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प्रवीण नारायण चौधरी

प्रदेश १ सरकार केर सामाजिक विकास मंत्रालय द्वारा भाषा-साहित्य-कला-संस्कृति क्षेत्र मे प्रोत्साहन आ सम्मान लेल सूचना

सूचनाः   प्रदेश १ सरकार – युवा तथा खेलकुद महाशाखा, सामाजिक विकास मंत्रालय, विराटनगर के सूचना पर सभक ध्यानाकर्षण हो   हमर अनुरोधः मैथिलीभाषी सृजनकर्मी लोकनि आ जे विशिष्ट योगदान एहि क्षेत्र मे दय रहल छी तिनका सब सँ सम्बोधित अछिः साहित्य मे, संगीत मे, चित्रकला मे, रंगकर्म मे, लोकनृत्य वा लोकगीत मे, फिल्म मे प्रदेश १ सरकार केर सामाजिक विकास मंत्रालय द्वारा भाषा-साहित्य-कला-संस्कृति क्षेत्र मे प्रोत्साहन आ सम्मान लेल सूचना

‘दहेज मुक्त मिथिला’ पर होयत “अंग्रेजी झाड़बाक कम्पीटिशन”

२८ जून २०२१ – मैथिली जिन्दाबाद!! *के कतेक सुन्दर, शुद्ध आ फर्राटेदार अंग्रेजी बजैत अछि एकर प्रतिस्पर्धा होयत *समय-समय पर एहि समूह पर होइत रहल अछि एहि तरहक प्रतियोगिता *एहि तरहक प्रतियोगिता व्यंग्यात्मक शैली मे लेकिन नीक सन्देशक संचरण लेल कयल जाइछ, तेँ नाम राखल जाइछ ‘झाड़नाय’ सँ जोड़िकय *एहि सँ पहिने ‘हिन्दी झाड़बाक’ प्रतियोगिता ‘दहेज मुक्त मिथिला’ पर होयत “अंग्रेजी झाड़बाक कम्पीटिशन”

आब कि हेतय नेपाल मे

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी आब कि हेतय नेपाल मे   (हमर समीक्षाः नेपाल, न्याय आ राजनीति के परिप्रेक्ष्य आ नव सर्वोत्कृष्ट संविधान के तत्काल असरि, जनताक दुर्गति मादे)   एखन नेपाल के न्याय व्यवस्था बहुत बेसी चर्चा मे अछि। तहिना कोरोना सन भयावह महामारी के समय राजनीतिक उथल-पुथल सेहो अत्यधिक चर्चा मे अछि। नेपाल आब कि हेतय नेपाल मे

शाश्वत संविधान आ मानवीय संविधान

विशेष सम्पादकीय परिप्रेक्ष्य वर्तमान राजनीति आ राजनीतिक परिवर्तन – सन्दर्भ दलित राजनीति   आइ-काल्हि राजनीति के देल एक विशेष शब्द ‘दलित’ ब्रिटिशकालीन भारत (१९म शताब्दी) सँ आरम्भ भऽ प्रसिद्ध चिन्तक आ भारतीय संविधान केर जनक डा. भीमराव अम्बेदकर पर्यन्त द्वारा समय-समय पर (अपन भाषण मे मात्र) प्रयुक्त होइत २१म शताब्दी मे आबि सत्तारोहणक नीक हथियारक शाश्वत संविधान आ मानवीय संविधान

एन्टा द्वारा कविश्रेष्ठ दयानन्द दिक्पाल यदुवंशी केँ श्रद्धाञ्जलि सभा

२० जून २०२१, मैथिली जिन्दाबाद!! काल्हि १९ जून २०२१ शनि दिन एसोसिएशन अफ तराइयन्स इन अमेरिका (एन्टा) द्वारा मैथिली भाषाक जानल-मानल कविश्रेष्ठ दयानन्द दिक्पाल यदुवंशी लेल श्रद्धाञ्जलि सभाक आयोजन कयल गेल छल। ई आयोजन जूम मीटिंग मार्फत फेसबुक लाइव द्वारा कयल गेल। एन्टा अध्यक्ष डा. इन्द्रदेव साहुक अध्यक्षता मे आयोजित एहि कार्यक्रमक संचालन एन्टा स्पोक्सपर्सन एन्टा द्वारा कविश्रेष्ठ दयानन्द दिक्पाल यदुवंशी केँ श्रद्धाञ्जलि सभा

