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प्रवीण नारायण चौधरी

बिहार मे फेर त नहि आओत जंगलराज ?

राजनीति आ प्रवीण विचार – प्रवीण नारायण चौधरी जंगल केर राजा आ राजनीति भारत १९४७ मे स्वतंत्र भेल । स्वतंत्रता पछाति ‘संविधान सभा’ द्वारा भारतक गणतंत्रात्मक स्वरूप केँ ‘संघीय गणराज्य’ केर आधार राष्ट्र-राज्य सिद्धान्त अनुसार लगभग ५५० रियासती राज (princely states) केँ एकीकृत रूप मे संघ एवं राज्य द्वारा राष्ट्रिय राजश्वक वितरण व भोग-चलन मुताबिक बिहार मे फेर त नहि आओत जंगलराज ?

महालक्ष्मी पूजन – मिथिलापद्धति

अथ महालक्ष्मीपूजाविधिः शुभमुहूर्ते यजमानः स्वतः पीताम्बरधरः कृतनित्यक्रियः पूजास्थानमागत्य (१) पंचदेवता विष्णुं च संपूज्य कुशत्रय-जलान्यादाय – ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा । यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः ॥ इति पूजाद्रव्यम्, आत्मानं चाभिषिच्य पुष्पाण्यादाय – ॐ ह्रीं आधारशक्तये कमलासनाय नमः । इत्यासनाय पुष्पाणि त्यक्त्वा आसनं परिगृह्य – ॐ पृथ्वि त्वया घृता लोका देवि त्वं महालक्ष्मी पूजन – मिथिलापद्धति

वेदांगः ज्योतिष – वेदक आँखि

वेदांगः ज्योतिष – वेदक आँखि एखन धरि हम चारि गोट वेदांगक बारे मे बात कयलहुँ अछि, यानि शिक्षा, व्याकरण, छन्द आ निरुक्त । पाँचम अछि ज्योतिष । ज्योतिष वेद पुरुषक आँखि – देखबाक अंग जेकाँ काज करैत अछि । एहि विज्ञान (साइंस) या शास्त्र केर तीन टा हिस्से अथवा स्कन्ध अछि । तेँ, एकरा – वेदांगः ज्योतिष – वेदक आँखि

वेदांगः निरुक्तम् – वेदक कान

वेदांगः निरुक्तम् – वेदक कान निरुक्त वैदिक शब्दकोश छी । संस्कृत मे शब्दकोश केँ कोश कहैत छैक । ‘अमर कोश’ नामक एकटा प्रसिद्ध संस्कृत शब्दकोश अछि । शब्दकोश केँ ‘निघंडु’ सेहो कहल जाइत छैक । प्रत्येक शब्द केँ अक्षर-वार विभाजित कयल गेल छैक, जाहि सँ ओकर उत्पत्ति केर मूल पता चलैत छैक आर प्रत्येक शब्दांश वेदांगः निरुक्तम् – वेदक कान

नेपाली युवा आशीर्वाद राज झा संयुक्त राष्ट्रसंघक विश्व खाद्य मंच २०२५ मे सहभागी

काठमांडू २६ असोज : नेपालक युवा आशीर्वाद राज झा केँ संयुक्त राष्ट्रसंघक खाद्य आ कृषि संगठन (एफएओ) अन्तर्गत आयोजित विश्व खाद्य मंच (डब्लुएफएफ) २०२५ मे सहभागी होबाक लेल नेपाल सँ एकमात्र आधिकारिक निमंत्रण प्राप्त भेल अछि । नेपाल सँ प्रतिनिधित्व करबाक लेल आधिकारिक निमंत्रण भेटल काठमांडू वन विज्ञान कलेजक स्नातक विद्यार्थी आशीर्वाद राज झा कार्यक्रम नेपाली युवा आशीर्वाद राज झा संयुक्त राष्ट्रसंघक विश्व खाद्य मंच २०२५ मे सहभागी

