घर फूटे गँवार लूटे – मैथिलीक दुर्दशाक जिम्मेदार स्वयं मैथिलीभाषी
विचार – गौरी शंकर झा कहबी अछि “घर फुटय गमार लूटैय”। से चरितार्थ भेल। हमर मनतब मंत्रीजीक कथन असंतोषजनक थिक किन्तु अनर्गल नहिं थिक। कियैक त ओ जैह देखथिन किंवा सुनथिन सैह तँ बजथिन । अकाट्य सत्यकेॅं कोनो प्रमाणक आवश्यकता नहिं थिक। हमरालोनिमे आत्मतत्वक व्यवहारिक ज्ञान रहितो, आत्मविश्लेषणक घोर आभाव थिक। प्रपंचक व्यंजनामे दिन-राति एक-दोसराक … घर फूटे गँवार लूटे – मैथिलीक दुर्दशाक जिम्मेदार स्वयं मैथिलीभाषी









