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प्रवीण नारायण चौधरी

नेपाल मे मगही के जनम आ विकास ऊपर दुइ टप्पी

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी सब कोइ पढय, सब कोइ बढय   हमर एक मित्र-भाइ संतोष कुमार साह (रौतहट) आइ अपन एक संवाद से ध्यानाकर्षण कयलाह। ओ लिखने रहथि निम्न पोस्ट केर बारे मे जे ई एक नौटंकी थिक – सन्दर्भ पोस्ट जहिनाक तहिना लिखि रहल छीः   “नाम :- दिपेन्द्र कुमार कापरी ठेगाना :- नेपाल मे मगही के जनम आ विकास ऊपर दुइ टप्पी

मैथिली भाषा केँ सहज बनेबाक विमर्श – कारण आ उपाय

कतेक सहज छैक कोनो भाषाक क्लीष्टता केँ दूर करब – प्रवीण नारायण चौधरी, संपादक, मैथिली जिन्दाबाद   संसार मे एहेन कतेको भाषा भेलैक जेकर क्लीष्टताक कारण जनसामान्य ओकर शुद्ध आ प्रचलित मानक पर आधारित लिखित वा मौखिक स्वरूप केँ नहि अपना सकल अछि। लेकिन कोनो भाषा केँ नहि अपनेबाक कारण केवल क्लीष्टता केँ नहि देल मैथिली भाषा केँ सहज बनेबाक विमर्श – कारण आ उपाय

मैथिली लेल नवारम्भ प्रकाशनक अभूतपूर्व क्रान्ति – आब पोथी सदेह के बदला विदेह रूप मे सेहो कीनि सकैत छी

२४ अगस्त २०२० । मैथिली जिन्दाबाद!! आब मैथिलीक पोथी आनलाइन कीनि आ पढि सकैत छी – नवारम्भ प्रकाशनक नया उपाय   मैथिली भाषा-साहित्य केँ नव प्राणदान देबाक काज नवारम्भ प्रकाशन मधुबनी कय रहल अछि। काल्हि कुमार पद्मनाभ केर रचित उपन्यास ‘पपुआ ढपुआ सनपटुआ’ पर आयोजित एक वेबिनार समीक्षा मे लाखों दर्शकक यैह प्रतिक्रिया छल। गुन्जन मैथिली लेल नवारम्भ प्रकाशनक अभूतपूर्व क्रान्ति – आब पोथी सदेह के बदला विदेह रूप मे सेहो कीनि सकैत छी

मधुबनी जिला विशेष – सर्वाधिक दहेज मुक्त मिथिला एहि जिला मे

कि मधुबनी जिला सर्वाधिक ‘दहेज मुक्त मिथिला’ अछि? (सर्वे और बहस) काल्हि ‘दहेज मुक्त मिथिला सर्वे-२०२०’ केर पहिल तथ्यांक जारी कयल, जाहि मे दहेज प्रथाक विरूद्ध सब सँ अधिक जागरुकता ‘मधुबनी’ जिलाक लोक मे देखल गेल कहि सकैत छी। तथ्यांक सँ स्पष्ट अछि जे सब सँ अधिक लोक मधुबनी सँ सक्रियता देखौलनि। ईहो स्पष्ट अछि मधुबनी जिला विशेष – सर्वाधिक दहेज मुक्त मिथिला एहि जिला मे

आइ मिथिला कतय धरि जिबैत अछि – दहेज मुक्त मिथिला सर्वे २०२०

२३ अगस्त २०२० । मैथिली जिन्दाबाद!! काल्हि २२ अगस्त २०२० दहेज मुक्त मिथिला फेसबुक समूह पर एकटा सर्वेक्षण कयल गेल। एहि सर्वेक्षण मे मिथिलाक गाम आ जिलाक लोकक बीच एकटा समन्वय स्थापित करबाक मुख्य अभिप्राय अछि। ओना आजुक समय मे मिथिला सांस्कृतिक-भाषिक तौर पर दुइ देशक सीमा मे पंजाब, बंगाल आ तमिल जेकाँ विभाजित अछि। आइ मिथिला कतय धरि जिबैत अछि – दहेज मुक्त मिथिला सर्वे २०२०

