऋषि यागवलक्य विदुषीगण परम विशिष्ट । कहथि श्रीसीताराम भक्ति सँ, होइछ पूर्ण अभीष्ट॥७६॥ श्री शंकर भगवान तथा, मा पारवतीजी केर। तन, मन, धन सँ छला, समर्पित सेवक भक्त कुबेर॥७७॥ चरणाश्रित भऽ रहथि सदच्छन, आन न किछु अभिलाषा। शिव-गौरी केर ध्यान-भजनमे, लीन जनिक मैथिलीपुत्र प्रदीप रचित ‘श्री सीतावतरण महाकाव्य’ केर चारिम सर्ग

जागि चुकल अछि जानकीभाव – मैथिल महिला आ मिथिलावाद

मिथिलावाद लेल मैथिल महिलाः ५०% सीट आरक्षित करय पड़त   मात्र ५ वर्ष पहिने के बात थिकैक। मैथिलीक मंच त छोड़ू, दर्शक दीर्घा पर्यन्त मे महिलाक उपस्थिति नगण्य रहैत छल। मोन पाड़ि रहल छी ‘अन्तर्राष्ट्रीय मैथिल सामाजिक अभियन्ता सम्मेलन २०१६’। जानकीशक्ति केर आह्वान एहि कार्यक्रमक एक अभिन्न हिस्सा छल। डा. चन्द्रमणि द्वारा जानकीभाव आ आजुक जागि चुकल अछि जानकीभाव – मैथिल महिला आ मिथिलावाद

हास्य-प्रहसनः दहेजखौका भाईजी सब के समर्पित

लेख – चेतना झा #दहेजखौका भाईजी सब के समर्पित त भाईजी सब, की समाचार छै?? बियाह ठीक भेल की नै? कतेक रेट तय भेल अपनेक?? अरे! मतलब दहेज कते ल रहल छी?? की कहलियैक? नै सोचलियै अखन? अरे त जल्दी सोचु। अरे मजाक नै करै छी। आब बियाह क रहल छी त स्वभाविक छै लड़की हास्य-प्रहसनः दहेजखौका भाईजी सब के समर्पित

मैथिल मुसलमान कवि लोकनिक मातृभाषा मैथिली लेल योगदान

मैथिल मुसलमान आ मैथिली साहित्य – विजय कुमार झा मिथिलाक मुस्लिम धर्मावलम्बी लोकनि अपन धार्मिक भाषा अरबीक बाद सबसँ बेसी मैथिली भाषाक पालन पोषण कयलनि अछि । मिथिला में मुहर्रम में अपन धार्मिक “मरसिया ” मैथिली में पढैत वा गबैत अछि –   चलला इमाम कर्बलाक बनमे माया रखियौ दिलमे लोगो माया रखियौ जी अपने मैथिल मुसलमान कवि लोकनिक मातृभाषा मैथिली लेल योगदान

नेपाल सरकार द्वारा मिथिला चित्र आधारित 17 डाक टिकट जारी

११ जनवरी २०२२ । मैथिली जिन्दाबाद!! मिथिला सेंटर, यूएसए केर अध्यक्ष अमित प्रताप साह जानकारी दैत हर्ष प्रकट कयलथि अछि जे नेपाल सरकार द्वारा मिथिला चित्रकला मे सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Growth) प्राप्त करबाक लेल नेपाल मे पोस्टल स्टाम्प जारी कयल गेल अछि। ओ कहलनि अछि जे नव साल 2022 केर शुरुआत मे ई नेपाल सरकार द्वारा मिथिला चित्र आधारित 17 डाक टिकट जारी

मिथिला राज्य पर आधारित एक महत्वपूर्ण शोधपत्र (गूगल अनुवादित)

भारत के केंद्र और परिधि के बीच मिथिला की खोज   अलख निरंजन सिंह* और प्रभाकर सिंह**   उत्तरी बिहार में मिथिला का भाषाई क्षेत्र भारत के कई सांस्कृतिक ‘अन्य’ में से एक रहा है। बंगाल के तत्कालीन प्रेसीडेंसी का हिस्सा, मिथिला की बौद्धिक पहचान काफी हद तक बंगाल के बड़े सांस्कृतिक क्षेत्र में समा मिथिला राज्य पर आधारित एक महत्वपूर्ण शोधपत्र (गूगल अनुवादित)

कोशी आरती – मैथिली कवि अरविन्द मिश्र नीरज कृत्

१० जनवरी २०२२ । मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिली भाषा जनगणना मे दर्ज कराउ, संविधान मे अपन मिथिला राज्य केँ लाउ – एहि आह्वान संग मिथिला राज्य निर्माण सेना द्वारा आयोजित मिथिला पुनर्जागरण यात्रा केर दोसर चरण मे मिथिलाक एक सुप्रसिद्ध कारू खिरहर स्थान मे प्रथम दिनक विश्राम आयोजित भेल छल। एहि क्रम मे कारू बाबाक भव्य कोशी आरती – मैथिली कवि अरविन्द मिश्र नीरज कृत्

प्रदेश २ मे समाजवादी संस्कृतिकर्मी संगठन निर्माण

विद्यानन्द बेदर्दी, राजविराज। ३१ दिसम्बर २०२१। मैथिली जिन्दाबाद!! गीतकार भूषण सिंह ‘भँवर’ क अध्यक्षतामे २९ सदस्य सहित ‘समाजवादी साँस्कृतिक महासंघ, सप्तरी’ गठन । २२ गोटे पहिचानक आन्दोलनमे योगदान देनिहार कलाकारकेँ सम्मान। व्यवस्था परिवर्तनमे कलाकारसबहक महत्वपूर्ण योगदान अछि : प्रमुख अतिथि मन्त्री साह। प्रदेश नम्बर २ के अर्थमन्त्री मा. शैलेन्द्र प्रसाद साह वर्तमान शासन व्यवस्था परिवर्तन प्रदेश २ मे समाजवादी संस्कृतिकर्मी संगठन निर्माण

२०२१ केर जाइत जाइत एक अत्यन्त जरूरी चर्चा – प्रवीणक कलम सँ

कहियो ई सोचलियैक या विचारलियैक जे…..     मिथिलाक्षेत्रक एकमात्र भाषा ‘मैथिली’ लेल सुसंगठित कार्य कतेक भेल? राज्य द्वारा भाषा-संस्कृतिक विकास लेल कि सब योगदान कयल गेल?   एहि दुओ प्रश्नक उत्तर सहजहि भेटि जायत। आधुनिक भारत व नेपाल दुनू देश मे विद्यमान् मिथिला, एहि ठामक भाषा, संस्कृति आ समाजक विकास हेतु राज्य द्वारा लागू २०२१ केर जाइत जाइत एक अत्यन्त जरूरी चर्चा – प्रवीणक कलम सँ

हमर सभ्यता आ भूगोल केर अवस्था दयनीय कियैक

सभ्यता पर खतरा   कनी गौर करूः   “भाषा सँ साहित्य – साहित्य सँ संस्कार – संस्कार सँ संस्कृति – संस्कृति सँ सभ्यता – सभ्यता सँ भूगोल”   ई पंक्ति एकटा सूत्र थिकैक। एहि सूत्र के आधार पर हम सब मिथिला के छी। मैथिली हमरा सभक भाषा छी। एहि भाषा मे लिखित साहित्य मात्र १००० हमर सभ्यता आ भूगोल केर अवस्था दयनीय कियैक