रामचरितमानस मोतीः श्री भगवान केर प्राकट्य व बाललीलाक आनन्द
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री भगवान् केर प्राकट्य और बाललीलाक आनन्द १. योग, लग्न, ग्रह, दिन आ तिथि सब अनुकूल भ’ गेल। जड़ आ चेतन सब हर्ष सँ भरि गेल। कियैक त श्रीराम केर जन्म सुखक मूल थिक। पवित्र चैत के महीना छल, नवमी तिथि छल। शुक्ल पक्ष और भगवान के प्रिय … रामचरितमानस मोतीः श्री भगवान केर प्राकट्य व बाललीलाक आनन्द






