माछ सँ प्रेमक एक अनुपम कथा
प्रसंग चर्चा – मिथिलांग आ माछ – प्रवीण नारायण चौधरी शुभे हो शुभे – माछ सँ प्रेम अपन मिथिलाक विधान केँ यदाकदा अपनहि लोक बड़ा कठिनाह, बोरिंग आ अतिपरंपरावादी, पाखंडी आदि कहैत छैक – नामहि राखि देने छैक ‘मिथिलांग’। बेर-कुबेर कहैत भेटा जायत “बेसी मिथिलांग मे नहि पड़ू’। त कि थिकैक ई मिथिलांग? कतहु यात्रा … माछ सँ प्रेमक एक अनुपम कथा









