रामचरितमानस मोतीः वनवासी द्वारा भरतजीक मंडली केर सत्कार, कैकेइ केर पश्चाताप
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती वनवासी द्वारा भरतजीक मंडली केर सत्कार, कैकेइ केर पश्चाताप १. भरि पोखरि कमल फुलायल अछि। जलपक्षी सब कूजि रहल अछि। भमरा सब गुंजार कय रहल अछि। रंग-बिरंगक चिड़ैयाँ आ जंगली जानवर सब वैररहित भ’ विहार कय रहल अछि। २. कोल, किरात आर भील आदि वन मे रहयवला लोक … रामचरितमानस मोतीः वनवासी द्वारा भरतजीक मंडली केर सत्कार, कैकेइ केर पश्चाताप


