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प्रवीण नारायण चौधरी

कि बीएचयू मे फेर सऽ शुरु होयत मैथिलीक पढाइ

विशेष संपादकीय विगत किछु समय सँ मैथिल समाज – बनारस तथा एकर अगुआ – संयोजनकर्ता एडवोकेट निरसन झा बनारस मे फेर सँ मैथिली गतिविधि केँ पटरी पर अनबाक अथक प्रयास कय रहला अछि। हालहि किछु दिन पूर्व मे राज दरभंगाक महत्वपूर्ण योगदान सँ निर्मित बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय मे मैथिली पठन-पाठन लेल संघर्ष करबाक संग-संग काशीक्षेत्र कि बीएचयू मे फेर सऽ शुरु होयत मैथिलीक पढाइ

मैथिल सर्जक परिचयः दिनेस रसिया

विशिष्ट व्यक्तित्व परिचयः मैथिली कवि दिनेस रसिया – बिन्देश्वर ठाकुर, दोहा, कतार। गा.वि.स. मौवाहा, सप्तरी(नेपाल) घर रहल दिनेश रस्या जी हाल सिरहा जिल्लाक लहानमे सौगात एफ. एम लहान -८८.१ मेगाहर्जमे कार्यरत छथि । मैथिली साहित्य सनेश कार्यक्रम चला’ रहल रस्या जी प्रस्तोताके साथ-साथ पत्रकारिता एवं शिक्षण पेशामे सेहो लागल छनि । एकर अतिरिक्त एक कुशल मैथिल सर्जक परिचयः दिनेस रसिया

मैथिल सर्जक परिचयः बेचन महतो

विशिष्ट व्यक्तित्व परिचयः मैथिली कवि बेचन महतो – बिन्देश्वर ठाकुर, दोहा, कतार। धनुषा जिल्लाक हथमुण्डा गामक साधारण परिवारमे जनम लेनिहार एकटा सर्व साधारण व्यक्ति कोनाक सर्जक व कवि भऽ गेलाह आ कर्मस्थल गल्फ देशक मरुभूमियोमे कोन तरहे अपन भाषा-संस्कृतिक विकास दिस अग्रसर छथि ? आबू पढी कवि बेचन महतो जीक दिलचस्प रिपोर्ट मैथिली जिन्दाबाद पर मैथिल सर्जक परिचयः बेचन महतो

डा. तारानन्द वियोगी केर नव मैथिली पोथीः बहुवचन

नव मैथिली पोथीः बहुवचन लेखकः डा. तारानन्द वियोगी आगामी मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल – पटना मे फरबरी मास मे डा. तारानन्द वियोगीक ई नव पोथी ‘बहुवचन’ उपलब्ध होयबाक जानकारी करबैत डा. वियोगी फेसबुक स्टेटस मार्फत निम्न जानकारी सेहो करौलनि अछि। “आलोचनाक ई किताब मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल (12-14 फरबरी) मे स्टाल पर उपलब्ध रहत। विषय नवजागरण, अद्यतन डा. तारानन्द वियोगी केर नव मैथिली पोथीः बहुवचन

२६ जनबरी – भारतीय गणतंत्र दिवसः ऐतिहासिक गाथा

भारतीय गणतंत्र दिवस: ऐतिहासिक गाथा इतिहास केर अध्ययन महत्त्वपूर्ण अछि, कारण जे बीतल बात केर गाथा सँ नीक आ बेजायक समुचित ज्ञान अर्जन कैल जाएछ। स्वाध्याय मे यदा-कदा आ विशेष अवसरपर इतिहासक अध्ययन केर महत्त्व केँ माहात्म्य रहि आयल छैक। आउ, आइ २६ जनबरी – २०१६ – भारतक गणतंत्र दिवस केर शुभ उपलक्ष्य मे अध्ययन २६ जनबरी – भारतीय गणतंत्र दिवसः ऐतिहासिक गाथा

