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श्री संग वीवीआईटी व इंडिया-नेपाल सेन्टर द्वारा “इंडिया-नेपाल पार्टनरशिप समिट -२०२५” आयोजित

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इंडिया-नेपाल पार्टनरशिप समिट २०२५

२२ अप्रैल २०२५ । मैथिली जिन्दाबाद !!

पूर्णियाँ स्थित सब हिमालयन रिसर्च इंस्टीट्यूट (श्री) एवं विद्या विहार इंस्टीट्यूट अफ टेक्नोलौजी (वीवीआईटी) संग इंडिया नेपाल सेन्टर (पीएचडी चेम्बर अफ कमर्स एंड इन्डस्ट्री, नई दिल्ली) द्वारा इंडिया नेपाल पार्टनरशिप समिट २०२५ केर आयोजन कयल गेल जाहि मे भारत व नेपाल सँ दुइदेशीय सम्बन्धक जानकार विशेषज्ञ लोकनिक सहभागिता रहल ।

‘श्री’ केर अध्यक्ष प्रा. डा. रत्नेश्वर मिश्रक अध्यक्षता मे आयोजित कुल तीन सत्र मे ई शिखर सम्मेलन भारत-नेपाल सम्बन्धक विभिन्न आयाम पर चर्चा कयलक । प्रा. डा. मिश्र इतिहासविद् रहबाक संगहि सब हिमालयन रिसर्च इंस्टीट्यूट केर स्थापना मे संस्थापक स्व. रमेशचन्द्र मिश्रक भविष्यद्रष्टा होयबाक तथ्य सोझाँ रखैत कूटनीति, राजनीति ओ सुरक्षा संग-संग उन्नतिक रणनीति सम्बन्धी विषय सब पर निरन्तर शोध-अध्ययन व परिचर्चा करबाक कार्य करैत आबि रहल बात कहलनि । ओ भारत-नेपाल सम्बन्धक इतिहास आ विशेषता अत्यन्त प्राचीन एवं गहिंर हेबाक बात कहैत भविष्यहु मे दुइदेशीय सम्बन्ध मजगूत बनेबाक अनिवार्यता पर जोर देलनि ।

प्रथम उद्घाटन सत्रक अध्यक्षता जेएनयू प्रोफेसर मणिन्द्र नाथ ठाकुर कयलनि जे अपन अध्यक्षीय उद्बोधन मे भारत-नेपालक सम्बन्ध आ ताहि मे पूर्णिया तथा दुनू देशक सीमावर्ती क्षेत्रक समानता तथा परस्पर सम्बन्धक विशेष आधार केँ इंगित करैत ई शिखर सम्मेलन दुनू देशक मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध केँ आर बेसी प्रगाढ़ बनेबाक संगहि राजनीतिक-कूटनीतिक सम्बन्ध सँ इतर जनस्तरीय सम्पर्क व सम्बन्धक आधार पर आर्थिक, पर्यावरणीय, पर्यटकीय, सांस्कृतिक व अन्य सहयोग केँ बढ़ावा देबाक पथप्रदर्शन करत से सम्मेलन मे सहभागी विभिन्न विद्वान् विमर्शी व शोधकर्ता सब केँ फरिछा देलनि । श्री ठाकुर पड़ोसी संग सम्बन्ध सदिखन सुमधुर राखब जरूरी होइछ, कारण पड़ोसी बदलल नहि जा सकैत छैक बल्कि हर हाल मे आपसी सम्बन्ध मे मधुरते टा उपयुक्त व सटीक रहैत छैक । एहि लेल दुइ देशीय कूटनीतिक सम्बन्धक संग दुनू देशक जनस्तरीय सम्बन्ध बेसी प्रभावकारी होयत, यैह सोचि ई कार्यक्रम पूर्णियाँ मे आयोजित करब अत्युपयुक्त कार्य भेल ओ कहलनि ।

