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प्रवीण नारायण चौधरी

बेसहारा माय-पिताक एकलौता बेटा भवेश केँ ताकय मे मदति करय जाउ – अपील

अपील – प्रवीण नारायण चौधरी भवेश – अहाँ जेतय छी, कृपया अपन माँ-बाबू सँ सम्पर्क करू !   दरभंगा जिलाक नदियामी (बड़कीगाछी टोल) निवासी श्री शिव झा – सम्प्रति रायपुर (छत्तीसगढ़) मे नौकरी करैत छथि, हुनक एकमात्र पुत्र श्री भवेश कुमार झा फरवरी २०२३ सँ सम्पर्कविहीन छन्हि । पुलिस इन्वेस्टिगेशन मे भवेशक मोबाइल भुवनेश्वर (उड़ीसा) बेसहारा माय-पिताक एकलौता बेटा भवेश केँ ताकय मे मदति करय जाउ – अपील

प्रेम, विवाह आ दाम्पत्य जीवन

लेख-विचार – प्रवीण नारायण चौधरी प्रेम, विवाह आ दाम्पत्य जीवन   कनी विचारू त !   आइ-काल्हि युवातुर केँ ‘प्रेम-विवाह’ प्रति बहुत पैघ झुकाव देखल जाइछ । युवातुर केँ प्रभावित-प्रेरित करयवला कतेको तरहक सामग्री (कन्टेन्ट्स) प्रेमक पैकेज मे ततबे आकर्षक रूप मे बाँटल जा रहल छैक जे ‘विवाह’ जेहेन अति संवेदनशील विषय संग एकर जुड़ाव प्रेम, विवाह आ दाम्पत्य जीवन

भैरवस्थान, भैरवनाथ आ बाबा बैद्यनाथधामक कमरथुआ यात्राक अद्भुत इतिहास

भैरवस्थान – मधुबनी   कहबी कहैछ जे एक बेर भैरवनाथ बाबा मिथिला भ्रमण मे आबि गेलाह आ ततबे पहुनाइ नीक लगलनि जे भोलेनाथ लग समय पर नहि घुरि सकलाह कैलाश ! तखन एक दिन स्वप्न मे देखलनि जे भोला बाबा रुष्ट भ’ गेल छथि समय पर नहि घुरबाक कारण । सपने मे हाथ-पैर जोड़लनि जे भैरवस्थान, भैरवनाथ आ बाबा बैद्यनाथधामक कमरथुआ यात्राक अद्भुत इतिहास

मिथिलाभाषा रामायण – उत्तरकाण्ड – चारिम अध्यायः रावण केर श्वेतद्वीप जायब आ पराजित हेबाक उपरान्त….

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण उत्तरकाण्ड – चारिम अध्याय रावण केर श्वेतद्वीप जायब आ पराजित भ’ रामक हाथे मरबाक कामना करब, शम्बूक केर वध, लोकापवाद केर पसरब आ सीता केँ वनवास, सीताक वाल्मीकिक आश्रम मे जायब ।चौपाइ। एक समय उन्मद लङ्केश । युद्धार्थी सञ्चर कत देश ॥१॥ नारद मुनि सौँ दरशन मिथिलाभाषा रामायण – उत्तरकाण्ड – चारिम अध्यायः रावण केर श्वेतद्वीप जायब आ पराजित हेबाक उपरान्त….

मिथिलाभाषा रामायण – उत्तरकाण्ड – तेसर अध्यायः बालि ओ सुग्रीवक जन्मक कथा, सनत्कुमार द्वारा रावण केँ उपदेश

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण उत्तरकाण्ड – तेसर अध्याय बालि ओ सुग्रीवक जन्मक कथा, सनत्कुमार द्वारा रावण केँ उपदेश ।चौपाइ। कह सानुज बालिक उतपत्ति । जनिका छल अति बल सम्पत्ति ॥१॥ रावण तनि तट तृणक समान । बालिक सदृश शूर के आन ॥२॥ राम-प्रश्न मुनि शुनल अगस्त्य । चरित कहय लगलाह मिथिलाभाषा रामायण – उत्तरकाण्ड – तेसर अध्यायः बालि ओ सुग्रीवक जन्मक कथा, सनत्कुमार द्वारा रावण केँ उपदेश

