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जोगाड़ टेक्नोलौजी सँ हासिल सफलता क्षणभंगुर

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जोगाड़ टेक्नोलौजी सँ भेटल सफलता आ दुष्परिणाम

वर्ष १९८४ ई. । मैट्रिक परीक्षा लेल सेन्टर ग्रामीण क्षेत्रक विद्यालय मे । शिक्षामंत्री नागेन्द्र झाक कार्यकाल । हमर उमेर ११ वर्षक । हमर गामक विद्यालय केर सेन्टर नारायणपुर मे छल । जहिया-जहिया परीक्षा होइक, गाम सँ हेंजक हेंज लोक सब साइकिल पर जाइत छल, परीक्षा देखय लेल । हमरो जेठ भैयारी सब परीक्षार्थी रहथि । एक दिन हमरो मोन भ’ गेल जा कय देखी । गेलहुँ सेन्टर पर । परीक्षा सेन्टर विद्यालयक चारूकात खूब ऊंचगर देवाल छल । मेन गेट पर पूलिस के पहरा । परीक्षा आरम्भ भेल । जोगाड़ टेक्नोलौजी सँ ‘क्वेश्चन आउट’ भ’ गेल छल । सेन्टर विद्यालयक चारूकात कलम-गाछी, खेत-खरिहान, पोखरिक महाड़ आदि सब तैर क्वेश्चन आबि गेल छल, चिटिंग (चोरी) करबाक लेल ‘चिट’ बनि रहल छल । कतेको विद्यालयक मास्टरसाहेब सब बीच मे बैसल, एन्सर (उत्तर) लिखबैत आ हुनकर चारूकात बेहाल परीक्षार्थीक अभिभावक आ चिट पहुँचेनिहार मेसेन्जर, कुरियर सभक जबर्दस्त भीड़ । सब केँ बुझल छैक जे ‘चोरी’ चलि रहल छैक, मुदा देखबय लेल सब पूर्ण ईमानदार आ कड़ा पदाधिकारीक भूमिका निभा रहल छल । छरे-छाँट धियापुता – हमरे समान आर छौंड़ा सब केँ चिट देल जाइक, पोन पर हाथ लगाकय देबाल पर चढ़ा चिटक पाछाँ रूम नम्बर आ सीट नम्बर सहित लिखिकय देल जाय । एहि जोगाड़ सँ मैट्रिक परीक्षा सम्पन्न भेल । कहियो कोनो पैघ पदाधिकारी आबि गेल आ ओकरा ई सब नीक नहि लगलैक त परीक्षा मे कदाचारिताक शिकायत कय ओ परीक्षा रद्द करबाक आ पुनः दोसर सेन्टर पर परीक्षा लेबाक अनुशंसा पर्यन्त कय दैक बोर्ड केँ ।

जी, हमर समतुरिया आ गोटेक वर्ष सीनियर (वरीय बन्धुगण) सब एहि ‘जोगाड़ टेक्नोलौजी’ वला मैट्रिक परीक्षा आ एकर रिजल्ट सँ परिचित हेब्बे करब । चिट सँ चोरी कय केँ जेकरा जतेक लिखल होइक, तेकर बाद ‘उत्तर-पुस्तिका’ (कौपी) कतय गेल, कोन मास्टरसाहेब कौपी जाँच करता आ पैरवी केना लागत – केना अपन विद्यार्थी केँ नीक अंक प्राप्त होयत – ई सारा जोगाड़ केर इतिहास हमरा बुझने १९८४ ई. सँ शुरू भेलैक । ताहि सँ पहिने जिला स्कूल दरभंगा आ गोटेक आरो जिला मुख्यालय वा आन जिला मुख्यालयक विद्यालय सब मे सेन्टर होइक, चोरी नगण्य चलैक, कौपी सब पर पैरवी आदिक सेहो स्थिति नहि रहैक कहाँदिन । ओना, हमर जन्म सँ पहिनेक बात केना रहल हेतैक ताहि मे ओझरेबाक जरूरत नहि एहि लेख मे । मैट्रिक परीक्षा मे खुलेआम भ्रष्टाचार, कदाचार, अनाचार आ दुराचारक जोगाड़ जखन चलय लगलैक बिहार मे – स्वाभाविक छैक जे पढ़ाइ करब-करायब मे सेहो बड पैघ परिवर्तन आबि गेलैक । विद्यार्थी, शिक्षक, अभिभावक – हरेक स्तर पर लापरवाही आ कर्तब्यभ्रष्टताक पराकाष्ठा आबि गेलैक एना हमरा लागल । पढ़यवला विद्यार्थी लेल जोगाड़-फोगाड़ गेल भाँड़ मे, ओ पहिने तैयारी करय, फेर जेहेन स्थिति आबय – परीक्षाक सामना करय । हमर मैट्रिक परीक्षा सेहो एहि सेन्टर पर भेल, कुल ५ विषय रद्द भेल, फेर कि-केना जोगाड़ टेक्नोलौजी सँ आखिरी मे ३ टा पेपर समस्तीपुर के. ई. इन्टर कालेज सेन्टर पर भेल आ एतबहि मे कतेको जोगाड़ी सभक भण्डा फोड़ भ’ गेल ।

निष्कर्षः

आइ-काल्हि जीवनक प्रत्येक पहलू मे मोटामोटी ‘जोगाड़ टेक्नोलौजी’ सँ लोक सफलता हासिल करबाक चेष्टा कय रहल देखाइछ । उपरोक्त मैट्रिक परीक्षा आ कदाचारिताक एक उदाहरण आइ हमर ५३मा वर्ष मे ई अनुभूति दय रहल अछि । जे मनुष्य नैतिकताक बल सँ संघर्ष कय केँ सफलता हासिल करैछ, ओ सदाबहार आ कर्मठ पुरुषार्थ प्राप्त करैछ । बाकी, जोगाड़ टेक्नोलौजी सँ हासिल केहनो सफलता ‘ताशक महल’ जेकाँ क्षणिक आ निश्चय टा शीघ्र नाश होयबला होइछ । वगैर मेहनत आ यथार्थ विद्या ओ बौद्धिक बल आर्जन कएने, मात्र अपन मड़ौसी (माय-बाप ओ पुरखाजन सँ वंशानुगत प्राप्त सामर्थ्य) केँ भजा-भजा (बेचि-बेचि) खायबला होइछ । जोगाड़ टेक्नोलौजी सँ प्राप्त सफलता कथमपि दूरगामी वा सार्थक जीवन नहि दय सकैछ । ‘विद्या धनं सर्वधनं प्रधानं’ सूत्र सदैव याद राखू । स्वयं भीतर जतेक विद्या आ बुद्धि बढ़त, मस्तिष्क भीतर ओतबे उजाला रहत । अन्धकार (समस्या) सँ निजात लेल यैह प्रकाश आवश्यक अछि । अस्तु !

हरिः हरः!!

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