उद्घाटन सत्रहि मे इंडिया नेपाल सेन्टर केर समन्वय अतुल के. ठाकुर द्वारा नेपाल आ भारतक सम्बन्ध बेटी-रोटीक सम्बन्ध रहबाक जिवन्त उदाहरण स्वयं केर दैत अपन नेपाल मे विवाह आ काठमान्डू मे दशकों धरि रहिकय भारतक प्रसिद्ध समाचार पत्रक पत्रकारिता करबाक, नेपाल-भारत दुनू दिशक अनेकों मंच पर सहभागी बनि अनेकों शोध-खोज करबाक तथा आजुक सम्मेलनक आयोजन मे महत्वपूर्ण हिस्सा बनबाक तथ्य उजागर करैत आगू दुइ देशक सम्बन्ध मे मित्रता आ परस्पर सुरक्षा संग आर्थिक-सामाजिक-सांस्कृतिक-पर्यावरणीय-पर्यटकीय विकासक नव मार्ग प्रशस्त होयबाक विश्वास जतौलनि । विद्यमान अवस्था पर सेहो कतिपय विन्दु सब पर श्री ठाकुर अपन अनुभवक तथ्य सब रखलनि । एहि तरहक विमर्श जमीनी स्तर पर सरोकारवालाक संग करब जरूरी बुझि ई आयोजन दिल्ली सँ पूर्णियाँ आबिकय आयोजित कयल जेबाक विन्दु पर तथा एहेन सीमा-आरपार आर बेसी विमर्श कयल जेबाक विन्दु पर हुनकर जोर छलन्हि ।

नेपाल सँ सहभागी विशिष्ट अतिथि एवं वक्ता भास्कर कोइराला, संचालक-संस्थापक, नेपाल इन्स्टीट्यूट अफ इन्टरनेशनल एन्ड स्ट्रेटजिक स्टडीज द्वारा नेपाल-भारत सम्बन्धक इतिहास मे मिथिलाक भूमिका जाहि मे ११वीं शताब्दी मे स्थापित कर्णाटवंशी राजा आ राजधानी सिमरौनगढ़ सँ होइत गियासुद्दीन तुगलकक आक्रमण व तत्पश्चात् भक्तपुर (काठमांडू) पहुँचि राज्य संचालनक आधार धरिक चर्चा करैत दुइ देशक मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध मे भाषिक, सांस्कृति, सामाजिक, पारम्परिक समानताक मजगूत आधार रहबाक बात बतौलनि ।

विशेष अतिथि एवं वक्ता नेपाल इंडिया चेम्बर अफ कमर्स एंड इन्डस्ट्री (निक्की) केर बीरगंज चेयरमैन अभिषेक चौधरी दुइ देशक बीच वर्तमान साझेदारी तथा आर्थिक प्रगति पर जोर दैत हाल शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन तथा नेपाल मे आर बेसी वैदेशिक लगानीक जरूरत रहबाक बात कहलनि ।

विशेष अतिथि एवं वक्ता मोरंग उद्योग तथा ब्यापार संघ केर वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल साह दुइ देशक नागरिक-नागरिक बीच वैवाहिक सम्बन्ध, समान भाषा आ संस्कृति संग-संग धार्मिक समानता पर आधारित तीर्थ पर्यटन जेहेन अद्भुत-अकाट्य सम्बन्ध पर प्रकाश दैत दुइ देशक बीच कूटनैतिक सम्बन्ध मे आयल गोटेक खटासक कारण ई सब बात धीरे-धीरे कमजोर बनैत जा रहल अछि जाहि मे आजुक सम्मेलन आ एकर प्रतिवेदन सँ सम्बन्धित कूटनैतिक निकाय धरि बात पहुँचय आ जन-जन बीचक सम्बन्धक रक्षा हो से मांग कयलनि । नेपाल भारत सँ लगभग ७०% आयात करितो निर्यात ५-६% सँ ऊपर नहि पहुँचब एकटा चिन्ताक विषय थिक, एहि दिशा मे सेहो शोध-खोज करैत सुधारक उपाय दुनू देशक उच्चस्तरीय निकाय धरि पहुँचय ओ एहि सम्मेलन सँ अपेक्षा रखलाह । शिक्षाक क्षेत्र मे कार्यरत वीवीआईटी जेहेन स्तरीय संस्थान नेपालहु दिश इंजीनियरिंग कौलेज सभक स्थापना करय, कैम्पस सिलेक्शन सँ नेपाल मे उत्पादित इंजीनियर्स केँ भारत व आन-आन देश धरि रोजगारक अवसर जुड़ाबय, सेहो मांग कयलनि जेकरा आयोजक संस्थान सहर्ष स्वीकार सेहो कयलाह ।

