वेदक उपांग धर्मशास्त्र – स्मृति सब किनको स्वतंत्र इच्छा-प्रसन्नताक उपज नहि अपितु वेदक निर्देशन
स्मृति सब स्वतंत्र इच्छाक उपज नहि थिक एतय तक कि जे लोक स्मृति, अर्थात् धर्मशास्त्र, केर सम्मान करैत छथि, एहि बारे मे हुनको सब मे एकटा भ्रान्ति छन्हि । अर्थात्, ओ सब सोचैत छथि जे स्मृति सभक रचयिता लोकनि स्वतंत्र रूप सँ आर अपन इच्छा सँ एहि सिद्धान्त सभक प्रतिपादन कयलनि अछि । स्मृति सभक … वेदक उपांग धर्मशास्त्र – स्मृति सब किनको स्वतंत्र इच्छा-प्रसन्नताक उपज नहि अपितु वेदक निर्देशन




