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प्रवीण नारायण चौधरी

बुद्ध धर्म एवं अन्य विचारधारा

Buddhism And Other Schools of Thought – Shri Chandrashekharendra Saraswati (in his book ‘The Vedas’) बौद्ध धर्म एवं अन्य विचारधारा शंकराचार्य एवं बौद्ध धर्म बहुतो लोक एहेन छथि जे कहैत छथि कि एहि देश सँ बुद्ध धर्म केँ भगेबाक काज आदि शंकराचार्य द्वारा कयल गेल छल – कारण ओहि आस्थाक निन्दा छल । ई गलत बुद्ध धर्म एवं अन्य विचारधारा

महाकवि विद्यापतिक भावपूर्ण रचना – नखशिख मे श्रीकृष्णक नायिका राधाक यौवन वर्णन

नखशिख महाकवि विद्यापतिक एकटा आर भावपूर्ण रचना ‘नखशिख’ – नायिका (राधाक) सुन्दरताक वर्णन करैत प्राप्त भेल अछि । हम कमजोर छात्र छी, परञ्च पढ़बाक जिद्द अछि । रामवृक्ष बेनीपुरी जेहेन महान् रचनाकार केर सम्पादित ‘पदावली’ सँ मदति लैत ई सुन्दर सन रचना अपन पाठक सब लग परोसैत छी । पढ़ब आ भावविह्वल बनब तेकर गारन्टी महाकवि विद्यापतिक भावपूर्ण रचना – नखशिख मे श्रीकृष्णक नायिका राधाक यौवन वर्णन

अनुगूंज के पाँचम आ अन्तिम प्रस्तुति रिलीज भेल

“अनुगूँज” शृंखलाक पाँचम और अंतिम प्रस्तुति! भोजपुरी पारंपरिक लोकगीत “मोरा जोगिया” औघरदानी, देवक देव महादेव कें समर्पित एक भावपूर्ण भजन अछि । ई सिर्फ एक गीत नहि, बल्कि अपन पारिवारिक विरासतक अभिन्न अंग अछि । एक परंपरा जे पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रवाहित होइत रहल अछि आ आइयो अपन हृदय में गुंजि रहल अछि । अंजनी कुमार चौधरी अनुगूंज के पाँचम आ अन्तिम प्रस्तुति रिलीज भेल

साहित्यकार तथा पत्रकार अर्चना झा ‘सीता’क उपाधिसँ सम्मानित

अप्रैल ४, २०२५ । मैथिली जिन्दाबाद!! ललितपुर, २० वैशाख २०८१ । ‘सीता जन्ती’क अवसरमे मैथिली ‘अर्चनाकृत रामायण’क लेखिका एवं पत्रकार अर्चना झाकेँ मन्त्रीद्वारा ‘सीता’ उपाधि सहित सम्मान कयल गेलनि अछि । मिथिला संस्कृति समाजद्वारा एहि वर्ष मैथिली ‘अर्चनाकृत रामायण’ केर लेखिका साहित्यकार एवं राष्ट्रिय समाचार समितिक पत्रकार अर्चना झा तथा काठमांडू जिल्ला अदालतकेर न्यायाधीश मोना साहित्यकार तथा पत्रकार अर्चना झा ‘सीता’क उपाधिसँ सम्मानित

नेपाली छन्दकविक मैथिली लेल शुभकामनाः ‘प्रिय बनोस्’

छन्दकवि रोहिणी रसिकजीक एकटा नेपाली कविता नेपालक राष्ट्रभाषा नेपाली भाषाक बाद मैथिली सर्वाधिक प्रयोग कयल जायवला भाषा थिक । मैथिलीभाषी समुदाय व नेपालीभाषी समुदाय सैकड़ों वर्ष सँ एक संग – एक संयुक्त समाज व राष्ट्र निर्माण कय केँ आपस मे मैत्रीभाव संग रहैत आबि रहल अछि । साविक मे मिथिला सँ तिब्बत केर बाट मे नेपाली छन्दकविक मैथिली लेल शुभकामनाः ‘प्रिय बनोस्’