सत्यकथाः एकटा अचला छलीह जिनका……

कथा – प्रवीण नारायण चौधरी एकटा अचला छलीह जिनका….. (सत्यकथा – सन्देशः परिवेशक पहिचान अत्यावश्यक) [आइ-काल्हि बहुत रास नवविवाहिता संग अचला जेहेन स्थिति सम्भव अछि । अहाँ कोनो बात नीके सोचिकय करब, मुदा अहाँक नीक केँ बेर-बेर दूसल जायत, हतोत्साहित कयल जायत, कन्फ्यूज बना देत परिवेशक लोक – तखन अहाँ कि करब ?] अचला अपन सत्यकथाः एकटा अचला छलीह जिनका……

कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण – सम्पूर्ण पाठ

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी सम्पूर्ण मैथिलीभाषी लेल अत्यन्त गौरवबोध संग मैथिली मे रामायण पाठ करबाक सुन्दर स्रोत ‘कविश्वर चन्दा झा कृत् मिथिलाभाषा रामायण’ केर पूर्ण पाठ २१ जनवरी २०२५ केँ सम्पन्न भेल अछि । लगभग १ साल लागल । पाठक अर्थ भेल ओकरा पढ़ब, मनन करब आ तदनुसार आरो लोक पढ़ि सकथि ताहि लेल कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण – सम्पूर्ण पाठ

पं. गोविन्द झा द्वारा कविश्वर चन्दा झा रचित मिथिलाभाषा रामायणक हिन्दी अनुवाद – मैथिली रामायण

पुस्तक चर्चाः मैथिली रामायण मैथिली रामायणक हिन्दी अनुवाद – पं. गोविन्द झा १ वर्ष सँ कनेक बेसी भेल जे कविश्वर चन्दा झाक रामायण – कविचन्द्र कृत् मिथिलाभाषा रामायण केर पाठ एवं टुकड़ा-टुकड़ा मे फेसबुक पर पोस्ट करैत मैथिली जिन्दाबाद डट कम पर अध्याय हिसाबे संग्रह कय रहल छी । आब उत्तरकाण्डक दोसर अध्याय जाहि मे पं. गोविन्द झा द्वारा कविश्वर चन्दा झा रचित मिथिलाभाषा रामायणक हिन्दी अनुवाद – मैथिली रामायण

कोन-कोन भाषा प्राचीनकाल सँ आइ धरि जिबित अछि – भाषाक जीवनक आधार की ?

लेख   – प्रवीण नारायण चौधरी यैह ७ गोट भाषा केँ प्राचीनता प्राप्त अछि कनी मनन करू – भाषाक आयु कोन आधार पर जिबन्त रहैछ ! विश्व भरि मे कुल ७ गोट भाषाक प्राचीनता सुविख्यात अछि – से कोन-कोन भाषा थिक आ एकर ख्यातिक मूल कारण कि छैक – एहि पर मनन करबाक अछि । कोन-कोन भाषा प्राचीनकाल सँ आइ धरि जिबित अछि – भाषाक जीवनक आधार की ?

मिथिलाभाषा रामायण – उत्तरकाण्ड – दोसर अध्यायः रावण आदिक तपस्या, वर पायब तथा विवाहादिक कथा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण उत्तरकाण्ड – दोसर अध्याय रावण आदिक तपस्या, वर पायब तथा विवाहादिक कथा ।जयकरी छन्द। अथ एक समय तहाँ वित्तेश । राजित पिता वास जहि देश ॥१॥ पुष्पक चढ़ल भानु-सम राज । राज-राज सम्राज विराज ॥२॥ तनिकर विभव देखल सतमाय । नाम केकसी अवसर पाय ॥३॥ रावण मिथिलाभाषा रामायण – उत्तरकाण्ड – दोसर अध्यायः रावण आदिक तपस्या, वर पायब तथा विवाहादिक कथा