दिल्लीक सुधीरा दाय ऊर्फ दीपक चौरसियाक खिस्सा
लघुकथा – रूबी झा कहल गेल छै सैंग (थोड़) लोक अपने संतान स होययै। एकटा छली सुधीरा दाय। अपन घरक ख्याल राखैय स ज्यादा दोसरे के घरक कहानी सुनैय-सुनाबै में मोन लागैय छलैन। अपन बच्चा स ज्यादा दोसरे के बाल-बच्चा पर आँखि गड़ेने रहै छलैथ। पूरा मुहल्ला में ककरा घर में कि भेलैक नै भेलैक … दिल्लीक सुधीरा दाय ऊर्फ दीपक चौरसियाक खिस्सा








