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प्रवीण नारायण चौधरी

कतार केर राजधानी दोहा मे आठम ‘साँझक चौपारि पर’ संपन्न

अब्दुर रज्जाक राइन, दोहा। मार्च २९, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!! दोहा-कतारमे मासिक साहित्यिक गोष्ठी ‘‎साँझक चौपारि पर’‬ केर आठम मासिक  बैसार सम्पन्न  “मातृभाषाक जगेर्णा हमरासबहक प्रेरणा” मूल नाराक संग विगत ८  मास सँ निरन्तर रुप मे आयोजना होइत आबि रहल मैथिली काव्य-सन्ध्या अन्तर्गतक कार्यक्रम साँझक चौपारि पर केर आठम  मासक बैसार २५ मार्च  २०१६ बितल शुक्र दिन कतार केर राजधानी दोहा मे आठम ‘साँझक चौपारि पर’ संपन्न

सर्टिफिकेट

सर्टिफिकेट……..! – संतोष कुमार संतोषी, धरान, नेपाल। लाखक लगानी – परिवार, समाज आ स्वयं के आशा, सपना, भरोसा……. सर्टिफिकेट! ताहि सर्टिफिकेट के पुरान सन एकटा झोरी में राईख, काँख में लटकेने, दिन भैरि सहरक कार्यालय सब में दौरैत- दौरैत अफसियाँत भेल ओ…. मात्र शरिरहि टा सँ नहिं, मोन सँ सेहो थकित-चकित भेल रहय. समाजक संस्कार आ सर्टिफिकेट

उपेक्षित अछि ओ स्थान जतय सँ होली शुरु भेल होली….

उपेक्षित अछि ओ स्थान जतय सँ प्रगट भेल छलाह नरसिंह भगवान् – साभार आलोक आनन्द केर फेसबुक स्टेटस पर प्रकाशित रिपोर्ट “जतय असली होलिकाक दहन भेल, जाहि ठाम सँ वास्तविक होलीक शुरुआत भेल, ओ स्थान आइ उपेक्षित अछि, ओ बाट जोहि रहल अछि अपेक्षित सहयोग केर।” ओना तऽ अपन शहर पुर्णियां मे कतेको मंदिर-मस्जिद आर अन्य धार्मिक आस्था सँ जुड़े स्थान उपेक्षित अछि ओ स्थान जतय सँ होली शुरु भेल होली….

कतेक रंगक लोकः सम-सामयिक विचार

कतेक रंगक लोक….. – प्रवीण नारायण चौधरी   होली थिकैक। रंग-अबीर केर कतेको रंग देखाएत अछि। दृश्य कतेक रंग – अदृश्य सेहो बहुते रंग। अपन रंग जँ नहि जमल तऽ भांगक संग जमाओल कतेक रंग। ठीक छैक। होली पर रंगक फुहार – अबीर-गुलाल – सब ठीक छैक। मुदा जीवनक आर दिन मे रंगक पकड़ कमजोर कतेक रंगक लोकः सम-सामयिक विचार

आध्यात्मिक होली मे जीवन लेल कतेको सीख निहित अछि

विचार आलेख – प्रवीण नारायण चौधरी होली मनेबाक परंपरा मे रंग-अबीर तऽ अछिये… मुदा एकर माहात्म्य सेहो हमर हृदय केँ बेर-बेर टच करैत रहल अछि।   हिरण्यकशिपु केर कठोर तपस्या उपरान्त ओ वरदान मंगबाक समय मृत्यु पर विजय प्राप्त करबाक लेल अपन सर्वोत्तम बुद्धिक प्रयोग केलक। एक तरफ तपस्या समान दुरह कर्म केलक, दोसर तरफ आध्यात्मिक होली मे जीवन लेल कतेको सीख निहित अछि

