कुम्भमेलाक खेला – ई केहेन भ’ गेल झमेला
मैथिली कथा – हेमन्त झा महाकुम्भ आ भ्रम मुरारी बाबू – हे सुनू, शोर नै मचबै जाउ, आब जे निर्णय भ’ गेलै ताहि पर कायम रहू सब गोटे । श्याम – हँ कक्का जी, फेर लिस्ट बनाउ, सामान सभक ओरियान करू, अहू सब मे त समय लगतै । मुरारी बाबू – हँ, सुनै जाउ सब … कुम्भमेलाक खेला – ई केहेन भ’ गेल झमेला








