मिथ्याचार सँ जीवन मे शान्ति आ सुख कहियो नहि भेट सकैत अछिः आध्यात्मिक सीख
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कनी टा ध्यान देबय! वन्दे वन्दनतुष्टमानसमतिप्रेमप्रियं प्रेमदं पूर्णं पूर्णकरं प्रपूर्णनिखिलैश्वर्यैकवासं शिवम्। सत्यं सत्यमयं त्रिसत्यविभवं सत्यप्रियं सत्यदं विष्णुब्रह्मनुतं स्वकीयकृपयोपात्ताकृतिं शङ्करम्॥ वन्दना केला सँ जिनकर मोन प्रसन्न होएत छन्हि, जे प्रेम टा केँ अत्यन्त प्रिय मानैत छथि, जे प्रेम प्रदान करैत छथि, पूर्ण आनन्दमय, भक्त लोकनिक अभिलाषा पूर्ण करैत छथि, … मिथ्याचार सँ जीवन मे शान्ति आ सुख कहियो नहि भेट सकैत अछिः आध्यात्मिक सीख









