स्कूलक संस्कार सँ बहुत बेसी कारगर छैक संयुक्त परिवार सँ प्राप्त संस्कार
ओ बाबी, नानी, काकी आ माँ सारा संसार घुमलहुँ। बहुतो लोक-समाजक जड़ि बुझबाक प्रयत्न कयलहुँ, जतबा सम्भव भेल। मानव समाज सब तैर एक्के रंग बुझायल, लेकिन किछु बात भिन्न छल। घुरि-फिरि हमरा जे सब सँ बेसी नीक लागल ओ बुझेली हमर बाबी, हमर नानी, हमर काकी आ हमर माँ। हमरा अपन बाप-पित्ती आ जेठजन … स्कूलक संस्कार सँ बहुत बेसी कारगर छैक संयुक्त परिवार सँ प्राप्त संस्कार