अत्यन्त पठनीय-मननीय लेख – मीमांसा सिद्धान्त (वेदक उपांगक विश्लेषण)

आइ फेर सँ एकटा बहुत विचारणीय लेख पढ़ल – मोन भेल जे एकरा मैथिली मे अनुवाद कय अपन गम्भीर आ स्वाध्याय मे रुचि रखनिहार पाठक सब लेल सेहो प्रकाशित करी – The Meemamsa Doctrines Let me say something about the Meemaamsa doctrines. The arguments of the Meemaamsakas go like this. “Let us not worry whether अत्यन्त पठनीय-मननीय लेख – मीमांसा सिद्धान्त (वेदक उपांगक विश्लेषण)

हमर सपना अधूरे रहि गेल – सन्दर्भ भारत मे मिथिला

हमर सपना अधूरे रहि गेल – प्रवीण नारायण चौधरी सन्दर्भ – भारतीय गणराज्य मे मिथिला राज्यक स्थापना – मिथिला लेल ठोस राजनीतिक मंच – प्रबुद्ध व्यक्तित्वक समूह – थिंक टैंक – बार्गेनिंग ग्रुप – वैश्विक पटल पर मैथिल पहिचानक हिमायती लोकक समूह – आदिक सपना सन्दर्भ मे प्रवीण विचार  ईश्वी संवत् २०१२, बिहार द्वारा स्थापनाक हमर सपना अधूरे रहि गेल – सन्दर्भ भारत मे मिथिला

श्री संग वीवीआईटी व इंडिया-नेपाल सेन्टर द्वारा “इंडिया-नेपाल पार्टनरशिप समिट -२०२५” आयोजित

इंडिया-नेपाल पार्टनरशिप समिट २०२५ २२ अप्रैल २०२५ । मैथिली जिन्दाबाद !! पूर्णियाँ स्थित सब हिमालयन रिसर्च इंस्टीट्यूट (श्री) एवं विद्या विहार इंस्टीट्यूट अफ टेक्नोलौजी (वीवीआईटी) संग इंडिया नेपाल सेन्टर (पीएचडी चेम्बर अफ कमर्स एंड इन्डस्ट्री, नई दिल्ली) द्वारा इंडिया नेपाल पार्टनरशिप समिट २०२५ केर आयोजन कयल गेल जाहि मे भारत व नेपाल सँ दुइदेशीय सम्बन्धक श्री संग वीवीआईटी व इंडिया-नेपाल सेन्टर द्वारा “इंडिया-नेपाल पार्टनरशिप समिट -२०२५” आयोजित

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालयक हिन्दी सलाहकार समिति मे संजीव सिन्हा

२१ अप्रैल २०२५ । मैथिली जिन्दाबाद !! गत सप्ताह ‘संजीव सिन्हा वाणिज्य आ उद्योग मंत्रालयक हिंदी सलाहकार समितिमे नामित’ समाचार मिथिलावासी सभक ध्यानाकर्षण कयलक । मैथिली ओ मिथिला प्रति सदिखन सेवाभाव आ समर्पण सँ कार्य करनिहार कमल सन्देश पत्रिकाक सह-सम्पादक संजीव सिन्हाक नाम राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकारक अनुशंसा पर उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालयक हिन्दी सलाहकार समिति मे संजीव सिन्हा

अनावश्यक भाउ खोजब उचित नहि

भाउ कतहु मांगल गेलय औ सरकार! हमरा बुझने कोनो वस्तुक भाउ ओकर उपयोगिता पर निर्भर करैत छैक । नूनोक दाम ओकर विशेष स्वाद आ शारीरिक जरूरत देखियेकय बनलैक । कतेक मनुक्ख सेहो अपन भाउ तकैत भेटा जाइछ । परिवार मे कतेको तरहक जेठ-श्रेष्ठ, मित्रवत् वा अनुज सब होइत छथि । सब गोटेक अपन जीवन छन्हि अनावश्यक भाउ खोजब उचित नहि