हँसी कि कानी – आध्यात्मिक चिन्तन आ जीवन दर्शन
विचार – प्रवीण नारायण चौधरी हँसी कि कानी….! किछु दिन सँ दिमाग मे एहेन-एहेन बात आबि रहल अछि जे खने हँसबैत अछि, खने दुःखी कय दैत अछि। अपन मनोभाव इजहार कय शायद कने हल्लुक हुए। बात एहेन छैक जे हम मिथिलावासी मे डीएनए अछि ‘जनक’ केर, जिनका विदेह सेहो कहल जाइत छन्हि… विदेह एहि लेल … हँसी कि कानी – आध्यात्मिक चिन्तन आ जीवन दर्शन









