अहीं द्वारे हम लिखय छी – से बुझियौ
कविता – उदयचन्द्र झा ‘विनोद’ अही्ं दुआरे हम लीखैछी से बुझियौ अहाँ न जीलहुँ तैँ जीबै छी से बुझियौ अहाँ संग भोरे उठि सातु पिबैत रही अहाँ न छी तैयो पीबै छी से बुझियौ हमर चालि मे जतय जतय आपत्ति रहय से सब आब न हम करै छी से बुझियौ शयन कक्ष मे जूता चप्पल … अहीं द्वारे हम लिखय छी – से बुझियौ









