Search

हमर सपना अधूरे रहि गेल – सन्दर्भ भारत मे मिथिला

720 भ्यूज

हमर सपना अधूरे रहि गेल

– प्रवीण नारायण चौधरी

सन्दर्भ – भारतीय गणराज्य मे मिथिला राज्यक स्थापना – मिथिला लेल ठोस राजनीतिक मंच – प्रबुद्ध व्यक्तित्वक समूह – थिंक टैंक – बार्गेनिंग ग्रुप – वैश्विक पटल पर मैथिल पहिचानक हिमायती लोकक समूह – आदिक सपना सन्दर्भ मे प्रवीण विचार 

ईश्वी संवत् २०१२, बिहार द्वारा स्थापनाक १०० वर्ष पूर्णता पर जारी ‘राज्य गीत’ मे मिथिला, मैथिली व मैथिल पहिचान प्रति घोर अपमानक अनुभूति आ विरोधक बाद विभिन्न स्तर पर जनजागरणक अभियान सब आरम्भ कयलहुँ । बड़-बुजुर्ग लोकनि मिथिला राज्यक मांग करथि, कतिपय स्थान पर हुनका सभक विरोध करी जे ई बिहार सँ अलग राज्यक गठन कय बिहार केँ कमजोर करता, पृथक् मिथिला राज्यक औचित्य बारे हुनका सब सँ अलग सोच राखल करी । मुदा ‘राज्य गीत’ मे मैथिल अस्मिताक कोनो मान-सम्मान नहि देखि ई बुझा गेल जे सचमुच बिहार एकटा असफल परिकल्पना थिक ।

बिहारक परिकल्पना केँ असफल कहबाक पाछाँ किछु मजगूत तर्क अछि । मुगलकालीन भारत मे सुबा-ए-बंगाल नाम सँ बिहार सहित वर्तमान पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, झारखंड, बांग्लादेश, पूर्वोत्तर भारतक ७ राज्य जानल जाइत छल । १७५७ ई. मे सुबा-ए-बंगाल केर नवाब सिराजुद्दौला आ ईस्ट इंडिया कम्पनी द्वारा भारत मे नियुक्त प्रथम गवर्नर रॉबर्ट क्‍लाइव बीच भेल सैन्य युद्ध (पलासीक युद्ध) मे नवाबक हारि भेल, ओ मारल सेहो गेलाह तथा ब्रिटिश सम्राज्यक उपनिवेश भारत मे स्थापना भ’ गेल ।

बंगाली सब अंग्रेजी भाषाक शिक्षा मे अपन कुशाग्रताक लाभ उठा अंग्रेजी हुकुमत सँ विभिन्न अवसर पर हावी होइत चलि गेल, जखन कि बुद्ध-महावीर-गुरु गोविन्द सिंह सहित अनेकों भूभाग सँ सन्त-महात्मा लोकनिक विहार क्षेत्र सँ उत्पन्न ‘बिहार’ क्षेत्रक लोक केँ बंगाली आ अंग्रेजक उपेक्षाक शिकार बनैत रहला पर बंगाल प्रान्त सँ अलग प्रान्त रूप मे मान्यता लेबाक मांग उठय लागल ।

बिहार अलग प्रान्त बनेबाक मांग करीब १८७० केर दशक मे मुंगेर सँ प्रकाशित ‘मुर्ग-ए-सुलेमान’ उर्दू अखबार मे ‘बिहार बिहारियों के लिये’ नारा सँ उठल जे जन-जन मे लोकप्रियता हासिल करैत चलि गेल । बाद मे १८९४ मे बिहार टाइम्स व बिहार बंधु नामक अखबार सेहो बिहार अलग प्रान्तक मांग केँ जोरदार समर्थन दैत लोकसमर्थन जुटाबय लागल ।

अखबार मे बंगाली केँ दीमक कहिकय बिहारी फसल (बिहारी प्रतिभा) नाश करयवला भाष्य जनमानस मे स्थापित कयल गेल । शिक्षा व प्रशासनिक क्षेत्र मे बंगालीक प्रतिभा सँ प्रभावित अंग्रेज सेहो बिहारी लोकक प्रति उपेक्षा आ दमन करब एहि मांग केँ आर बेसी तीव्रता प्रदान कयलक । ई इलाका पिछड़ापनक शिकार भ’ गेल छल ।

होइत-होइत कांग्रेस द्वारा १९०८ मे कयल गेल प्रान्तीय अधिवेशन मे ‘बिहार अलग राज्य’ केर मुद्दा केँ समर्थन दैत रिजोल्यूशन पास कयलक आर एहि वास्ते एकटा कमिटी सेहो गठन कयलक ।

