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प्रवीण नारायण चौधरी

मिथिलाभाषा रामायणः अयोध्याकाण्ड छठम् अध्याय – गंगा पार करब

स्वाध्याय पाठ कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण अयोध्याकाण्ड – छठम् अध्याय गंगा पार करब  ।चौपाइ। ।मिथिलासंगीतानुसारेण नामान्तरेण च योगिया-मालव-छन्दः। लक्ष्मण सौँ गुह कहल निषाद । राम-दशा देखि चित्त विषाद ॥१॥ देखिअ रामचन्द्र गति भाय । सुख-सुषुप्त कुश घास ओछाय ॥२॥ मणिपर्य्यङ्क भवन रमणीय । जेहन इन्द्र-सुखकर कमनीय ॥३॥ शुदिनि मन्थरा की अधलाहि । तकरे कहलेँ रानि मिथिलाभाषा रामायणः अयोध्याकाण्ड छठम् अध्याय – गंगा पार करब

मिथिलानी कनियाँ (काव्य)

काव्य – काजल चौधरी, योग प्रशिक्षिका, नई दिल्ली मिथिलानी कनियाँ (कनियाँ = पुतोहु, daughter-in-law) हम छी मिथिलानी कनियाँ घूँघट लैपटौप संग रखय छी! फायल मे माथा ओझराबी क्लाइंट्स सभक दुःख केँ मेटाबी घर आबि जखनहि पड़य छी सासु ननदि के बोल सुनै छी! हम छी मिथिला के नारी करौछ आ मोबाइल दुनू रखय छी हम मिथिलानी कनियाँ (काव्य)

मिथिलाभाषा रामायण – अयोध्याकाण्डः पाँचम अध्याय – श्री राम, सीता ओ लक्ष्मणजीक वन लेल प्रस्थान

स्वाध्याय पाठ कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण  अयोध्याकाण्ड – पाँचम अध्याय वन के लेल राम, लक्ष्मण आ सीताक प्रस्थान ।चौपाइ। ।राग-तरङ्गिणी-ग्रन्थानुसारेण मंगलराज-विजय छन्दः। केकयि कयल कुठाठ कठोर । गुपचुप रहल न भय गेल सोर ॥१॥ केकयि-कृत शुनि शुनि उतपात । कह पुरजन बड़ कयलक घात ॥२॥ देति राम काँ विपिन पठाय । देखल न एहन कसाइनि मिथिलाभाषा रामायण – अयोध्याकाण्डः पाँचम अध्याय – श्री राम, सीता ओ लक्ष्मणजीक वन लेल प्रस्थान

सामाजिक संजाल आ हमर मिथिला

सामाजिक संजाल आ हमर मिथिला ‘संजाल कि जंजाल?’ – विषय पर गम्भीर विमर्श कयल गेल छल हालहि आयोजित जनकपुर साहित्य कला आ नाट्य महोत्सव मे। संजाल सँ सार्थकता-सकारात्मकताक भान होइत छैक, जंजाल सँ निरर्थकता या नकारात्मकताक। २००७ सँ संजालक सक्रिय उपयोग करैत हमर अनुभव संजालहि केर रहल, जंजाल किन्नहुं नहि बुझायल। अति सर्वत्र वर्जयेत – सामाजिक संजाल आ हमर मिथिला

महिला दिवस प्रसंग किछु जरूरी बात

महिला दिवस प्रसंगे किछु जरूरी बात   काल्हि ‘८ मार्च’ महिला दिवस छल। अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस – International Women’s Day! १९०८ ई. मे आजुक दिन अमेरिकन महिला सब आन्दोलन आरम्भ कयलीह – महिला लेल काज करबाक अवधि कम करबाक लेल, काजक बदला वेतन भुगतानी मे बढ़ोत्तरी करबाक लेल आ संगहि वोट खसेबाक अधिकार प्राप्त करबाक महिला दिवस प्रसंग किछु जरूरी बात

मिथिलाभाषा रामायण – अयोध्याकाण्ड चारिम अध्याय – लक्ष्मण आ सीताक वन जेबाक आग्रह

कवि चन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण अयोध्याकाण्ड – चारिम अध्याय लक्ष्मण आ सीताक वन जेबाक आग्रह ।चौपाइ। ।मिथिलासंगीतानुसारेण मिथिला गौड़-मालवं छन्दः। जैँ कौशल्या जानथि शञ्च । तेहन सुमित्रा कयल प्रपञ्च ॥१॥ रामक छवि देखल भरि नयन । नील-कमल-निन्दक छवि अयन ॥२॥ लेल अङ्क भरि लगइत गोड़ । सुत-मुख देखि हर्ष नहि थोड़ ॥३॥ कौशल्या उठि कहलनि मिथिलाभाषा रामायण – अयोध्याकाण्ड चारिम अध्याय – लक्ष्मण आ सीताक वन जेबाक आग्रह