चौरचन मिथिलाक महत्वपूर्ण लोकपर्व थिकः डा. महेन्द्र नारायण राम

२३ अगस्त २०२०। मैथिली जिन्दाबाद!! चौरचन २०२० बीतल। भाद्र शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि केँ आर कतहु चन्द्रमाक दर्शन वर्ज्य अछि, लेकिन मिथिला मे ई अदौकाल सँ चानक विशेष दर्शन लेल जानल जाइत अछि। एकरे चौरचन कहल गेल छैक। एकरा लोकपाबनि सेहो कहल गेल छैक। एहि सन्दर्भ मे लोकसाहित्यक विशिष्ट मर्मज्ञ-साहित्यकार डा. महेन्द्र नारायण राम सँ चौरचन मिथिलाक महत्वपूर्ण लोकपर्व थिकः डा. महेन्द्र नारायण राम

चौरचन केर साहित्यिक प्रसाद

२३ अगस्त २०२० । मैथिली जिन्दाबाद!! काल्हि मिथिलाक लोक-पाबनि चौरचन सम्पन्न भेल। एहि अवसर पर सामाजिक संजाल केर विभिन्न स्रोत सँ संकलित चौरचन विशेष साहित्यिक प्रसाद एतय राखि रहल छी। लेखकक नाम जाहि मे नहि पता चलि सकल अछि, ताहि लेल नहि लिखि रहल छी। बाकी जे कियो असल लेखक होइथ, हुनका नमन करैत हुनका चौरचन केर साहित्यिक प्रसाद

चौरचन पाबनिक संछिप्त पूजन विधान (वैकल्पिक)

संकलनः साभार डी एन झा जी केर फेसबुक पोस्ट सँ चौठचन्द्र पूजनोत्सव के सभगोटे के मंगलमय हार्दिक शुभकामना… । पूजा के संक्षिप्त विधि ।। चतुर्थी चन्द्र पुजनः-।। स्नानोपरान्त आशन पर वैसक स्वस्ति वाचनोपरान्त गंगाजल जल मे राखि जल लकः- ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा । यः स्मरेत पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः ।। पुण्डरीकाक्षः चौरचन पाबनिक संछिप्त पूजन विधान (वैकल्पिक)

चौरचन पाबनिक वैदिक पूजा विधान

मिथिला कर्मकांड – लोकपाबनि चौरचनक वैदिक पूजा विधान – डा. सुधानन्द झा (ज्योतिषीजी), ग्रामः राढ़ी, जिलाः दरभंगा केर हस्तलेख पर आधारित (संकलन – श्री शंकर सिंह ठाकुर, सचिव, अप्पन ब्राह्मण समाज, विराटनगर, नेपाल) पुनर्लेखनः प्रवीण नारायण चौधरी  चौरचन लोकपाबनि थिकैक। एहि मे मंत्रक प्रधानता सँ बेसी भावक प्रधानता छैक। मिथिलाक विशिष्ट पाबनि थिकैक चौरचन, जतय चौरचन पाबनिक वैदिक पूजा विधान

भारती झा केर दुइ गोट रचना – दहेज प्रथा आ कतय गेल मिथिलाक दलान

कविता – भारती झा दहेज प्रथा बिका गेल माय बापक घर तेँ बेटी के घर बसल, केहन अभागल प्रथा अछि ई, दहेजप्रथा जे कतेको घर केँ निगलि चुकल।   यदि बेटी किछु नै कय पायल तेँ बेटा घर बचा लितय जखन ओकर बोली लगैत रहै तखन अपन शिक्षा के महत्व देखा दितय।   ख़ालिये हाथ भारती झा केर दुइ गोट रचना – दहेज प्रथा आ कतय गेल मिथिलाक दलान