चमत्कार सँ साक्षात्कार
महाकवि विद्यापतिक यैह तस्वीर उमेश भाइसाहब (बीरगंज सँ विराटनगर यात्रा आ संकल्पानुसार विद्यापति स्मृति समारोहक आयोजन मे) सहयोगीक भूमिका निभेनिहार प्रवीण केँ देने रहथि । प्रेम नारायण झा – हमर जेठसारक लाट मे ‘बहिनोइ’ केर सम्मान दैत कहने रहथि – “चौधरीजी, हिनकर नित्य स्मरण सँ मानव जीवन सफल जाइत अछि । हिनका खुब जतन सँ राखब । कहियो कोनो चीजक कमी नहि होयत ।” से सच्चे, हिनका पबिते मानू चमत्कार भ’ गेल । अपन मातृभाषा मैथिली, विद्यापतिक शब्द मे ‘देसिल वयना’ मे रचनाधर्मिताक गुण आ सेवाकर्म प्रवेश कय गेल । प्रवीणक संसारे बदलि गेल । रचनाधर्मिताक गुण पहिने सेहो छल, मुदा हिन्दी, अंग्रेजी केँ बेस उपर बुझबाक भ्रम मे फँसल रही । लेकिन कवि विद्यापतिक यैह छोट तस्वीर पैघ चमत्कार कय गेल । उमेश भाइसाहबक बात पूर्णतया सिद्ध भ’ गेल ।
जीवनक कोन ठेकान, कखन कतय रहत । लेकिन जतबे भेटल जीवनकाल परमपिता परमेश्वर सँ तेकर सदुपयोग मे विद्यापतिक पदावली केँ पढ़नाय-बुझनाय शामिल भेल त जीवन सफल भेल – यैह भान मे छी एखन हम । विगत गोटेक मास मे लगभग ५-७ गोट रचना केँ थोड़-बहुत बुझि पेलहुँ, तेकर भावार्थ सहित पद सही क्रम मे अपनहुँ सब लग परसि देलहुँ । मैथिली जिन्दाबाद पर सेहो प्रकाशित कयल । आ, बच्चे सँ स्कूलक सांस्कृतिक गोष्ठी आ विद्यापति स्मृति समारोह सब मे कविता-गीत आदिक प्रस्तुतिक संस्कार श्रेष्ठजन सँ पेने प्रवीण, एहि सुन्दर-सुन्दर – भक्तिभाव सँ भरल रचना सब केँ गाबिकय सेहो परसैत आबि रहल छी ।
हमर ध्येय यैह अछि जे मैथिली भाषाक प्राण छथि ‘विद्यापति’ । हमरा सभक मातृभाषा मैथिलीक साहित्य एहेन महाकवि केँ पाबिकय अत्यन्त सम्मानित भेल अछि । यदाकदा गाड़ी (बौद्धिक समझ) फँसि जाइत अछि, आगू बाट सुझाइत नहि अछि, गूगलदेव सँ सहायता मँगैत छी आ तखन देखैत छी जे महाकवि विद्यापतिक पदावली संसार भरिक कतेको विश्वविद्यालय बाकायदा कोर्स अफ स्टडीज मे रखने अछि, कतेको विद्वान् सब हुनक रचना केँ अपन-अपन शैली मे व्याख्या कएने छथि । हालांकि हम अनपढ़ रहितो ओहि व्याख्या केँ अत्यन्त त्रुटिपूर्ण मानैत छी आ दुस्साहस कय-कय केँ बेर-बेर अपन टूटल-फूटल भाषा मे व्याख्या – सही भावार्थ रखबाक हिम्मत करैत छी । आत्मविश्वास एतेक प्रबल रहैत अछि जे पुछू जुनि ! जे राखि दैत छी से ठोकल आ विशुद्ध विद्यापतिक भाव मे रहल करैछ । अफसोस, विद्वान् लोकनि बलधकेल हुनकर रचना सभक अपन-अपन दृष्टि सँ अलग-अलग ढंग सँ रखलनि अछि । उदाहरण – पिया मोर बालक हम तरुणी गे – एकर भावार्थ सेहो राधाकृष्णक अद्भुत प्रेम केँ दर्शेबाक स्थान पर ‘बाल विवाह’ आदिक पेंच फँसाकय कयल गेल देखाइछ । शृंगार रस सँ पूर्ण रचना मे बेतुका अर्थ आ गन्दा (कामुक) भाव सब केँ घोंसियाकय कयल गेल व्याख्या सब हमरा बहुत कचोटैत अछि । तेँ शपथ लैत छी जे जा धरि जियब, ता धरि विद्यापतिक पदावली केँ सही भाव आ अर्थ संजोगैत रहब । तथास्तु, फेर दोसर दिन बाकी बात, आइ सुनू हमर हृदयक आवाज ‘माधव, कि कहब सुन्दरि रूपे’ ! सम्पूर्ण पद एवं भावार्थ काल्हिये पोस्ट कय देने रही । धन्यवाद !
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हरिः हरः!!