होलीः शास्त्रमत आ परंपरा

होली माहात्म्यः आध्यात्म आ व्यवहार – प्रवीण नारायण चौधरी हिन्दू शास्त्रमतानुसार हिरण्याकशिपु नामक एक अतिमहात्त्वाकांक्षी राजा छलाह जिनक इच्छा सभ सँ महान लोक बनबाक छलन्हि। एहि इच्छाक पुर्तिलेल ओ घोर तपस्या कयलन्हि आ ब्रह्माजी सँ वर प्राप्त कयलन्हि। ब्रह्माजी हुनक भक्तिपूर्ण कठोर तपस्यासँ प्रसन्न भेलापर हुनका एहेन इच्छा पुर्ति करैक वर देलन्हि जाहि अनुसारे हिरण्याकशिपु होलीः शास्त्रमत आ परंपरा

आब जेहेन लागए, मुदा हास्य थीक आ सेहो होली विशेष

फगुआ-विशेष किछु रचना – अमर नाथ झा, महरैल, मधुबनी। खटमधूर मनुखक जीवन भेलइ उस्सठ, रहलइ नै किछु लास्य हास के बूझय गारि सम , गारि लगइ जनु हास्य । जेकरा नहिं सामर्थ्य हो , अपनहुं पर हँसबाक से अधिकारी कथमपि नै दोसर घर धँसबाक। व्यंग-मुस्सरिक असरि हो एतबे,जते सहसगर बुन्न मोन विदीर्ण करइ नहिं किछुओ,अंग-माथ आब जेहेन लागए, मुदा हास्य थीक आ सेहो होली विशेष

होली विशेषः गाम अपन आब गाम नै रहलै

कविताः गाम अपन आब गाम नै रहलै – रवि झा, दहेज मुक्त मिथिला सदस्य (सितम्बर १२, २०१४ केँ प्रेषित) लोक – वेद बैसार रहै छल, रंग – रीति आचार रहै छल, के छोट-ज्येष्ठ आ के समतुल्य, सभसं समुचित व्यवहार रहै छल, आब विचारक नाम नै रहलै , गाम अपन आब गाम नै रहलै . भोरे होली विशेषः गाम अपन आब गाम नै रहलै

मिथिलाक ऐतिहासिक शिलालेख केर रक्षा स्वयं करू

इतिहास बचेबाक सार्वजनिक अपील – पंडित भवनाथ मिश्र, मिथिलाक्षर लिपिकेर पुरालेखविद्  पंडित भवनाथ बाबु वर्तमान समय महावीर मन्दिर, पटना मे प्रकाशन तथा शोध अधिकारी केर पद पर कार्यरत छथि। समय-समय पर मिथिलाक पुरातन आलेख आदि पर हिनक विचार सँ आम मैथिल जनमानस लाभान्वित होएत रहल अछि, कम सँ कम सरोकारवाला मैथिल जिज्ञासू व मुमुक्षु लेल मिथिलाक ऐतिहासिक शिलालेख केर रक्षा स्वयं करू

पं. सुरेश्वर झा लेल श्रद्धाञ्जलि सभा वाचस्पतिनगर (ठाढी) मे

वाचस्पतिनगर (ठाढी), मधुबनी। मार्च २२, २०१६. मैथिली जिन्दाबाद!! आजुक दिन अंधराठाढ़ीक ठाढ़ी गाम मे भामती वाचस्पति समिति द्वारा डॉ. सुरेश्वर झाक स्मृति में श्रद्धांजलि सभाक आयोजन भामती अशोक वाटिका में ओ वाचस्पतिक प्रतिमाक समक्ष कएल गेल। विदित हो जे विद्यावारिधि पंडित वाचस्पति मिश्र केर प्रतिमा अनावरण समाहरोहक अध्यक्षता महापरिनिर्माण ( मृत्यु ) स मात्र दुइ पं. सुरेश्वर झा लेल श्रद्धाञ्जलि सभा वाचस्पतिनगर (ठाढी) मे