हम मैथिल लोक केँ आश्चर्य लागि सकैत अछि जे कांग्रेस द्वारा बिहार राज्यक पृथक् अस्तित्व लेल गठित कमिटीक अध्यक्ष रूप मे दरभंगा महाराज रामेश्वर सिंह केँ बनायल गेलनि । अली इमाम एकर उपाध्यक्ष छलाह । १७५७ ई. सँ १४५ वर्षक कड़ा संघर्ष सँ आखिरकार १२ दिसम्बर १९११ ई. बिहार एवं उड़ीसा नाम सँ बंगाल सँ पृथक् राज्यक दर्जा प्राप्त कयलक, तथा २२ मार्च १९१२ केँ बिहार राज्य रूप मे स्थापित भ’ गेल ।

तत्कालीन अंग्रेजी उपनिवेशक हिस्सा भारत, ताहि मे बंगालीक दबदबा, फेर मुगलकालीन सामन्ती युगक कतेको सदीक मारि झेलि चुकल समूचा हिन्दुस्तान – एहि परिस्थिति मे दरभंगा महाराजा रामेश्वर सिंह केर अगुवाई मे अनेकों द्रष्टा लोकनि बिहार लेल जे सपना देखने रहथि ओ कतहु सँ कमजोर नहि छल । ओ निश्चय एकटा सशक्त प्रान्तीय शक्तिक सपना देखने रहथि ।

कहैत चली जे ‘पटना’ केँ बिहारक राजधानी घोषणा कयल गेल छल, ताहि पटनाक औरंगजेबक समय (१७०४ ई. आसपास) अजीमाबाद नाम देल गेल छल, तेकरो विकास आ समूचा बिहारक सड़क, रेल, वायुमार्ग आदिक विकास दरभंगे महाराजा साहेब लोकनिक अगुवाई मे होइत रहबाक इतिहास बिहारीलाल फितरत लिखित आईना-ए‍-तिरहुत मे वर्णन कयल गेल अछि । १८७० खेर दशक मे तत्कालीन बंगाल मे पड़ल घोर अकाल आ तत्पश्चात् खाद्यान्न आदिक वितरण लेल सड़क संजालक विकास आ कि पटना सँ दरभंगा धरिक रेलवे लाइन आदिक निर्माण सभक विशद् चर्चा भेटैत अछि ।

१९१२ मे बंग भंग सँ पृथक् भेल बिहारक द्रष्टा लोकनि जाहि सोच आ दृष्टि सँ मैथिली, भोजपुरी, मगही, उर्दू, सन्थाली, खोरठा, उड़ाँव, हो आदि विभिन्न तत्कालीन बिहारी भाषाक संयुक्त स्वरूप सँ सशक्त राज्य निर्माणक सपना देखने छलथि, से क्रमिक रूप सँ गलत सिद्ध होइत रहल । परिणाम १९३६ ई. मे उड़ीसाक अलग राज्य बनब, १९४० ई. सँ मिथिला व झारखंड केँ अलग राज्यक मान्यता प्रदान करबाक मांग, आदि होइत रहल ।

मुदा बिहारक संस्थापक ‘मिथिला’ आइ धरि निजत्वक रक्षा करबाक बदला दोसरे केँ आगू बढ़बय मे लागल रहि गेल । मिथिला लेल कोनो राजनीतिक संयंत्र कतहु नहि बनि सकल । आइयो धरि बिहारक राजनीति मे, देशक राजनीति मे, विश्वक राजनीति मे मिथिलाक लोक लग विचार, तर्क आ वीरता देखेबाक अनेकन उदाहरण सब देखि सकैत छी । परञ्च ‘मिथिला’ लेल न कोनो थिंक टैंक, न कोनो प्रबुद्ध व्यक्ति समूह, न कोनो प्रेशर ग्रुप, न बार्गेनिंग करयवला समूह, बस अलग-अलग टुकड़ी-टुकड़ी मे बँटल ५ टा लोकक ‘हू-हा-समिति’ त कतहु १०-२० टा लोकक ‘फू-फा-समिति’ अपन-अपन व्यक्तिगत स्वार्थ सिद्धि व राजनीतिक पहुँच लेल व्यग्र बनि ‘मिथिला-मिथिला’ करैत देखा गेल करैछ । एहि सँ बेसी विधिवत् कोनो संगठन नहि, कोनो कार्यकर्ता या केन्द्र नहि, न कतहु कोष न कार्यक्रम – क्रियान्वयनक त सपना दूरे रहि गेल । हमर सपना अधूरे रहि गेल ।

हरिः हरः!!

Related Articles