धनुषाक प्रसिद्ध हास्यकवि – गंगुलीवासी नरेश ठाकुर

व्यक्तित्व परिचय – नित्यानन्द मंडल (साभारः फेसबुक पोस्ट) फगुआक दिन बाँकी चारि, आबए कहलनि छोटकी सारि… ई होरिआएल काव्यपंक्ति छनि पब्लिक पोएट नरेश ठाकुर जीक । बुझबामे आबिए गेल होएत जे फगुआ लगचिया गेलै । तैं हिनका मादे किछु कहब, अप्रासांगिक नहि हएबाक चाही, हमरा जनैत । साहए तऽ कहियो रोमान्टिसिज्मक एकटा पात्र जेकाँ, कहियो धनुषाक प्रसिद्ध हास्यकवि – गंगुलीवासी नरेश ठाकुर

विराटनगर मे बहुभाषिक कवि सम्मेलन – विराट मैथिल नाट्यकला परिषद् व मैथिली साहित्य अभियानक प्रयास

विराटनगर, ३ मार्च २०२३ । मैथिली जिन्दाबाद!! काल्हिक कवि सम्मेलन विराटनगर मे काल्हि विराट मैथिल नाट्यकला परिषद् व मैथिली साहित्य अभियानक संयुक्त तत्त्वावधान मे बहुभाषिक कवि सम्मेलनक आयोजन कयल गेल। श्री डोमी कामत केर अध्यक्षता तथा श्री कर्ण संजय केर संचालन मे दर्जनाधिक कवि लोकनि अपन कविताक वाचन कयलनि। प्रमुख अतिथिक रूप मे डा. एस. विराटनगर मे बहुभाषिक कवि सम्मेलन – विराट मैथिल नाट्यकला परिषद् व मैथिली साहित्य अभियानक प्रयास

वाजसनेयिनां विवाहपद्धतिः – मैथिल ब्राह्मण व अन्य समुदाय मे वैवाहिक रीतिक शास्त्रीय विधान

महामत्तक-ठक्कुर-दत्तरामविरचिता वाजसनेयिनां विवाहपद्धतिः इन्दुमती टीका टिप्पणीभ्यां विभूषिता सम्पादकः श्री रामचन्द्र झा, व्याकरणाचार्यः आत्म निवेदन कन्यादान वस्तुतः कन्यादानक अर्थ विवाह संस्कार थिक। १६ संस्कारान्तर्गत विवाहसंस्कार प्रमुख मानल गेल अछि। कन्याक हेतु ई संस्कार उपनयनस्थानीये थिक। तंदाह मनुः – “वैवाहिको विधिः स्त्रीणामौपनायनकः स्मृतः” – अर्थात् स्त्रीक विवाहे स्त्रीक उपनयन संस्कार कहल गेल अछि। जेना उपनयनसंस्कारोत्तर कुमार ब्राह्मण वाजसनेयिनां विवाहपद्धतिः – मैथिल ब्राह्मण व अन्य समुदाय मे वैवाहिक रीतिक शास्त्रीय विधान

वाजसनेयिनाम्-एकोद्दिष्टपद्धतिः (मिथिला मे प्रचलित बरखीक पद्धति)

अथ वाजसनेयिनाम् एकोद्दिष्टपद्धतिः ‘इन्दुमती’ मैथिली-भाषाटीकाटिप्पणीभ्यां विभूषिता पृष्ठ १ – वाजसनेयिनाम्-एकोद्दिष्टपद्धतिः एकोद्दिष्टक सामग्री अच्छिञ्जल, गङ्गाजल, गङ्गौट, पिड़ी बनेबाक हेतु बालु, रक्षोघ्नदीप, उत्सर्गदीप, कुश, तिल, जौ, धूप, अक्षत, सालिग्राम, तेकुशा – ६, मोड़ा – ६, औंठी – १, वीरनी – १, छिन्नमूल कुश – १, सपवित्र कुश – १, पैता – २, पूड़ा – ९ (कटहर या वाजसनेयिनाम्-एकोद्दिष्टपद्धतिः (मिथिला मे प्रचलित बरखीक पद्धति)