कियैक तमसायल छथि महेश्वरनाथ – कोना मनायब हिनकाः बिठौली गामक दुर्घटनाक आलोक मे

बात उठैत छैक त दूर तक जाएत छैक

– सन्दर्भः महेश्वरनाथ मन्दिर – बिठौली

कियैक रुष्ट छथि कालहु केर काल महाकाल महादेव ‘महेश्वरनाथ’

बिठौली (शंकर – रोहार) चौक सँ सटले दक्षिण – सड़कक पश्चिम अवस्थित एक प्राचीन आ प्रसिद्ध देवस्थल – महेश्वरनाथ महादेव मन्दिर। किछु समय सँ एतय विभिन्न प्रकारक दैविक प्रकोपक बहुत रास कथा-गाथा सब ग्रामीण लोकनि एक-दोसर सँ कहैत-सुनैत देखल जा रहल छथि। काल्हिये घटित एक भीषण बस दुर्घटनाक बाद एहि गामक एक युवा सामाजिक अभियन्ता संजय मंडल लिखलनि जे आखिर कियैक तमसायल छथि बाबा महेश्वरनाथ। एहि सन्दर्भ मे खोज-अनुसंधान बढेला पर किछु आरो महत्वपूर्ण बात सभ पता चलैत अछि।
 
“बाबा महेश्वर नाथ मंदिरक प्रांगण में प्रत्येक साल रामधुनि होइत छल जे किछु साल सँ नहि भऽ रहल अछि। १९९२ मे अहि ठाम पहिल घटना घटल। हनुमाननगर निवासी एक गोटा ठाकुरजीक मृत्यु एतय भऽ गेल छलन्हि। आसपासक लोक अनुभव केलक जे ओहि ठाकुरजीक आत्मा बहूत दिन धरि ओहिठाम विचरण करय आ किछु न किछु अनहोनी घटना घटि जाएक। किछुए दिन पहिने कहू न करीब ७ मास पूर्ब अहि ठाम एक गामहि केर निवासी संजीव राय केर सेहो दुर्घटना मे मृत्यु भ गेलैन। तेकर बाद सँ एहि ठाम घटना घटबाक संख्या मे अचानक वृद्धि भऽ जेबाक बात ग्रामीण सभक बीच चर्चा मे अछि।” – जानकारी दैत कहलनि एहि गामक प्रखर युवा सामाजिक अभियन्ता राजेश राय।
 
जाहि स्थान पर स्वयं कालहु केर काल महाकाल विराजैत छथि ओतय कोनो भूत-प्रेतक प्रकोप कि भऽ सकत जा धरि स्वयं सर्वभूताधिवासं महाकाल अपनहि कोनो बात लेल रुष्ट नहि छथि। राजेश रायजी केर बात सँ स्पष्ट अछि जे ‘रामधुनि’ केर आयोजन रुकब महादेव केँ पसीन नहि पड़लन्हि। सर्वविदिते अछि जे महादेव केर मानस मन्दिर मे अपन सर्वप्रिय हरि केर सर्वसहज स्वरूप ‘सीताराम-सीताराम’ केर नाम-स्मरण सदिखन होएत रहैत छन्हि। आर फेर एहि मन्दिर मे रामधुनिक परम्परा अति प्राचीन समय सँ रहल छल, ओ बन्द होयब कि देवाधिदेव महादेव केँ कहियो पसीन पड़तन्हि? कदापि नहि। “हाल एहि मन्दिरक पूजारीजी के छथि? एतय पूजाक कि विधान-परंपरा सब अछि? किछु कहि सकब?” – हमर एहि प्रश्नक जबाब मे पुनः राजेश राय जानकारी दैत कहैत छथि, “अहि ठामक वर्तमान मे जे पुजारी छथि, हिनकर पिता सेहो एहि ठामक पूजारी छलखिन। हुनका द्वारा जाहि विधान सँ बाबाक पूजा-पाठ होएत छलन्हि से आजुक समय मे वर्तमान पूजारी सँ नहि भऽ पबैत अछि।” प्रकृति केर बात तँ हम मानव नहि कय सकैत छी, परञ्च मानवीय अनुभव मे भक्ति अनुसारे शक्तिक बात सभ केँ बुझल बात अछि। आइ जँ बाबा महेश्वरनाथ केर पूजा-पाठ मे वैह समर्पण आ पवित्रताक भाव मे कतहु कोनो कमजोरी आयल अछि तऽ ईहो एकटा महत्वपूर्ण कारण भऽ सकैत छैक जे एहि स्थान पर दैविक कृपाक बदला अन्य प्रकोपक असैर अनुभव कयल जा रहल हो।
 