मैथिल समाज केर आपसी समन्वय सँ होयत सब सार्थक कार्य

मुम्बई कायम करत नव मिसाल – नया अनुकरणीय उदाहरण – पंकज झा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, दहेज मुक्त मिथिला, मुम्बई सँ सम्पूर्ण भारतवर्ष मे मैथिल समाज भिन्न-भिन्न कार्य लेल भिन्न-भिन्न नाम सँ संगठन और संस्था  बनौने छथि। बहुत संगठन बहुत रास काज सेहो अपन-अपन स्तर सँ कय रहल अछि। मूल उद्येश सबहक यैह होइत छैक जे अपन मैथिल समाज केर आपसी समन्वय सँ होयत सब सार्थक कार्य

नेपाली भाषा स्रष्टा दिनेश अधिकारी संग सृजन-संवाद

विराटनगर, २५ जनबरी, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!! नेपाली कवि एवं गीतकार दिनेश अधिकारी संग सृजन-संवाद   सिर्जन विन्दु, विराटनगर द्वारा आयोजित ‘दिनेश अधिकारी संग सृजनसंबाद’ कार्यक्रम मे विराटनगर केर साहित्य जगत् केर विभिन्न स्रष्टा लोकनि भाग लेलनि। कार्यक्रम संयोजक सुमन पोखरेल जी द्वारा नेपाली भाषाक जानल-मानल कवि तथा गीतकार दिनेश अधिकारी सप्तनीक केँ दोपटा ओढा सम्मान नेपाली भाषा स्रष्टा दिनेश अधिकारी संग सृजन-संवाद

मैथिली गीतक नवका एल्बमः कनियां लथार मारैय

समस्तीपुर, जनबरी २५, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!! युवा गीतकार अमित मिश्र मैथिली जिन्दाबाद केँ जानकारी करबैत कहलैन अछि जे अश्लीलतासँ दूर पारिवारिक आ रोमांटिक गीतसँ सजल हमर नवका एलबम “कनियां लथार मारैय” रिलीज होमय जा रहल अछि। एहि एल्बम मे अपन मीठगर स्वर देने छथि डा. रितेश कुमार झा – एहिमे कुल सात टा गीत अछि । जाहिमे मैथिली गीतक नवका एल्बमः कनियां लथार मारैय

मिथिला गाबय गीतः शिव कुमार झा टिल्लू

विशिष्ट व्यक्तित्व परिचयः मैथिली कवि एवं गीतकार शिव कुमार झा ‘टिल्लू’ विधा : मैथिली आ हिन्दीक साहित्यकार आ समालोचक जन्म : अपन मातृक बिहार प्रांतक बेगूसराय जिलाक मालीपुर गाँव मे ११ दिसंबर १९७३ केँ भेल. पिता :स्वर्गीय काली कान्त झा बूच ( मैथिली साहित्यक चर्चित गीतकार ) माता : स्वगीया चन्द्रकला झा पैतृक गाँव : मिथिला गाबय गीतः शिव कुमार झा टिल्लू

गीताः सृष्टिक आदि सँ परंपरा सँ आबि रहल अछि ई गूढतम् ज्ञान

गीताक तेसर बेरुक स्वाध्याय (निरंतरता मे…. कर्मयोग केर समस्त सिद्धान्त बतबैत भगवान् द्वारा मनुष्यक मूल शत्रु काम आर क्रोध कहल गेल, निश्चयपूर्वक एहि दुइ केँ मारबाक संपूर्ण प्रक्रिया बतबैत मारबाक लेल कहल गेल…. आर आगू चारिम अध्याय मे संन्यास योग पर विवेचना आरम्भ…) भगवान् कहलनि, इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम्। विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत्॥४-१॥ एवं परम्पराप्राप्तमिमं राजर्षयो गीताः सृष्टिक आदि सँ परंपरा सँ आबि रहल अछि ई गूढतम् ज्ञान