फूल दाय आ हुनकर पुतोहु ‘बौआ’
लघुकथा – रूबी झा फूल दाय केर पाँचटा बेटा छलन्हि। चारिटा शहर में आ एकटा गाम में रहैत छलन्हि। बाहर में जे बेटा सब रहैत छलखिन्ह ओ सब कहैत छलखिन्ह, “माँ तों हमरे सब लग रह, गाम पावैने-तिहारे जायल कर। आब तँ बाबूजी सेहो नैह रहलथि, एतेक दिन तों बाबूजी केर बहाना लगा चलि जाइत … फूल दाय आ हुनकर पुतोहु ‘बौआ’