बिठौली एहेन प्रखर गाम, जतय एक सँ बढिकय एक विद्वान् – सज्जन – सम्भ्रान्त परिवारक निवास अछि, आखिर ताहि गाम मे एहि तरहक कमजोरी एतेक पैघ आ पवित्र तीर्थस्थान मे कोना आयल? पता चलैत अछि जे “गामक किछु राजनीति केर कारण अहि बात सभपर ग्रामीण लोकनि ध्यान नै दय रहल छथि।” मन्दिरक रेख-देख के सब करैत छथि?
जेना रामनामा संकीर्तन केर अगुवा के सब रहैत छथि? कियैक बन्द भेल?
बाबा मन्दिरक अपन जमीन आ जथा कि सब छन्हि, पूजारी केँ कि भेटैत छन्हि? साल भरि मे ओतय कोन-कोन अनुष्ठान आ के सब ओहि मे शामिल होएत छथि? – एक साथ प्रश्न सब उपजैत अछि मन मे। जबाब मे पता लगैत अछि जे –
 
“बाबा केर मंदिरक लगभग १ बिघा जमीन छन्हि, पूजारी केँ राज दरभंगा सँ किछु दिन पहिने धरि पारिश्रमिक भेटैत छलन्हि, मुदा आब मंदिरहि केर आमदनी सँ हुनका जीविकोपार्जन देल जाएत छन्हि। प्रत्येक शुक्र दिन एतय हटिया लगैत अछि। प्रत्येक वर्ष महाशिवरात्रि केँ मेला सेहो लगैत अछि। प्रत्येक वर्ष नरक निवारण चतुर्दशीक दिन सेहो बाबाक आंगन मे मेला लगैत अछि। भक्त-श्रद्धालू दूर-दूर सँ बाबाक विशेष पूजा-अर्चना लेल आयल करैत छथि। प्रत्येक वर्ष माघी पूर्णिमा आ कार्तिक पूर्णिमा मे सेहो मेला लगैत अछि। कार्तिक पूर्णिमा मे बाबा महेश्वरनाथ युवा नाट्यकला परिषद केर तरफ सँ सामाजिक नाटक सेहो खेलायल जाएत अछि जाहि नाट्य कला परिषद् केर एक अगुआ हमहूँ छी।”
 
समस्या कतय अछि? एतेक रास व्यवस्थित साधन रहैत व्यवस्थापन पक्ष रामधुनी तक केर आयोजन नहि कय पबैत छथि, ई कोना मानल जाय?
 
“मंदिरक कोर कमिटी मे किछु लोक छथिन जे मनमानी ढंग सँ काज कय रहला अछि।”
 
एहि लेल अहाँ युवा सब कि प्रयास कयलहुँ? कि गामक लोक मे भगवान् आ धार्मिक आस्था सँ जुड़ल बात-व्यवस्था केँ सुचारू करबाक लेल अनुरोध नहि सकैत छी हमरा लोकनि?
 
“पिछला साल हम सब किछु युवा सामाजिक अभियानी लोकनि किछु सम्बन्धित विषय पर कोर कमिटीक सदस्य लोकनि सब सँ जनबाक कोशीश कैलौं, लेकिन हमरा सभकेँ ई कहि चुप करा देल गेल जे अहाँ सब गाम-घर मे नहि रहैत छी, दु-चारि दिल लेल अबैत-जाएत छी। अहाँ सब गामक राजनीति मे नहि फँसू।… समय केर अभाव मे मोन केँ झूठ सांत्वना दैत गाम सँ विदा भऽ गेलौं, मुदा नवंबर मे आइब रहल छी से कहिकय समस्त ग्रामीण लोकनि केँ अनुरोध कयने छियन्हि जे जँ कोनो तरहक व्यवस्थापन मे बड़-बुजुर्ग नहि सम्हारि पबैत छथि तँ गामक जागरुक युवा सभ पर कार्यभार देल जाएक। आ, आब पूर्ववत् हरेक साल रामधुनी हेतैक, ताहि लेल सब युवा मिलिकय संकल्प करबाक विचार कएने छी।”
 
ताकल जाय त राज्य आ राष्ट्रक राजनीति कएनिहार एक सँ एक व्यक्तित्व लोकनि एहि गाम मे मौजूद छथि। लेकिन बाबा महेश्वरनाथ केँ प्रसन्न करबाक लेल एकजुटताक अभाव, निश्चित एहि गाम केर नाम पर कतहु न कतहु कारिख लगा रहल अछि। आशा करैत छी जे एहि लेख केँ सकारात्मक रूप सँ ग्रहण करैत ग्रामवासी निश्चित क्रान्तिकारी डेग बढेता आ जे-किछु कमी-कमजोरी सँ प्रकृति केर कोपभाजनक शिकार एतय लोक बनि रहल अछि, ताहि सँ अवश्य निजात दियौता। अन्तिम मे, ईहो सच छैक जे एतेक पैघ आ प्रसिद्ध देवस्थान केँ जँ गौँआँ सब नहि सम्हारि सकथि त समस्त इलाकावासी पर ई भार जाएत अछि जे एतय सदिखन सुन्दर आ महादेव केँ प्रसन्न करऽवला यज्ञक आयोजन करथि।
 
नमः पार्वती पतये हर हर महादेव!!
 
हरिः हरः!!