निक्की केर विराटनगर चेप्टर अध्यक्ष मुकेश उपाध्याय अपन पैतृक जुड़ाव भारतक मधेपुरा आ सुपौल सँ होयबाक उदाहरण दैत दुनू देशक जनता-जनता बीचक सुमधुर सम्बन्धक महत्व मित्रताक जड़ि हेबाक बात कहलनि । ओहो मांग कयलनि जे कूटनैतिक सम्बन्ध भले केम्हरो चलि जाय, मुदा जनस्तरीय सम्बन्ध आ मित्रता कियो खण्डित नहि कय सकैत अछि । सम्मेलनक सफलताक शुभकामना दैत निकट भविष्य मे विराटनगर व नेपालक आन-आन क्षेत्र मे सेहो एहि तरहक सम्मेलनक आयोजन लेल वचनबद्धता प्रकट कयलनि ।

डा. रमन द्वारा संचालित ई उद्घाटन सत्र मे प्रश्नोत्तरी सेहो समावेश छल । सम्मेलन मे सहभागी विभिन्न व्यक्ति वक्ता सब सँ सवाल पुछलनि, सम्बन्धित वक्ता तदनुसार जवाब देलनि । एहि तरहें प्रथम सत्रक समापन पुनः डा. मणिन्द्र नाथ ठाकुर सत्राध्यक्ष द्वारा धन्यवाद ज्ञापन करैत कयल गेल ।

दोसर सत्र राउन्ड टेबल डिस्कसन केर छल । एकर अध्यक्षता अतुल के. ठाकुर कयलनि । एहि सत्र मे विमर्शीक तौर पर पत्रकार एवं लेखक गिरिन्द्रनाथ झा, पत्रकार एवं लेखक पुष्यमित्र, मैथिली एसोसिएशन नेपालक अध्यक्ष प्रवीण नारायण चौधरी, कोशी प्रदेश पर्यटन विभागक धार्मिक एवं सांस्कृतिक परिषदक को-ओर्डिनेटर बासुदेव बराल, नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन केर बिहार सम्भागक महिला अध्यक्ष पूजा मिश्र, कपूरी न्यूज केर मैनेजिंग डायरेक्टर मातृका नेपाल, वरिष्ठ संचारकर्मी पंकज बोधिसत्त्व तथा अन्य विद्वान् विमर्शी लोकनिक सहभागिता छल ।

एहि राउन्ड टेबल सत्र मे गिरिन्द्रनाथ झा द्वारा रेणू साहित्यक आधार पर दुइ राष्ट्रक मैत्रीपूर्ण सम्बन्धक विशद् चर्चा कयल गेल । केना साहित्यकार रेणू नेपालक लोकतांत्रिक क्रान्तिक नायक बी पी कोइराला आ हुनक परिवार संग नेपाल सँ लैत भारतक फारबिसगंज, दरभंगा पटना तथा बनारस धरि संग निभायल गेल – केना स्वयं हुनका संग नेपाल मे प्रजातंत्रक संघर्ष वास्ते योगदान देल गेल – एहि मे दुइदेशीय जनता बीचक मार्मिक सम्बन्ध केँ स्पष्ट चित्रित करैत श्री झा आगामी समय मे सेहो भाषा-साहित्य, संस्कृति, वैवाहिक सम्बन्ध संग-संग आर्थिक कारोबार आ पर्यटन आदिक क्षेत्र मे साझेदारी बरकरार रखबाक खाका प्रस्तुत कयलनि ।

