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प्रवीण नारायण चौधरी

भाषा के भ’ओ नहि बुझनिहार नेताजी केँ भाषिक अधिकार सँ कोन मतलब, बस वोट टा चाही

भाषाक महत्व सब बुझथि (भाषा विमर्श) – प्रवीण नारायण चौधरी * शिक्षा आ संस्कारक काज अनधिकृत लोक नहि कय सकैछ * खाली मैथिली अभियानी टा कियैक हल्ला मचेने अछि सामाजिक संजाल आ नागरिक पत्रकारिता के लोकप्रियता दिनानुदिन बढ़ैत गेला सँ सक्षम-साकांक्ष मैथिलीभाषी मे अपन भाषा प्रति चिन्ता-चिन्तन स्वाभाविक रूप सँ बढ़ल अछि। पूर्वक समय सँ भाषा के भ’ओ नहि बुझनिहार नेताजी केँ भाषिक अधिकार सँ कोन मतलब, बस वोट टा चाही

रामचरितमानस मोतीः प्रयाग पहुँचब, भरद्वाज संवाद, यमुनातीरक निवासी लोकनिक प्रेम

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती प्रयाग पहुँचब, भरद्वाज संवाद, यमुनातीरक निवासी लोकनिक प्रेम १. प्रभु श्री रघुनाथजी गणेशजी और शिवजीक स्मरण कयकेँ गंगाजी केँ मस्तक नमा सखा निषादराज, छोट भाइ लक्ष्मणजी और सीताजी सहित वन लेल चलि पड़लाह। ओहि दिन गाछक नीचाँ निवास भेलनि। लक्ष्मणजी और सखा गुह विश्रामक सब सुव्यवस्था कय देलखिन्ह। रामचरितमानस मोतीः प्रयाग पहुँचब, भरद्वाज संवाद, यमुनातीरक निवासी लोकनिक प्रेम

कतेक जिबैया मैथिली – अहमदाबाद सँ उदित मिथिला-मैथिलीक नव सूर्य

कतेक जिबैया मैथिली शाश्वत मिथिला फाउन्डेशन आ माँ जानकी सेवा समिति अहमदाबाद केर विभिन्न आयोजन मिथिला लेल पश्चिम सँ नव सूर्योदयक विशेष अलंकार दैत पूर्व मे कतिपय सूचना प्रवाह कएने छी। हमर पाठक लोकनि केँ नीक सँ पता छन्हि जे मैथिली के काज करय लेल कथमपि कोनो व्यक्ति केकरो प्रेरित नहि कय पबैत छैक। बल्कि कतेक जिबैया मैथिली – अहमदाबाद सँ उदित मिथिला-मैथिलीक नव सूर्य

मैथिल युवजनक नाम हमर जरूरी पत्र

प्रिय युवजन, जेकरा अपन मौलिकता के कोनो भान नहि, निजता प्रति कोनो सम्मान नहि, ओकरा लेल आली-हौसे छोड़िकय बाकी दोसर कोनो काम नहि। ई महावाक्य याद राखू। नजरि खोलिकय इतिहास देखू। आइ तक भाषा तोड़निहार कोनो दोसर विकल्प केकरो देने हुए, जीवनस्तर मे कोनो सुधार अनने हुए, शिक्षा आ साक्षरता दोसर कोनो भाषा केँ गुलामी मैथिल युवजनक नाम हमर जरूरी पत्र

भाषा तोड़ब – समाज टूटतः विध्वंसक विचारधारा पर रोक आवश्यक

मैथिली केँ खन्डित करनिहार ध्यान देब हमरा सब के भाषा ‘मैथिली भाषा’ के नाम बिगाड़य के लेल किछु लोक जातीय आधार पर बड़ा उद्यत् देखाइत छथि। हमरा मोन पड़ैत अछि ‘संस्कृत भाषा’। संस्कृत भाषा केँ एकल जातीय भाषा, उच्चवर्ग द्वारा बाजल जायवला भाषा कहिकय एहिना समाप्त कयल गेल। लोकक मन-मस्तिष्क मे एहि महत्वपूर्ण भाषा प्रति भाषा तोड़ब – समाज टूटतः विध्वंसक विचारधारा पर रोक आवश्यक

