हालहि सम्पन्न पाँचम मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल मुम्बई मे एकटा विमर्शक सत्र छल “सीताः मिथिलाक अस्मिताक परिचिति जानकी”, विमर्शक संचालक छलाह अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी के प्राध्यापक कमलानन्द झा विभूति, विमर्शी सब छलाह वरिष्ठ मैथिली साहित्यकार विभूति आनन्द, कृष्णमोहन झा, डा. लीना झा, विभा झा, जिबनाथ चौधरी एवं राजेश कुमार झा। चर्चा मे रामायण आ जानकी हावी … ‘सीताः मिथिलाक अस्मिताक परिचिति जानकी – मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल २०२३ केर विमर्श पर समीक्षा’
आलेख – एस. सी. सुमन बैशाख १ : जइ धरती पर प्रेम फूलै छै कुश्मा आ सलहेश (सातम् –आठम् शताब्दीसँ फूलैत आएल विश्वास अछि) मूल लेखः नेपाली भाषा मे प्रकाशित, अनुवाद आ मैथिली प्रकाशनः साभार आइ लव मिथिला डट कम नवका साल प्रारम्भ सङ्गे चर्चा होइत छैक सिरहा, लहान आ सलहेशके । मिथिलाञ्चलमे गाम देवताकेँ … बैशाख १ : जइ धरती पर प्रेम फूलै छै कुश्मा आ सलहेश
कविता – रूपा झा हम छी चौबटिया। भरि बरख अहाँक लतखुरदन स’ आहत मर्माहत हम, प्यासल रहै छी भरि बरख, बाट जोहैत, टकटकी लगेने रहै छी, कहिया आओत जुड़ि शीतल, कहिया हैत हमरो भोर, आ जुड़ाएब हमहुँ, ओइ मनुक्खक हाथ स’, जे मनुक्ख भरि बरख हमरा छातीपर करैत अछि, निशाभागो राति मे लतखुरदन, आ हम … हम छी चौबटियाः रूपा झा रचित जुड़ि शीतल विशेष मैथिली कविता
विचार – राजकिशोर झा हे बंधुगण! अपन गलती, हरगिज़ नहि अहाँ करू कबूल, दोसर के माथा मढ़ि दियौ, अप्पन हिस्सा केर सब भूल? #Different vs. #Difficult साहित्यकार, गीतकार, गायक, प्रोफेशनल्स, संगीतकार, शिक्षक, अधिकारी, व्यापारी, कर्मचारी, राजनेता आदि – ई सब different छथि की difficult? मानव दर्शन (ह्यूमन साइकोलॉजी) केर अध्ययनानुसार एहि संसारमे सब व्यक्ति अलग … मैथिलजनः डिफरेन्ट वर्सेस डिफिकल्ट
विक्रम संवत २०७९ के हमर अनुभवः तीत आ मीठ आइये के दिन राजा विक्रमादित्य भारतवर्षीय भूमि, भेष, भूषण पर बाहरी आक्रान्ता शक पर विजय हासिल करैत मुक्त करौलनि तेँ एकरा ‘विक्रम संवत’ साल कहल जाइछ। एतबा नहि – आइ नव वर्ष, ‘जुड़ि शीतल’। जुड़ायल रहू – पैघक आशीर्वादक लोकरीतिक मंत्र। खाली ढ़कोसला आ आडम्बर नहि, … नव वर्ष २०८० विक्रम संवत सालः अपन मोनक किछु बात पाठक लेल
मैथिली कथा – प्रवीण नारायण चौधरी मुम्बई वाली भौजी बड़का बौआ आ पढुआ बाबू केँ मुम्बई वाली भौजी बड बेसी हुथियारैत रहथिन। बड़का बौआ दून स्कूल सँ पढ़लन्हि तेँ ओ अपनहि बड़ काबिल लोक। पढुआ बाबू 5 गो विषय सँ एमए कय डिग्री के भरमार लगा रेकर्ड बनेनिहार महापुरुष। ताहि बीच बिड़ला कम्पनी के मुम्बई … मुम्बई वाली भौजी – मैथिली कथा माध्यम सँ मैथिली लिटरेचर फेस्टिवलक एक छोट विवेचना
१४ अप्रैल २०२३, मैथिली जिन्दाबाद!! “अखिल भारतीय मिथिला संघ” छत्तीसगढ़ समूह केर एक सदस्य प्रभात दत्त झा द्वारा समूह के एडमिन सँ एकटा प्रस्ताव राखल गेल छल जे प्रवासी समाज जे अपन भाषा-संस्कृति सँ बहुत पहिनहि दूर भ’ गेलथि, हुनका सब लेल किछु एहेन कार्य कयल जाय जाहि सँ ओ लोकनि फेर सँ घरवापसी कय … प्रवासी मैथिलक हार्दिक इच्छाः फेर सँ सीखी अपन भाषा
मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल २०२३ – मुम्बई सँ वापसी उपरान्त साहित्य प्रशंसक आ साधक मे फर्क #मैथिलीसाहित्य #घटैतपाठक #आत्मप्रशंसीसाहित्यकार साहित्यक प्रशंसक (दीवाना) आ साहित्यक साधक मे फर्क होइत छैक। हमरा ई कहय मे कनिकबो हर्ज नहि जे साहित्यक साधक बनय लेल हमरा मे धीरता, गम्भीरता आ लगनशीलताक जेहेन परमावश्यक गुण विकसित नहि भ’ सकल अछि एखन … साहित्य प्रशंसक आ साधक मे फर्क – मुम्बई एमएलएफ सँ वापसी उपरान्त
कतय जा रहल अछि मानव समाज? मानव समाज मे नारीक महत्ता बहुत बेसी छैक। नारी मात्र ओ शक्ति छथि जिनका मे मातृत्वक गुण होइत छन्हि। पुरुषक आध्यात्मिक स्वरूप मे नारीक प्रतिरक्षा प्रति बेसी जिम्मेदार प्राकृतिक नियम थिक। मानव कि, पशुअहु सब मे यैह नीति लागू कयल गेल छैक प्रकृति द्वारा। एकटा नर चिड़ैयाँ अपन … नीति, नीयत आ नियमः सन्दर्भ नारी आ नारी धर्म