पत्रकार एवं लेखक पुष्यमित्र दुइ देशक बीच पर्यटनक सम्भावना केँ ठोस रूप सँ आगू बढ़ेबाक दिशा मे काज करब जरूरी अछि बतेलनि । ओ कोशी नदी नेपाल सँ निकलि गंगा मे कुरसेला (कटिहार) मे मिलन करैछ, ताहि विन्दु धरि कोशी परिक्रमाक दिशा मे दुनू देशक जनता आबरजात करबाक उपक्रम पर सम्बन्धित लोकक ध्यानाकर्षण कयलनि, जेकरा कोशी प्रदेश पर्यटन विभागक अधिकारी बासुदेव बराल हाथोंहाथ स्वीकार करैत आगामी वर्ष सँ लागू करबाक आश्वासन सेहो देलनि ।

मैथिली एसोसिएशन नेपालक अध्यक्ष प्रवीण नारायण चौधरी नेपाल-भारतक सम्बन्धक ऐतिहासिकता रामायणकाल सँ स्पष्ट रहितो दुनू देशक कूटनीतिक निकाय द्वारा असल सरोकारवाला केँ किनारा राखिकय सन्धि-समझौता करबाक यथास्थितिक घोर निन्दा तथा आलोचना कयलनि । ओ कहलनि जे काठमांडू मे एकटा खास शासक वर्गक नीति अछि, तहिना भारतक राजधानी दिल्ली मे सेहो एहेन रणनीतिकार सब छथि जे सीमा आरपारक लोकक भावना केँ गनितो तक नहि छथि । ईपीजी गठन मे ४-४ सदस्य केकरा-केकरा राखल जाइछ से ध्येय अछि, बीपीकेएफ केर फंड केहेन उद्देश्य-लक्ष्य पर काज करैछ जे सीमा-आरपार मिथिला, भोजपुर आ अबध कि डुआर्स-उत्तराखंडक लोककला-संस्कृति व कलाकार सब छोड़ि परदेशिया नाचक वयार बहबैत नेपाल-भारत मित्रताक खोखला परिकल्पना करैत छथि । एना वाहियात कामचलाउ नीति सँ कोनो काज जमीनी स्तर पर प्रभावकारी नहि भ’ सकैत अछि । श्री चौधरी स्पष्ट कयलनि जे सुगौली सन्धि २०१६ मे भेल, केनेल केर भूसर्वेक्षण तथा नक्शाक आधार पर सन्धि-समझौता आ तत्कालिक नेपाल-भारत सरकार बीचक अपन तरहक सम्बन्धक आधार-सहमति अनुसार १८१८ ई. सँ जे सीमांकन (बोर्डर डिमार्केशन) शुरू भेल ओ क्रमिक रूप सँ भारतक स्वतंत्रता धरि, तत्पश्चात धरि सेहो आ हाल धरि कालापानी, लिपुलेख व लिम्पियाधुरा आदिक विन्दु पर जारिये अछि । लेकिन कोनो महत्वपूर्ण कार्य मे दुइ देशक सरोकारी जनताक राय लेने बिना दिल्ली-काठमान्डू कूटनीति जँ समझौता करत त ओ केहेन प्रभावकारी होयत से स्वतः कल्पना योग्य अछि । तहिना आर्थिक क्षेत्र मे भारत द्वारा एतेक रास सुविधा देलाक बादो नेपाल ट्रेड डिफिसिट नहि घटा रहल प्रसंग मे बतेलनि जे भारतक विभिन्न राज्य तथा संघीय सरकार द्वारा लागू कयल जा रहल विभिन्न औद्योगिक नीति, लगानीकर्ता लेल सब्सिडीज आ इन्सेन्टिव्स जेहेन प्रोत्साहन, सुलझल टैक्स नीति, टैक्स रिबेट्स (छुट) आदिक तुलना मे नेपाल सेहो जँ समुचित सुधार नहि करत, तखन नेपाली उत्पाद विशाल भारतीय बाजार मे प्रतिस्पर्धा नहि कय सकत आ एहि तरहें नेपाल मे उत्पादनक बदला नेपाली उत्पाद भारतहि मे उत्पादन कयल जेबाक स्थिति बनत । किछु उदाहरण सहित अपन विभिन्न विचार रखैत पर्यटनक क्षेत्र मे सेहो दुइ-देशक बीच बाहिरी पर्यटक लेल कोनो एक देशक वीजा रहलापर दुनू देशक भ्रमण करबाक सुविधा द्विपक्षीय समझौता सँ कयल जेबाक तथा भारत ओ नेपाल मे सामुहिक पर्यटक समूह व्यवस्थापक बीच सहकार्य बढ़ेबाक सुझाव रखलनि ।

नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन केर बिहार महिला अध्यक्ष पूजा मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार तथा नेपाल-भारत पर्यटन बढ़ेबाक दिशा मे सदिखन अपन योगदान देनिहार व्यक्तित्व पंकज बोधिसत्त्व सहित अन्यान्य वक्ता लोकनि सेहो विभिन्न आयाम पर अपन महत्वपूर्ण विचार रखने छलाह । तदोपरान्त अन्तिम सेशन मे करीब १ दर्जन महत्वपूर्ण कार्यपत्र सेहो प्रस्तुत भेल जे लिखित आधार पर दुइ देशक सम्बन्ध मे तालमेल, सुधार व प्रगतिक शानदार चित्रण प्रस्तुत कयलक । सम्मेलनक समापन पर ई तय कयल गेल जे असल सरोकारी बीच आरो सहकार्यात्मक कार्यक्रम हो, बेसी सँ बेसी लोकक विचार संग्रह कयल जाय आ तदनुसार सम्बन्धित निकाय केँ नीति बनेबाक कार्य मे सहयोग भेटय, से पुनीत उद्देश्य पूरा कयल जायत । काल्हिक सम्मेलन मे किछु महत्वपूर्ण एमओयू विभिन्न निकाय संग वीवीआईटी तथा श्री द्वारा कयल गेल अछि । निश्चय ई एक सफल आयोजन छल, एकरा निरन्तरता देनाय अत्यावश्यक अछि ।

निम्न समाचार साभारः अंग इंडिया न्यूज

सत्रक दौरान प्रस्तुत विचार मे भारत-नेपाल केर गहिंर सांस्कृतिक सम्बन्ध, पर्यावरणीय सहयोग, सीमा-पार आपदा प्रबन्धन, पारस्परिक व्यापार तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता, औद्योगिक विकास केँ बढ़ावा देनाय, सीमावर्ती क्षेत्र मे कनेक्टिविटी आर संयुक्त विकास केर आवश्यकता जेहेन विषय प्रमुख रहल । फ्लोर पर उपस्थित शोधार्थी लोकनि द्वारा अनेकों गंभीर शोध-पत्र प्रस्तुत कयल गेल । ताहि पर विशेषज्ञ लोकनिक टिप्पणी आ सुझाव सेहो देलक गेल छल । एहि अवसर पर सब हिमालयन रिसर्च इंस्टीट्यूट, विद्या विहार इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, इन्टेक पूर्णिया चैप्टर आ नेपाल व भारत केर पाँच प्रतिष्ठित संस्थानक बीच आपसी सहयोग हेतु पाँच महत्वपूर्ण एम.ओ.यू. पर हस्ताक्षर कयल गेल, जे भविष्य मे शिक्षा, शोध, सांस्कृतिक एवं तकनीकी आदान-प्रदान केर द्वार खोलत ।

एहि आयोजन मे डॉ. सुजीत कुमार, डॉ. अनिकेत मानस, इं. सौरभ कुमार, शरद चन्द्र पाण्डे, राहुल शांडिल्य, विवेक राय, अरूण कुमार दुबे, मुकेश कुमार, करण कुमार, प्रिंस कुमार दास, रविकान्त, जीतन कुमार, कुन्दन सहित कतेको युवा प्रतिनिधि सब आर आयोजक लोकनिक उल्लेखनीय योगदान रहल । अन्त मे, डॉ. रमन कार्यक्रमक प्रभावशाली संचालन करैत सब प्रतिभागी, आयोजक आ संस्थान प्रति धन्यवाद ज्ञापन कयलनि आर घोषणा कयल गेल जे एहि तरहक समिट हरेक वर्ष नियमित रूप सँ आयोजित कयल जायत जाहि सँ भारत-नेपाल सम्बन्ध आरो अधिक सुदृढ़, व्यावहारिक और भविष्य-केन्द्रित बनि सकत ।

हरिः हरः!!

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