ओ नरमुन्ड आ नेपालक राजनीतिक अवस्था

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी ओ नरमुन्ड आ नेपालक राजनीतिक अवस्था एक अन्वेषक पंडितजी केँ भिक्षाटन लेल नित्य जाय पड़नि यजमानक खोज मे। जैह माँगि आनथि ताहि सँ परिवार चलि पाबैत छलन्हि। मुदा पंडितजी केँ भिक्षाटन सँ बेसी अन्वेषण कार्य मे रुचि लगैत छलन्हि। एहि कारण घर मे अभावक कारण बेसीकाल कलह-विवाद भेल करन्हि। एक ओ नरमुन्ड आ नेपालक राजनीतिक अवस्था

समूह एक गतिविधि अनेकः दहेज मुक्त मिथिलाक साप्ताहिक समीक्षा

सोशल मीडिया गतिविधि – कीर्ति नारायण झा फेसबुक समूह ‘दहेज मुक्त मिथिला’ पर चलि रहल विभिन्न गतिविधिक साप्ताहिक समीक्षा – २४ दिसम्बर २०२२ । ग्रुप के लिंकः https://www.facebook.com/groups/dahejmuktmithila– एहि समूह पर केवल दहेज विरूद्ध संकल्पित लोक टा जुड़ि सकैत छथि। आपस मे वैवाहिक परिचय लेनदेन कय सकैत छथि। एकर उद्देश्य समाज सँ मांगरूपी दहेज केँ समूह एक गतिविधि अनेकः दहेज मुक्त मिथिलाक साप्ताहिक समीक्षा

मैथिली भाषा केँ खंडित करबाक विरोध

अवैध मधेशी भाषासम्बन्धी प्रेस विज्ञप्ति काइल्ह २०७९ पूस ७ गते वृहस्पतिदिन नव निर्वाचित (प्रत्यक्ष – समानुपातिक) प्रतिनिधि सभा सदस्यगणके केन्द्रीय राजधानीक संसद भवनमे शपथ ग्रहण कराओल गेल तथ्यदिस मैथिली साहित्यकार सभाक ध्यानाकर्षण भेल अछि। मातृभाषामे शपथ ग्रहण करबाक प्रावधानअनुसार बहुतो सांसद मातृभाषामे शपथ लेलनि। एहि क्रममे किछुगोटे मातृभाषा मैथिलियोमे सप्पत लेलनि अछि। मौलिक मातृभाषामे सप्पत मैथिली भाषा केँ खंडित करबाक विरोध

रामचरितमानस मोतीः केवटक प्रेम आ गंगा पार उतरबाक रोचक-प्रेरक प्रसंग

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती केवटक प्रेम आर गंगा पार जायब १. जिनक वियोग मे पशु एहि तरहें व्याकुल अछि, हुनक वियोग मे प्रजा, माता आर पिता केना जियैत रहता? श्री रामचन्द्रजी जबर्दस्ती सुमंत्र केँ लौटेलनि आ तदोपरान्त ओ गंगाजीक तीर पर अयलाह। ओतय ओ केवट सँ नाव मंगबौलनि, मुदा ओ नाव लय रामचरितमानस मोतीः केवटक प्रेम आ गंगा पार उतरबाक रोचक-प्रेरक प्रसंग

मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश – मैथिली अखबार पूरा कयलक १ वर्षक यात्रा

विशेष सम्पादकीय मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश केर १ वर्ष अत्यन्त दुर्लभ आ लगभग असम्भव काज केँ सम्भव कयल गेल अछि ‘मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश’ केर प्रकाशन प्रारम्भ सँ। प्रारम्भहि टा नहि अपितु निरन्तरता दैत १ वर्षक कार्यकाल पूरा करब सेहो लगभग असम्भवे मानल जाइत छल मैथिली लेल। कारण मैथिलीभाषी लेल वर्तमान दुर्दिनता स्पष्टे अछि। विरले केकरो अपन मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश – मैथिली अखबार पूरा कयलक १ वर्षक यात्रा