वैकल्पिक विषय केर रूप मे मैथिली लेल बिपीएससी ६४म के परिणाम उत्साहवर्धक अछि

बिहार लोक सेवा आयोग के परीक्षा आ मैथिली – भास्कर ज्योति (बिपीएससी ६३ मे ३८म रैंक प्राप्त कय हाल बिहार सरकार मे प्रशासनिक पदाधिकारी छथि) बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा 64वीं BPSC केर परिणाम हालहि घोषित कयल गेल जाहिमे मैथिली भाषा एवं साहित्य सँ लगभग 100 अभ्यर्थीक चयन विभिन्न पद पर भेल अछि। एहि बेरुक वैकल्पिक विषय केर रूप मे मैथिली लेल बिपीएससी ६४म के परिणाम उत्साहवर्धक अछि

चोरौका विवाह – अत्यन्त मर्मस्पर्शी मैथिली कथा

कथा-साहित्य – अंजू झा चोरौका विवाह हम जे शीर्षक देलहुँ हँ अइ सऽ भऽ सकैया बहुत नवतुरिया अनभिज्ञ हैब, लेकिन हमरा जनैत जे 40+ के छी वो सब कमोबेस अइ शब्द सं परिचित जरूर हैब। कियैक तऽ 30/40 वर्ष पहिले ई अपन समाज में होइत छलैक, हमहूँ कैकटा एहन विवाह देखने वा सुनने छी। अइ चोरौका विवाह – अत्यन्त मर्मस्पर्शी मैथिली कथा

अमर साहित्यकार राजकमल चौधरी के पुण्यतिथि पर पुत्र नीलमाधव चौधरी द्वारा श्रद्धाञ्जलि संस्मरण

श्रद्धाञ्जलि संस्मरण – नीलमाधव चौधरी कोटिशः नमन । आज आपकी पुण्य तिथि है । वैसे तो मुझे पाप-पुण्य, जीवन-मरण जैसे शब्दो से ही चिढ है, फिर यह पुण्य दिवस क्यों ? क्या सुन्दर होता जो इसे मुक्ति दिवस कहा जाता । इस मृत्यु लोक से मुक्ति आसान नहीं और ना ही इसके नियम, कानून, कायदे अमर साहित्यकार राजकमल चौधरी के पुण्यतिथि पर पुत्र नीलमाधव चौधरी द्वारा श्रद्धाञ्जलि संस्मरण

हमर जिज्ञासा आ अहाँक सम्बोधन

मैथिली केर सेवा पर अपन विचार – प्रवीण नारायण चौधरी ई बहुत प्रेरित कय रहल अछि जे अपने सब गोटे एतेक बढि-चढिकय हमर जिज्ञासा केँ सम्बोधन कयलहुँ। प्रसंगवश ई जिज्ञासा रखने रही जे आखिर लोकक पसन्द की? लेख मार्फत अनेकों बात पाठकक हृदय व मर्म केँ स्पर्श करैत छैक। लेखहि वास्तव मे लेखकक छवि बनबैत हमर जिज्ञासा आ अहाँक सम्बोधन

मानव जीवन मे तिल केर महत्व – अत्यन्त पठनीय आ मननीय आलेख

स्वाध्याय लेख – प्रवीण नारायण चौधरी (गीताप्रेस सँ प्रकाशित कल्याण विशेषांक – दान महिमा अङ्क सँ संकलित-अनुवादित) तिलदान तिल ब्रह्माजी द्वारा उत्पन्न अछि। ई पितर लोकनिक सर्वश्रेष्ठ खाद्यपदार्थ थिक, ताहि लेल तिलदान कयला सँ पितर लोकनि केँ बड़ पैघ प्रसन्नता भेटैत छन्हि – पितृृणां परमं भोज्यं तिलाः सृष्टाः स्वयम्भुवा। तिलदानेन वै तस्मात् पितृपक्षः प्रमोदते॥   मानव जीवन मे तिल केर महत्व – अत्यन्त पठनीय आ मननीय आलेख