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प्रवीण नारायण चौधरी

मिथिलावाद मे महिला सहभागिता कतेक?

मिथिलावाद मे महिला सहभागिता कतेक?   विगत १० वर्ष सँ मिथिला-मैथिली केँ खूब नीक सँ मनन करैत यथासम्भव विभिन्न विषयक कार्यक्रम सभक आयोजन करैत हमरा मिथिलावाद मे महिला शक्तिक सहभागिता मे क्रमिक सुधार त नजरि पड़ल अछि, मुदा ई आन समुदायक तुलना मे बहुत कम आ नगण्य अछि सेहो कहि सकैत छी। तेकर कतिपय कारण मिथिलावाद मे महिला सहभागिता कतेक?

रामचरिमानस मोतीः मन्दोदरी-रावण संवाद

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती मन्दोदरी-रावण संवाद १. एम्हर लंका मे जहिया सँ हनुमान्‌जी लंका जराकय गेलाह, तहिया सँ राक्षस सब भयभीत रहय लागल। अपन-अपन घर मे सब विचार करैत छल जे आब राक्षस कुल केर रक्षाक कोनो उपाय नहि अछि। जिनकर दूतक बल केर वर्णन नहि कयल जा सकैत अछि, ओ स्वयं रामचरिमानस मोतीः मन्दोदरी-रावण संवाद

मिथिला राज्यक मांग पर संयुक्त सांगठनिक महाबैसार सम्पन्न

दरभंगा, 10 अगस्त 2023 । मैथिली जिन्दाबाद!! मिथिला राज्यक मांग पर संयुक्त सांगठनिक महाबैसार सम्पन्न अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समितिक राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. बैद्यनाथ चौधरी बैजूक अध्यक्षता मे काल्हि ९ अगस्त क्रान्ति दिवस पर दरभंगाक एमएलएसएम कालेज सभागार मे महाबैसार के आयोजन कयल गेल। मिथिला राज्य के समर्थक संस्था सभक प्रतिनिधि लोकनि एवं कतेको मिथिला राज्यक मांग पर संयुक्त सांगठनिक महाबैसार सम्पन्न

मिथिलावादीक गठबन्धन कियैक जरूरी

गठबन्धन कियैक जरूरीः १. हम सब अपन मातृभूमि मिथिला लेल समर्पित रहितो अलग-अलग हेबाक कारण शक्ति, संसाधन, सोच, समय आ सम्पत्ति सब किछु नुकसान कय बैसैत छी, उपलब्धि किछु खास नहि भ’ पबैत अछि। २. एकटा सम्मानित सभ्यता (मिथिला) के हिस्सा रहितो आइ अवहेलित पहिचान आ दमन-शोषण के शिकार बनेने अछि विभिन्न राजनीतिक धारा-उपधारा आ मिथिलावादीक गठबन्धन कियैक जरूरी

रामचरितमानस मोतीः श्री रामजीक बानर सेनाक संग समुद्र तट पर पहुँचब

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री रामजीक बानर सेनाक संग समुद्र तट पर पहुँचब १. बानरराज सुग्रीव शीघ्रहि बानर सब केँ बजौलनि। सेनापति लोकनिक समूह आबि गेल। बानर-भालुक झुंड अनेक रंगक अछि आ ओकरा सब मे अतुलनीय बल छैक। ओ सब प्रभुक चरणकमल मे सिर नमबैत अछि। महान्‌ बलवान्‌ रीछ आ बानर गरजि रामचरितमानस मोतीः श्री रामजीक बानर सेनाक संग समुद्र तट पर पहुँचब

कनी मथियौ न मैथिल प्रवीण कहइ य’

कनि मथू हे मैथिल   ई छियैक भारत के मिथिला के नक्शा। नेपाल मे सेहो एहिना ११ गोट जिलाक एकटा नक्शा एकर सटले लगैत छैक। चूँकि एहि तीन नदी सँ घेरल क्षेत्र केँ तिरहुत (तीरभुक्ति) सेहो कहल जाइत छैक, ई धरती बड पैघ तपस्या सँ बसोवास योग्य बनि सकलैक आ एतय यज्ञक अग्नि सँ भूमि कनी मथियौ न मैथिल प्रवीण कहइ य’

रामचरितमानस मोतीः श्री हनुमान्‌जीक लंका सँ वापसी आ तदोपरान्त (परमानन्दक दर्शन)

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती समुद्रक एहि पार आयब, सभक लौटब, मधुवन प्रवेश, सुग्रीव मिलन, श्री राम-हनुमान्‌ संवाद १. सीताजी सँ चूड़ामणि निशानी लैत हनुमान्‌जी वापस समुद्रक ओहि पार जतय संगी सब केँ छोड़ि आयल रहथि ताहि ठाम लेल चलि पड़लाह। चलैत समय ओ महाध्वनि सँ गर्जना कयलनि जे सुनि राक्षस सभक स्त्री रामचरितमानस मोतीः श्री हनुमान्‌जीक लंका सँ वापसी आ तदोपरान्त (परमानन्दक दर्शन)

रुद्राष्टकम् – शिव केर विशेष आराधना

स्तुति-पूजापाठ तुलसीकृत् रामायण मे प्रस्तुत रुद्राष्टकम् केर महिमा रुद्राष्टकम् रुद्राष्टकम् भगवान शिव केर अभिव्यक्ति केँ समर्पित एक अष्टकम यानि अष्टक (आठ छंद वाली प्रार्थना) थिक। एहि महान मंत्र केर रचना स्वामी तुलसीदास द्वारा 15म् शताब्दी मे कयल गेल छल। रुद्र केँ भगवान शिवक भयावह अभिव्यक्ति के रूप मे पूजल जाइत अछि, जिनका सँ हमेशा भयभीत रुद्राष्टकम् – शिव केर विशेष आराधना

रामचरितमानस मोतीः लंका जरेलाक बाद हनुमान्‌जी द्वारा सीताजी सँ विदाइ माँगब आर चूड़ामणि पायब

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती लंका जरेलाक बाद हनुमान्‌जी द्वारा सीताजी सँ विदाइ माँगब आर चूड़ामणि पायब १. पूँछ मिझा, थकावट दूर कयकेँ आर फेर छोट सन रूप धारण कय हनुमान्‌जी श्री जानकीजीक सोझाँ हाथ जोड़िकय ठाढ़ भ’ गेलथि। हनुमान्‌जी कहलखिन – हे माता! हमरा कोनो चिह्न (पहिचान) दिअ, जेना श्री रघुनाथजी हमरा रामचरितमानस मोतीः लंका जरेलाक बाद हनुमान्‌जी द्वारा सीताजी सँ विदाइ माँगब आर चूड़ामणि पायब

समकालीन मैथिली लेखक कोश पोथी पर मित्रेश्वर अग्निमित्रक उद्गार

पोथी परिचय – डा. मित्रेश्वर अग्निमित्र प्रसंग: मैथिली साहित्य संसारक एक टटका वैभव बड्ड जरूरी, बहुत उपयोगी, खूब प्रशंसनीय एक पुस्तक प्रकाशित भेल अछि – ‘समकालीन मैथिली लेखक कोश’ ! हमर सौभाग्य जे ओ बहु-प्रतीक्षित पुस्तक हमर हाथ में अछि, हम पढ़ि रहल छी. मैथिली साहित्य जगतक विशालताक झलक एहि ऐतिहासिक पुस्तक में सहजहि भेटैछ. समकालीन मैथिली लेखक कोश पोथी पर मित्रेश्वर अग्निमित्रक उद्गार