मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड – पन्द्रहम अध्यायः राम-राज्याभिषेक, देवगन्धर्व आदि द्वारा स्तुति
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण लङ्काकाण्ड – पन्द्रहम अध्याय राम-राज्याभिषेक, देवगन्धर्व आदि द्वारा स्तुति ।चौपाइ। केकयि-तनय विनय-सम्पन्न । किछु नहि मानस छल प्रच्छन्न ॥१॥ भरत कहल शुनु बड़का भाय । अपनैँ नृपति दुखी वन जाय ॥२॥ चौदह बरष छलहुँ वनवास । अयलहुँ अवधि पुराओल आस ॥३॥ जे कृति कयलनि केकयि माय … मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड – पन्द्रहम अध्यायः राम-राज्याभिषेक, देवगन्धर्व आदि द्वारा स्तुति






