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प्रवीण नारायण चौधरी

‘हम आबि रहल छी’ – मैथिली उपन्यास पर आधारित धारावाहिक भाग-२

साहित्य – श्री रबीन्द्र नारायण मिश्र लिखित उपन्यास ‘हम आबि रहल छी’ – भाग २ भाग १ एतय पढ़ू कृपया – https://maithilijindabaad.com/?p=20107 हम आबि रहल छी, उपन्यास भाग २ 2 सााँझ पड़ि रहल छल । हम सोफापर घसमोड़ि कए पड़ि गेल रही । भूखसँ छटपट कए रहल छलहुँ । घरमे केओ छल नहि जकरा किछु ‘हम आबि रहल छी’ – मैथिली उपन्यास पर आधारित धारावाहिक भाग-२

दरभंगा मे ३० अप्रैल केँ रोजगार मेला, मिथिलहि मे रोजगार भेटय सेहो प्रयास होयतः दीपक झा

२१ अप्रैल २०२३ । मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिल समन्वय समिति मुम्बई के तत्त्वावधान मे ३० अप्रैल दरभंगाक नागेन्द्र झा स्टेडियम मे रोजगार मेला लगायल जायत । एहि मेला सँ लगभग १० हजार बेरोजगार मैथिल लोक केँ महाराष्ट्रक विभिन्न कम्पनी मे रोजगार उपलब्ध कराओल जेबाक लक्ष्य राखल गेल अछि । मैथिल समन्वय समिति मुम्बई द्वारा प्रत्येक वर्ष दरभंगा मे ३० अप्रैल केँ रोजगार मेला, मिथिलहि मे रोजगार भेटय सेहो प्रयास होयतः दीपक झा

मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल २०२३ मुम्बईः दोसर दिनक सत्रवार चर्चा

१९ अप्रैल २०२३ । मैथिली जिन्दाबाद!! विगत सप्ताह मुम्बई मे सम्पन्न पाँचम मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल २०२३ सफलतापूर्वक सम्पन्न भेल। पहिल दिनक सत्रवार चर्चा काल्हि १८ अप्रैल २०२३ केँ प्रकाशित भेल। आजुक रिपोर्ट मे दोसर दिन आयोजित विभिन्न विमर्शक सत्रवार चर्चा प्रकाशित कयल जा रहल अछि। विदित हो जे ई सम्पूर्ण रिपोर्ट विमर्शी एवं श्रोता लोकनि मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल २०२३ मुम्बईः दोसर दिनक सत्रवार चर्चा

रामचरितमानस मोतीः श्री राम-भरत संवाद

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री राम भरत संवाद श्री रामचन्द्रजी की शपथ (रामचरितमानस मोतीः जनक-वशिष्ठादि संवाद, इन्द्रक चिन्ता आ सरस्वती द्वारा सीख https://maithilijindabaad.com/?p=20098) सुनिकय सभा समेत मुनि आर जनकजी सकुचा गेलाह, स्तम्भित रहि गेलाह। किनको सँ उत्तर दैत नहि बनैत अछि, सब कियो भरतजीक मुंह ताकि रहल छथि। १. भरतजी सभा केँ रामचरितमानस मोतीः श्री राम-भरत संवाद

मैथिली धारावाहिक: हम आबि रहल छी

मैथिली धारावाहिकः हम आबि रहल छी – रबीन्द्र नारायण मिश्र (समाजमे बूढ़क दुखद स्थितिक जीवन्त चित्रण करैत उपन्यास) 1 हमरा जखन होस आएल तँ हम सफदरजंग अस्पतालक शायिकापर पड़ल रही । चारूकातसँ कैकगोटे घेरने रहए । ओहिमे किछु डाक्टर,सिस्टर,अस्पतालक कर्मचारी आ दूटा पुलिस सामिल छल। मोन होअए जे पुछिऐक जे बात की छैक? मुदा बाजले नहि मैथिली धारावाहिक: हम आबि रहल छी

मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल २०२३ः पहिल दिनक सत्रवार चर्चा (संछिप्त रिपोर्ट)

१८ अप्रैल २०२३ । मैथिली जिन्दाबाद!! विगत सप्ताह सम्पन्न भेल पाँचम मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल पर लिखित रिपोर्ट के प्रकाशनाभाव मे मैथिली जिन्दाबाद द्वारा संछिप्त प्रतिवेदन प्रकाशित कयल जा रहल अछि। मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल के सत्र आ प्रस्तोताः एक दृष्टि मे १. मोन पड़ैत छथि प्रत्येक फेस्टिवलक आरम्भ ओहेन स्रष्टा सब केँ मोन पाड़िकय आरम्भ कयल मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल २०२३ः पहिल दिनक सत्रवार चर्चा (संछिप्त रिपोर्ट)

मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल २०२३ मुम्बईः गम्भीर श्रोता-दर्शक केर नजरि सँ

मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल २०२३ मुम्बई विशेष – वन्दना चौधरी #मुंबईलिटरेचरफेस्टिवल2k23 मैथिली भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति, फ़िल्म व समग्र मैथिल पहचान के संरक्षण आ प्रवर्धन हेतु 2014 सँ निरंतर पटना आ दिल्ली में मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल आयोजित भ’ रहल अछि। एहि वर्ष 7 अप्रैल सँ 9 अप्रैल तक भारत के आर्थिक राजधानी मुंबई मे श्री शुभ मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल २०२३ मुम्बईः गम्भीर श्रोता-दर्शक केर नजरि सँ

साहित्य अकादमी मे मैथिलीक नव परामर्शदातृ समिति – समावेशिकता पर जोर

सन्दर्भः साहित्य अकादेमी मे मैथिलीक नव टीम – केदार कानन साहित्य अकादेमी मे मैथिली साहित्यक राज-काज अगिला पांच साल धरि चलाबै लेल साहित्य अकादेमी परामर्श मंडलक गठन भ’ गेल अछि। संयोजक छथि मैथिलीक वरिष्ठ लेखक उदय नारायण सिंह ‘नचिकेता’, जे मात्र मैथिलिये टा नहि, अपितु अनेक देसी आ विदेशी भाषाक जानकार छथि आ अंतरराष्ट्रीय स्तरक विद्वान साहित्य अकादमी मे मैथिलीक नव परामर्शदातृ समिति – समावेशिकता पर जोर

‘राजाजी’क रूपमे सलहेसकेँ सामाजिक मान्यताक आधार

आलेख – डा. रमानन्द झा रमण ‘राजाजी’क रूपमे सलहेसकेँ सामाजिक मान्यताक आधार लोकमहागाथा सलहेसक नायक सलहेसकेँ किछु वर्गक लोक द्वारा ‘राजा जी’ कहि हुनक पूजा-अर्चा होअए लागल अछि। एहि प्रसंग तर्क देल जाइछ जे जेना जेष्ठ पुत्र होएबाक कारणेँ दाशरथी रामक राज्याभिषेक भेलनि आ’ तदुपरान्त अयोध्यावासी हुनका ‘राजा राम’ कहि सम्बोधित करए लागल, ओहिना महिसौथाक ‘राजाजी’क रूपमे सलहेसकेँ सामाजिक मान्यताक आधार

सीताः गीतकार आनन्द मोहन झाक टटका आ सान्दर्भिक काव्य रचना

गीत – आनन्द मोहन झा सीता जनकसुता जगजननी जानकी। अपन व्यथा की कहती जानकी॥ अगिन कहाँ अपकार कयल किछु। कवित अनल सँ जरली जानकी॥ देखा रहलि जिनका ओ दुर्बल। हुनक दशा पर हँसती जानकी॥ उठा रहल आंगुर संतति सब। झुका नयन तेँ चलली जानकी॥ असल विभूति सिया मिथिलाकेँ। करथि क्षमा सब गलती जानकी॥