सत्यकथाः एकटा अचला छलीह जिनका……
कथा – प्रवीण नारायण चौधरी एकटा अचला छलीह जिनका….. (सत्यकथा – सन्देशः परिवेशक पहिचान अत्यावश्यक) [आइ-काल्हि बहुत रास नवविवाहिता संग अचला जेहेन स्थिति सम्भव अछि । अहाँ कोनो बात नीके सोचिकय करब, मुदा अहाँक नीक केँ बेर-बेर दूसल जायत, हतोत्साहित कयल जायत, कन्फ्यूज बना देत परिवेशक लोक – तखन अहाँ कि करब ?] अचला अपन … सत्यकथाः एकटा अचला छलीह जिनका……





