बस अपन कर्म मे लागल रहू
सार्थक काज के कमी नहि छैक मिथिला मे अपने सब देखैत होयब जे बिना बातक बात मे लोक कतेक फँसबैत छैक। अहाँ चाहबो नहि करब तैयो लोक अहाँक नाम लय-लय कय कतेको रंग के अन्दाज आ कल्पना सब करैत रहत। कियैक? कियैक त आजुक दुनिया मे व्यावसायिकता आ सामाजिकता सँ बहुतो लोक केँ कोनो मतलब … बस अपन कर्म मे लागल रहू








