अति महात्वाकांक्षी बनब त विनाशकारी असफलता भोगहे टा पड़त
महात्वाकांक्षा कतय तक सही? बहुत पहिनहि एकटा किताब कोनो पश्चिमी लेखकक लिखल पढ़ने रही जाहि मे ‘अति महात्वाकांक्षी’ हुअय सँ बचबाक सन्देश छल। एखन सेहो एकटा नीक लेख सोझाँ अभरल – मैनेजिंग योरसेल्फ (स्वयं केर व्यवस्थापन) अन्तर्गत ‘कतेक महात्वाकांक्षी हेबाक चाही’ शीर्षक मे ई कथ्य पर ध्यान गेल। In excess, ambition damages reputations, … अति महात्वाकांक्षी बनब त विनाशकारी असफलता भोगहे टा पड़त








