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प्रवीण नारायण चौधरी

जोगाड़ टेक्नोलौजी सँ हासिल सफलता क्षणभंगुर

जोगाड़ टेक्नोलौजी सँ भेटल सफलता आ दुष्परिणाम वर्ष १९८४ ई. । मैट्रिक परीक्षा लेल सेन्टर ग्रामीण क्षेत्रक विद्यालय मे । शिक्षामंत्री नागेन्द्र झाक कार्यकाल । हमर उमेर ११ वर्षक । हमर गामक विद्यालय केर सेन्टर नारायणपुर मे छल । जहिया-जहिया परीक्षा होइक, गाम सँ हेंजक हेंज लोक सब साइकिल पर जाइत छल, परीक्षा देखय लेल जोगाड़ टेक्नोलौजी सँ हासिल सफलता क्षणभंगुर

स्वयं केँ पवित्र बनाकय राखब सहज नहि छैक – स्वामी चिदानन्द जीक लिखल एक अति पठनीय लेख

NOT A ROSY PATH : (This article is a chapter from the book The Divine Destination.) – Swami Chidananda Gurudev says, “There is no royal road in spirituality. Adversity develops the power of endurance and will-force. Adversity develops fortitude and forbearance. All the prophets, saints, Bhaktas and Yogins of yore had to struggle hard against स्वयं केँ पवित्र बनाकय राखब सहज नहि छैक – स्वामी चिदानन्द जीक लिखल एक अति पठनीय लेख

लेखक ओ जे पाठकक हित बुझिकय लेखन कार्य करय

लेखक वैह जिनकर पाठक अछि मैथिली हमर मातृभाषा थिक । एहि मे लिखैत छी त अपन मिथिलाक लोक – अपन घर-परिवारक लोक – हिनका सभक हितचिन्तक बनिकय लिखब अन्तरात्मा मे सेवा करबाक भाव प्रदान करैत अछि । एहि सँ लोक त लोक, परलोक आ खासकय जगजननी जानकी जी सेहो प्रसन्न होइत छथि ई अन्तर्भाव मे लेखक ओ जे पाठकक हित बुझिकय लेखन कार्य करय

मिथिलाभाषा रामायणः सप्तम् अध्याय – मंत्री सुमन्तजीक अयोध्या घुरब

स्वाध्याय कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण  अध्याय सातम्  मंत्री सुमन्तजीक अयोध्या वापसी  ।मिथिला संगीतानुसारेण पार्व्वतीयबराड़ी नाम छन्दः। ओतय अयोध्या मन्त्रि सुमन्त्र । पहुचि सरथ भेल दिवसक अन्त ॥१॥ वसनहि सौँ मुह कय लेल ओट। राम-वियोग दुःख बड़ गोट ॥२॥ नोरक लेल गेल तन तीति । पुर-प्रवेश मे हो बड़ भीति ॥३॥ रथ छोड़ल बाहर नृप-द्वार । मिथिलाभाषा रामायणः सप्तम् अध्याय – मंत्री सुमन्तजीक अयोध्या घुरब

कि पुराण सत्य अछि या मनगढ़ंत ? – श्री चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वती

Are Puraanas true or fabricated? ‘No credence can be given to Puraanas, because it contains matters beyond the realm of known natural phenomena,’ is the modern view. That the Devas freely roamed the earth and granted boons to men is dismissed as fantasy because such things do not happen today. “A woman was cursed and कि पुराण सत्य अछि या मनगढ़ंत ? – श्री चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वती

वेदक उपांग ‘पुराण’ – वेदक आवर्धक काँच

The Upaangas: Puraanas – Veda’s Magnifying Glass The Puraanas can be called the ‘magnifying glass’ of the Vedas, as they magnify small images into big images. The Vedic injunctions which are contained in the form of pity statements are magnified or elaborated in the form of stories or anecdotes in the Puraanas. A brief exposition वेदक उपांग ‘पुराण’ – वेदक आवर्धक काँच

विद्यापति गीत – श्रीकृष्ण नायिका राधाक रूप-वर्णन (भक्तिभावक व्याख्या सहित)

विद्यापति गीत – महाकवि विद्यापति आजु देखल जति के पतिआएत अपुरुब बिहि निरमान रे । जुगल सैल-सिम हिमकर देखल एक कमल दुइ जोति रे । फुललि मधुरि फुल सिंदुर लोटाएल पाँति बइसलि गज-मोति रे ॥ बिपरित कनक कदलि-तर सोभित थल-पंकज के रूप रे ॥ तथहु मनोहर बाजन बाजए जनिजागे मनसिज भूप रे । भनइ विद्यापति विद्यापति गीत – श्रीकृष्ण नायिका राधाक रूप-वर्णन (भक्तिभावक व्याख्या सहित)

लेख-विचारः फिल्म, समाज आ हम

फिल्म, समाज आ हम प्रवीण नारायण चौधरी फिल्मी फैशन आ पोज केर बहुत पैघ प्रभाव समाज पर पड़ल अछि । एहेन कियो नहि जे ‘सिल्वर स्क्रीन’ पर प्रस्तुत काटल-छाँटल ‘रिल्स’ द्वारा गोटेक घन्टा मे ‘मानव जीवन’ सँ जुड़ल अनेकों ‘कथा-गाथा’ प्रस्तुति सँ स्वयं केँ बचा सकल हो । एकर सर्वाधिक प्रभाव छौंड़ा माँरड़ि पर पड़ैत लेख-विचारः फिल्म, समाज आ हम

महाकवि विद्यापतिक दर्शन – स्मरण – सुमिरन आ मनन सँ मानव जीवन सफल होइछः प्रवीण संस्मरण

चमत्कार सँ साक्षात्कार महाकवि विद्यापतिक यैह तस्वीर उमेश भाइसाहब (बीरगंज सँ विराटनगर यात्रा आ संकल्पानुसार विद्यापति स्मृति समारोहक आयोजन मे) सहयोगीक भूमिका निभेनिहार प्रवीण केँ देने रहथि । प्रेम नारायण झा – हमर जेठसारक लाट मे ‘बहिनोइ’ केर सम्मान दैत कहने रहथि – “चौधरीजी, हिनकर नित्य स्मरण सँ मानव जीवन सफल जाइत अछि । हिनका महाकवि विद्यापतिक दर्शन – स्मरण – सुमिरन आ मनन सँ मानव जीवन सफल होइछः प्रवीण संस्मरण

विद्यापति गीतः राधाकृष्णक प्रेम केँ सुन्दर भाव मे वर्णन ‘माधव, कि कहब सुन्दरि रूपे’

साहित्य – महाकवि विद्यापति विद्यापति गीत (राधाकृष्ण प्रेम आ राधाक रूप केर अति-विलक्षण वर्णन । भाव सँ भरल – महान् भक्त कविक रचना, जे पढ़िते-सुनिते आ मनन करिते हम-अहाँ पवित्र भ’ सकैत छी । सम्पूर्ण पाप सँ छुटकारा भेटि सकैत अछि ।) माधव, की कहब सुन्दरि रूपे कतेक जतन बिहि आनि समारल देखल नयन सरूपे विद्यापति गीतः राधाकृष्णक प्रेम केँ सुन्दर भाव मे वर्णन ‘माधव, कि कहब सुन्दरि रूपे’