वेदांगः छन्द – वेदक पैर

वेदांग छन्द – वेदक पैर वेदक छह अंग मे सँ एकटा छन्द केँ वेदपुरुषक चरण (पैर) मानल जाइछ । ‘छन्द’ केर एकटा आरो अर्थ अछि । ई स्वयं वेद केँ सन्दर्भित करैत अछि । भगवान कृष्ण वेद केँ सृष्टिक गाछ केर पत्ता कहैत छथि – छन्दांसि यस्य पर्णानि । एतय हम ‘छन्द’ केर एकटा अलग वेदांगः छन्द – वेदक पैर

वेदांगः व्याकरण – वेदक मुँह

वेदांग: व्याकरण वेदपुरुषक दोसर अंग हुनक मुख अछि । व्याकरण यैह अत्यन्त महत्वपूर्ण अंग थिक । व्याकरण पर अनेक ग्रंथ अछि । एहि मे सँ सर्वाधिक प्रचलित ऋषि पाणिनिक व्याकरण अछि । पाणिनिक व्याकरण सूत्र रूप मे अछि । हुनक व्याकरण सूत्र पर वररुचि द्वारा एकटा विस्तृत भाष्य या ‘वार्तिक’ लिखल गेल अछि । ऋषि वेदांगः व्याकरण – वेदक मुँह

नेपालमे लिखल गेल पहिल हिन्दू कानून संहिताः विवादरत्नाकर

लेख – मौलिक इतिहास श्री गणेशाय नमः नेपालमे लिखल गेल पहिल हिन्दू कानून संहिताः विवादरत्नाकर – हिरालाल कर्ण नेपालमें लिच्छविकाल सौँ परम्परागत रुपमें हिन्दू धर्मशास्त्र, स्मृतिग्रन्थ सभपर आधारित न्यायप्रणाली आ कानुनी व्यवस्था सञ्चालनमें रहल बात इतिहासमें भेटैत अछि । एहि तथ्यके पुष्टि अनन्तलिंगेश्वर महादेव मन्दिरमें रहल मानदेव सम्वत ८० के राजा नरेन्द्रदेवक अभिलेखके अड़तीसम् पंक्तिमें नेपालमे लिखल गेल पहिल हिन्दू कानून संहिताः विवादरत्नाकर

मिथिलाभाषा रामायण – सुन्दरकाण्ड दोसर अध्याय – लंका मे हनुमानजीक रावणक महल मे घुमनाय

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी चन्द्रकवि विरचित मिथिलाभाषा रामयण सुन्दरकाण्ड – दोसर अध्याय सीताक खोज मे निकलल हनुमानजीक लंका मे रावणक महल घुमबाक प्रकरण ।षट्पद। मारुत-नन्दन तखन सूक्ष्म-तन, निशिमे धय कहुँ ॥१॥ लङ्का कयल प्रवेश भ्रमित अतिगुप्त भय कहुँ ॥२॥ सीता तकयित ततय दशानन-मन्दिर गेला ॥३॥ देखि विभव-विन्यास बहुत मन विस्मित भेला ॥४॥ देखल लङ्का मिथिलाभाषा रामायण – सुन्दरकाण्ड दोसर अध्याय – लंका मे हनुमानजीक रावणक महल मे घुमनाय

वेदांग – शिक्षाः वेदक नाक तथा फेफड़ा

वेदांग – शिक्षाः वेदक नाक तथा फेफड़ा वेदक छः अंग मे सँ सब सँ प्रथम (मुख्य) अंग शिक्षा अछि । एकरा वेदक नाक (नासिका) कहल जा सकैत अछि । नासिकाक कार्य केवल गन्ध चिन्हबाक, जे कि एकटा छोट भूमिका थिक, ततबे धरि नहि अछि । बेसी महत्वपूर्ण (भूमिका) श्वास क्रिया सेहो एहि अंग (नासिका) केर वेदांग – शिक्षाः वेदक नाक तथा फेफड़ा